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सिंगापुर में हिजाब पर रोक का विरोध, राष्ट्रपति ने कहा- भेदभाव की कोई जगह नहीं

Wed, 23 Sep 2020 04:12 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 23 Sep 2020 04:12 PM IST
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Singapore debates ban on wearing hijab at workplace
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

दुनिया के सबसे आधुनिक देशों में शुमार सिंगापुर में इन दिनों महिलाओं के हिजाब पहनने पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग हो रही है। करीब 40 लाख की आबादी वाले सिंगापुर में कई कार्य क्षेत्रों में हिजाब पहनने की अनुमति नहीं है। इसे लेकर पहले भी आवाजें उठती रही हैं लेकिन हाल ही में सामने कुछ ताजा मामलों के बाद इस प्रतिबंध को हटाए जाने की मांग और तेज हो गई है। 

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ताजा मामला एक डिपार्टमेंटल स्टोर में सामने आया जहां प्रमोटर के पद पर काम करने वाली लिए एक महिला से हिजाब उतारने के लिए कहा गया। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जिसके बाद डिपार्टमेंटल स्टोर ने इसे लेकर माफी मांगी। इसके साथ ही स्टोर ने कहा कि अब वह परिसर में काम करने वाले लोगों को हिजाब या कोई भी धार्मिक वस्त्र पहनने से नहीं रोकेगा।
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हिजाब पहनने पर लगे प्रतिबंध को हटाने के लिए यहां एक ऑनलाइन हस्ताक्षर मुहिम भी चलाई जा रही है। इस मुहिम में शामिल फराह एक अस्पताल में फिजियोथेरेपिस्ट हैं। उन्हें भी काम के लिए हिजाब पहनना छोड़ना पड़ा था। वह अपने पहले साक्षात्कार के बारे में बताती हैं, 'मुझसे कहा गया कि अगर मैं हिजाब पहनूंगी तो उनके यहां काम नहीं कर सकती।' 
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सिंगापुर में मुसलमानों की आबादी करीब 15 फीसदी है। अधिकतर स्थानों पर मुस्लिम महिलाओं के हिजाब पहनने पर कोई पाबंदी या रोक-टोक नहीं है। लेकिन, कुछ पेशे ऐसे हैं जो अपने यहां काम करने वाली मुस्लिम महिलाओं को हिजाब पहनने की अनुमति नहीं देते हैं। फराह सवाल करती हैं कि आखिर हिजाब को हमारी नौकरी के रास्ते में बाधा क्यों बनाया जाना चाहिए?


सिंगापुर में ऐसी स्थिति तब है जब यहां की राष्ट्रपति हलीमा याकूब खुद हिजाब पहनती हैं। इस मामले को लेकर उनका कहना है कि भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है, यह किसी व्यक्ति से रोजी कमाने का अधिकार छीनता है। एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि लोगों का मूल्यांकन उनके गुणों और उनकी कार्यक्षमता के आधार पर होना चाहिए, किसी अन्य आधार पर नहीं।

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