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ULFA: शांति समझौते को सिंगापुर ने सराहा, कहा- इस उपलब्धि से पूर्वी भारत में विदेशी निवेश की संभावनाएं खुलेंगी

Sat, 30 Dec 2023 11:38 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 30 Dec 2023 11:38 PM IST
सार

केंद्र और राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंधित संगठन उल्फा के बीच हुए शांति-समझौते को सिंगापुर ने भी सराहा है। सिंगापुर ने कहा कि इस उपलब्धि के कारण पूर्वोत्तर क्षेत्र में सिंगापुर से विदेशी निवेश में वृद्धि होगी। 

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Singapore praised the peace agreement with ULFA possibilities of foreign investment in Eastern India increases
India and Singapore Flag - फोटो : पीटीआई

विस्तार

केंद्र और असम सरकार द्वारा प्रतिबंधित संगठन उल्फा के बीच हुए शांति-समझौते को सिंगापुर ने भी सराहा है। सिंगापुर ने कहा कि इस उपलब्धि के कारण पूर्वोत्तर क्षेत्र में सिंगापुर से विदेशी निवेश में वृद्धि होगी। यह पूर्वोत्तर में शांति की दिशा में बड़ा फैसला है। दरअसल, शुक्रवार को सरकार और उल्फा के बीच शांति समझौता हुआ था, जिसमें असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा और गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए थे।

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भारत में पदस्थ सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग ने एक्स पर ट्वीट कर कहा कि उल्फा के साथ त्रिपक्षीय शांति समझौता सराहनीय है। हम उल्फा, भारत सरकार और असम सरकार के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते से खुश हैं। इससे सिर्फ असम ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वी भारत में शांति स्थापित होगी और सिंगापुर सहित अन्य विदेशी निवेशकों को पूर्वोत्तर में निवेश के लिए बढ़ावा मिलेगा। वोंग ने बताया कि यह ऐतिहासिक दिन है। 
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एक दिन पहले पीएम मोदी ने भी की थी सराहना
इससे पहले, शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि असम की शांति और विकास की यात्रा में यह समझौता बेहद अहम है। यह मील का पत्थर है। यह समझौता असम में स्थायी प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है। मैं ऐतिहासिक उपलब्धि में शामिल लोगों के प्रयासों की सराहना करता हूं। हम सभी के लिए एकता, विकास और समृद्धि का भविष्य सुनिश्चित कर रहे हैं। 
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अब जानिए, प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन के बारे में
अलगाववादी संगठन उल्फा का गठन अप्रैल 1979 में बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) से आए बिना दस्तावेज वाले अप्रवासियों के खिलाफ आंदोलन के बाद हुआ था। फरवरी 2011 में यह दो समूहों में विभाजित हो गया था और अरबिंद राजखोवा के नेतृत्व वाले गुट ने हिंसा छोड़ दी थी। यह गुट बिना शर्त सरकार के साथ बातचीत के लिए सहमत है। दूसरे उल्फा गुट का नेतृत्व करने वाले परेश बरुआ बातचीत के खिलाफ हैं। वार्ता समर्थक गुट ने असम के मूल निवासियों की भूमि के अधिकार समेत उनकी पहचान और संसाधनों की सुरक्षा के लिए सुधारों की मांग की है।

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