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Singapore: अब भारतीय रेस्त्रां मालिक भी रख सकेंगे इन तीन एशियाई देशों के रसोइये; त्योहारों पर होगी आसानी
Wed, 06 Nov 2024 06:39 AM IST
शुभम कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर
Published by: शुभम कुमार
Updated Wed, 06 Nov 2024 06:39 AM IST
सार
सिंगापुर की सरकार ने भारतीय रेस्त्रां मालिकों को राहत देते हुए भारतीय रसोइयों को तीन दक्षिण एशियाई देश भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका से काम पर रखने की अनुमति दी है।
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सिंगापुर में भारतीय रेस्त्रां मालिकों को राहत
- फोटो : ANI
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विस्तार
सिंगापुर में भारतीय रेस्त्रां के लिए रसोइये ढूंढना आसान नहीं होता और खासकर त्योहारों जैसे दीवाली के समय यह और भी मुश्किल हो जाता है। इसी बात से परेशान होकर रेस्त्रां मालिकों ने सिंगापुर सरकार को रसोइये को लेकर आवेदन किया था। जिसको लेकर सरकार ने रस्तरां मालिकों को राहत देते हुए भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका से वर्क परमिट पर रसोइये नियुक्त करने की अनुमति दी गई है।
बता दें कि सितंबर पिछले साल से आवेदन स्वीकार किए जाने के बाद पहले तीन महीनों में 400 भारतीय भोजनालयों ने इन कामकाजी परमिटों का इस्तेमाल किया। जिसको लेकर भारतीय रेस्त्रां एसोसिएशन के अध्यक्ष गुर्चरण सिंह ने कहा, त्योहारों के दौरान हमें बहुत सारे हाथों की जरूरत होती है, क्योंकि बहुत सारी खास चीजें बनानी होती हैं जैसे मीठे पकवान, जो हमारे सामान्य मेनू में नहीं होते।
रेस्त्रांओं ने किया था आवेदन
रेस्त्रांओं द्वारा किए गए आवेदन का मूल्यांकन प्रसिद्ध शेफ जैसे उद्योग के विशेषज्ञ करते हैं, और सरकारी एजेंसियां भी इसमें शामिल होती हैं, जिसमें भारतीय धरोहर केंद्र भी शामिल है। इस फैसले से लाभ उठाने वाले रेस्त्रांओं में से एक है रिवरवॉक तंदूर, जो रंगून रोड पर स्थित है। इसके प्रबंधक निदेशक शरणजीत कौर ने इसे एक "सपने के सच होने" जैसा बताया, क्योंकि रेस्त्रां को शेफ की भर्ती में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
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क्या कहना है गायत्री रेस्त्रां
गायत्री रेस्टोरेंट के प्रबंध निदेशक एस महेन्द्रन ने कहा, "इस कदम ने भारतीय रेस्त्रां को अपनी सेवा में सुधार करने का मौका दिया है। हालांकि रेस्त्रांओं ने अधिक शेफ भर्ती करने के लिए सरकार का धन्यवाद किया, वे चाहते हैं कि विदेशी कामकाजी श्रमिकों के लिए कोटा बढ़ाया जाए, ताकि मांग पूरी हो सके। वर्तमान में इस तरह के श्रमिकों के लिए कोटा कुल श्रमिकों का 8 प्रतिशत है।
महेंद्रन ने बताई मजदूरी
महेंद्रन ने कहा आपको एक विदेशी भारतीय शेफ रखने के लिए 12 स्थानीय श्रमिकों की जरूरत होती है।" उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कोटे को बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा, रिवरवॉक तंदूर को यह भी उम्मीद है कि वह अपने 11 रोजगार पास (EP) धारकों को बनाए रख सके, जिन्होंने कंपनी के साथ 10 से ज्यादा साल काम किया है। कौर ने कहा, "हमारे पास जो EP धारक हैं, मुझे लगता है कि उन्हें बढ़ा दिया जाना चाहिए या एक और मौका दिया जाना चाहिए, क्योंकि इसी से हम जिंदा हैं।
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बता दें कि सितंबर पिछले साल से आवेदन स्वीकार किए जाने के बाद पहले तीन महीनों में 400 भारतीय भोजनालयों ने इन कामकाजी परमिटों का इस्तेमाल किया। जिसको लेकर भारतीय रेस्त्रां एसोसिएशन के अध्यक्ष गुर्चरण सिंह ने कहा, त्योहारों के दौरान हमें बहुत सारे हाथों की जरूरत होती है, क्योंकि बहुत सारी खास चीजें बनानी होती हैं जैसे मीठे पकवान, जो हमारे सामान्य मेनू में नहीं होते।
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रेस्त्रांओं ने किया था आवेदन
रेस्त्रांओं द्वारा किए गए आवेदन का मूल्यांकन प्रसिद्ध शेफ जैसे उद्योग के विशेषज्ञ करते हैं, और सरकारी एजेंसियां भी इसमें शामिल होती हैं, जिसमें भारतीय धरोहर केंद्र भी शामिल है। इस फैसले से लाभ उठाने वाले रेस्त्रांओं में से एक है रिवरवॉक तंदूर, जो रंगून रोड पर स्थित है। इसके प्रबंधक निदेशक शरणजीत कौर ने इसे एक "सपने के सच होने" जैसा बताया, क्योंकि रेस्त्रां को शेफ की भर्ती में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
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क्या कहना है गायत्री रेस्त्रां
गायत्री रेस्टोरेंट के प्रबंध निदेशक एस महेन्द्रन ने कहा, "इस कदम ने भारतीय रेस्त्रां को अपनी सेवा में सुधार करने का मौका दिया है। हालांकि रेस्त्रांओं ने अधिक शेफ भर्ती करने के लिए सरकार का धन्यवाद किया, वे चाहते हैं कि विदेशी कामकाजी श्रमिकों के लिए कोटा बढ़ाया जाए, ताकि मांग पूरी हो सके। वर्तमान में इस तरह के श्रमिकों के लिए कोटा कुल श्रमिकों का 8 प्रतिशत है।
महेंद्रन ने बताई मजदूरी
महेंद्रन ने कहा आपको एक विदेशी भारतीय शेफ रखने के लिए 12 स्थानीय श्रमिकों की जरूरत होती है।" उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कोटे को बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा, रिवरवॉक तंदूर को यह भी उम्मीद है कि वह अपने 11 रोजगार पास (EP) धारकों को बनाए रख सके, जिन्होंने कंपनी के साथ 10 से ज्यादा साल काम किया है। कौर ने कहा, "हमारे पास जो EP धारक हैं, मुझे लगता है कि उन्हें बढ़ा दिया जाना चाहिए या एक और मौका दिया जाना चाहिए, क्योंकि इसी से हम जिंदा हैं।