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न्यूजीलैंड: कंपनी के प्रबंधक ने सिख ट्रक चालकों को बताया 'आतंकवादी', मानवाधिकार आयोग पहुंचा मामला

Fri, 03 Mar 2023 06:23 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वेलिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वेलिंगटन Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 03 Mar 2023 06:23 PM IST
सार

Racial Abuse In New Zealand रमिंदर सिंह ने बताया कि एक नए प्रबंधक ने कथित तौर कहा कि सभी सिख आतंकवादी हैं। एक दूसरी घटना में उसने एक सहयोगी के साथ चल रही चर्चा को रोका और सिख समुदाय के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। 

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Sikh truck drivers in New Zealand take boss to Human Rights Commission over racial abuse
सिख (सांकेतिक) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

न्यूजीलैंड में नस्लीय दुर्व्यवहार के खिलाफ दो सिख ट्रक चालकों ने अपने पूर्व बॉस के खिलाफ मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। ट्रक चालकों ने पूर्व बॉस पर एक प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई करने में उदासीनता का आरोप लगाया है। 

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स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक, रमिंदर सिंह और सुमित नंदपुरी दक्षिणी जिले तोविंग में एक कंपनी में काम करते थे। पिछले साथ कंपनी के एक प्रबंधक के कथित रूप से उनके साथ नस्लीय दुर्व्यवहार किया। जिसके बाद उसके खिलाफ उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। बाद में दोनों ट्रक चालकों ने इस्तीफा दे दिया। 
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रमिंदर सिंह ने बताया कि एक नए प्रबंधक ने कथित तौर कहा कि सभी सिख आतंकवादी हैं। एक दूसरी घटना में उसने एक सहयोगी के साथ चल रही चर्चा को रोका और सिख समुदाय के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। 
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नस्लीय दुर्व्यवहार के बाद दोनों ने वाटसन (पूर्व बॉस) से शिकायत की। लेकिन जब उन्हें लगा कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया। नौकरी छोड़ने के बाद भी नियोक्ता ने दोनों से कोई माफी नहीं मांगी। इसके बजाय उनसे पूछा कि क्या उन्होंने ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की मौत का जश्न मनाया था। 

दोनों ट्रक चालकों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एचआरसी) में शिकायत दर्ज कराई है, जो इसी महीने मध्यस्थता के लिए सुनवाई करेगा। एचआरसी अगर मध्यस्थता करने में विफल रहता है, तो शिकायत को मानवाधिकार समीक्षा न्यायाधिकरण (एचआरआरटी) के पास भेजा जा सकता है। 

ढाई साल तक कंपनी के लिए काम करने वाले रमिंदर सिंह ने कहा कि दोनों व्यक्ति न्यूजीलैंड के नागरिक हैं और उनका साफ-सुथरा ट्रैक रिकॉर्ड है, लेकिन उन्हें अपराधियों की तरह महसूस कराया गया।रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया है कि यह घटना उनके चेहरे पर एक थप्पड़ की तरह थी। रमिंदर ने कहा, न ही कंपनी ने मुझसे माफी मांगी है और न ही प्रबंधक ने। इससे मैं मानसिक और भावनात्मक रूप से आहत हुआ हूं। वहीं, कंपनी के लिए पांच साल से काम करने वाले नंदपुरी ने कहा कि यह नस्लवाद की पांचवीं घटना है, जिसे उन्होंने अनुभव किया है। 


आयोग में दोनों का प्रतिनिधित्व कर रहे सुप्रीम सिख सोसायटी के दलजीत सिंह ने कहा कि यह मामला बहुत परेशान करने वाला है। रिपोर्ट में सिंह के हवाले से कहा गया है, अगर न्यूजीलैंड में कोई भी कहे कि सिख आतंकवादी हैं, तो यह हमारे लिए हैरानी की बात है। उन्होंने कहा, यह पूरी तरह से अविश्वसनीय है और वे बहुत मायूस हैं। 

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