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South Korea Impeachment Row: राष्ट्रपति येओल को हिरासत में लेने का दूसरा प्रयास, सख्ती से टकराव बढ़ने का खतरा

Wed, 15 Jan 2025 05:13 AM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 15 Jan 2025 05:13 AM IST
सार

भ्रष्टाचार जांच कार्यालय और पुलिस संयुक्त रूप से मार्शल लॉ मामले की जांच कर रहे हैं। राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा ने 3 जनवरी को उनके हिरासत में लेने के शुरुआती प्रयास को नाकाम कर दिया था, लेकिन अब जांच एजेंसियों ने दोबारा और अधिक बलपूर्वक उन्हें हिरासत में लेने का प्रयास किया है। 

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यून सुक येओल - फोटो : एएनआई

विस्तार

दक्षिण कोरियाई कानून प्रवर्तन अधिकारी बुधवार सुबह राजधानी सियोल में महाभियोग लगाए गए राष्ट्रपति यून सुक येओल के आधिकारिक निवास पहुंचे। इस दौरान अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में लेने का दूसरा प्रयास शुरू किया। यह प्रयास पिछले महीने उनके द्वारा मार्शल लॉ लगाने के मामले में हो रहा है। 

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बता दें कि तीन दिसंबर को राष्ट्रपति यून ने मार्शल लॉ की घोषणा की थी। यह देखा जा रहा है कि उनकी यह घोषणा क्या  विद्रोह के प्रयास के बराबर थी। भ्रष्टाचार जांच कार्यालय और पुलिस संयुक्त रूप से इस मामले की जांच कर रहे हैं। राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा ने 3 जनवरी को उनके हिरासत में लेने के शुरुआती प्रयास को नाकाम कर दिया था, लेकिन अब जांच एजेंसियों ने दोबारा और अधिक बलपूर्वक उन्हें हिरासत में लेने का प्रयास किया है। 
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राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा ने यून की सुरक्षा को बताया दायित्व
यून की हिरासत के लिए आदलती वारंट के बावजूद, राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा ने कहा है कि महाभियोग लगाए गए राष्ट्रपति की सुरक्षा करना उसका दायित्व है। राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा ने अपनी जिम्मेदारी बताते हुए यून के निवास को कंटीले तारों से घेर दिया है और रास्ते में बसों की कतारें लगा दी हैं। वहीं, भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी के वाहन यून के निवास के पास देखे गए और काली जैकेट पहने पुलिस अधिकारियों की कतारें राष्ट्रपति यून के निवास के गेट की ओर बढ़ती देखी गईं। 
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इस दौरान यून की पीपुल्स पावर पार्टी के सांसद और एक वकील को उनके निवास के गेट के पास खड़े देखा गया। उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी अधिकारियों और घर में अंदर घुसने की कोशिश कर रहे पुलिस अधिकारियों से बहस की। 

यून के समर्थक और आलोचकों ने किया विरोध प्रदर्शन
इस बीच, यून के सैकड़ों समर्थकों और आलोचकों ने उनके निवास के पास विरोध प्रदर्शन किया। एक पक्ष उनका बचाव कर रहा है, जबकि दूसरा उन्हें जेल में डालने की मांग कर रहा है। वहीं, हजारों पुलिस अधिकारी यून के निवास की घेराबंदी करके स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे थे। 

चुंग ने हिरासत प्रयासों को बंद करने का अनुरोध किया
राष्ट्रपति यून के चीफ ऑफ स्टाफ चुंग जिन-सुक ने मंगलवार को कानून प्रवर्तन एजेंसियों से उन्हें हिरासत में लेने के अपने प्रयासों को बंद करने का अनुरोध किया। चुंग ने कहा कि यून से उनके निवास पर पूछताछ की जा सकती है। हालांकि, भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी और पुलिस ने उन्हें बाहर खींचने का प्रयास किया, जैसे कि वह दक्षिण अमेरिकी ड्रग कार्टेल के सदस्य हों। 

चुंग ने बिना परामर्श दिया बयान: वकील
वहीं, राष्ट्रपति के वकीलों में से एक यूं कब-क्यूं ने कहा कि चुंग ने यह बयान बिना परामर्श के दिया। कानूनी टीम के पास जांचकर्ताओं द्वारा पूछताछ के लिए राष्ट्रपति को उपलब्ध कराने की तत्काल कोई योजना नहीं है। अगर यून को हिरासत में लिया जाता है, तो जांचकर्ता अदालत से औपचारिक गिरफ्तारी की अनुमति के लिए अपील करेंगे। अन्यथा उन्हें 48 घंटे बाद रिहा कर दिया जाएगा। 

बता दें कि राष्ट्रपति यून ने कई सप्ताह से सियोल में अपना आधिकारिक निवास नहीं छोड़ा है, और राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा ने 3 जनवरी को उन्हें हिरासत में लेने से रोक दिया था। 

अंगरक्षकों को भी गिरफ्तार करने की पुलिस ने दी चेतावनी
राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी ने हाल के दिनों में सियोल और निकटवर्ती ग्योंगगी प्रांत में फील्ड कमांडरों की कई बैठकें बुलाई हैं, ताकि उनके हिरासत प्रयासों की योजना बनाई जा सके, और उन बलों के आकार ने अटकलों को हवा दी कि संभावित बहु-दिवसीय ऑपरेशन में एक हजार से अधिक अधिकारियों को तैनात किया जा सकता है। एजेंसी और पुलिस ने खुले तौर पर चेतावनी दी है कि वारंट के निष्पादन में बाधा डालने वाले राष्ट्रपति के अंगरक्षकों को गिरफ्तार किया जा सकता है।


मामले पर सांविधानिक न्यायालय कर रहा विचार
तीन दिसंबर को यून ने मार्शल लॉ घोषित किया था और सेना को नेशनल असेंबली के चारों ओर तैनात किया था, लेकिन इसे कुछ घंटों बाद हटा दिया गया था। इसके बाद, 14 दिसंबर को विपक्ष के वर्चस्व वाली विधानसभा ने उन पर विद्रोह का आरोप लगाते हुए महाभियोग चलाने के लिए मतदान किया था। अब इस मामले पर सांविधानिक न्यायालय विचार कर रहा है कि यून को औपचारिक रूप से पद से हटाया जाए या आरोपों को खारिज करके उन्हें बहाल किया जाए। 

 

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