फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Should be vigilant to dangers of unsustainable financing: India tells UNSC meet presided over by China

UNSC: यूएनएससी में भारत ने चीन पर साधा निशाना, कर्ज के जाल को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सतर्क रहने को कहा

Tue, 21 Nov 2023 10:55 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 21 Nov 2023 10:55 PM IST
सार

UNSC: चीन की मेजबानी में चल रही सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने दुनिया को कर्ज जाल के दुष्चक्र को लेकर आगाह किया। भारत ने यह भी कहा कि अगर संसाधनों की कमी बनी रही तो शांति महज दिखावा होगी और विकास एक दूर का सपना रह जाएगा।

विज्ञापन
Should be vigilant to dangers of unsustainable financing: India tells UNSC meet presided over by China
आर मधुसूदन, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर, R Madhu Sudan, R MadhuSudan, MadhuSudan, आर मधुसूदन - फोटो : वीडियो ग्रैब

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक में भारत ने मंगलवार को चीन पर निशाना साधा। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे खतरों से सतर्क रहना चाहिए, जो कर्ज जाल के दुष्चक्र की ओर ले जाते हैं। यूएनएससी की इस बैठक की अध्यक्षता चीन ही कर रहा था। भारत का इशारा बीजिंग की 'कर्ज जाल की नीति' की ओर था। 

विज्ञापन

यूएन में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर आर. मधुसूदन ने सोमवार को कहा, 'अगर संसाधनों की कमी बनी रही तो शांति महज दिखावा होगी और विकास एक दूर का सपना रह जाएगा। इसलिए, भारत ने अपनी मौजूदा जी-20 अध्यक्षता सहित विभिन्न मंचों पर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के सुधारों की दिशा में काम किया है।'
 

विज्ञापन
विज्ञापन

मधुसूदन इस पंद्रह सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र निकाय में नवंबर महीने के लिए आयोजित खुली बहस में बोल रहे थे। इसका विषय 'अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का रखरखाव: सामान्य विकास के जरिए शांति को बढ़ावा देना' था। उन्होंने सुझाव दिया कि हमें पारदर्शी और न्यायसंगत वित्तपोषण पर काम करना चाहिए और अस्थिर वित्तपोषण के खतरों को लेकर सतर्क रहना चाहिए, जो कर्ज जाल के दुष्चक्र की ओर ले जाता है।   
 

विज्ञापन

उन्होंने आगे कहा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले संयुक्त राष्ट्र ने कोरोना महामारी के दौरान वैक्सीन रंगभेद या खाद्य, ईंधन, उर्वरकों और बढ़ती महंगाई को रोकने के लिए संघर्ष किया है, जिसने वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) को अन्यायपूर्ण तरीके से प्रभावित किया है। यह बताने के लिए काफी है कि प्रतिनिधित्व के बिना वैश्विक दक्षिण की आवाज खो जाती है।
 

भारत ने यूएनएसी की स्थायी सदस्यता के विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि इक्कीसवीं सदी की उम्मीदों और जरूरतों के अनुरूप संयुक्त राष्ट्र बहुपक्षवाद के जरिए ही संभव है, खासतौर पर सुरक्षा परिषद की सदस्यता के विस्तार के माध्यम से। मधुसूदन ने कहा, युद्धों, संघर्षों, आतंकवाद, अंतरिक्ष दौड़ और नई उभरती तकनीकियों के खतरों से मुक्त हमारे सामूहिक भविष्य को बनाने के लिए शांति, सहयोग और बहुपक्षवाद जरूरी है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed