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Shortage of Wheat: अब दुनिया पर मंडराने लगा चावल की महंगाई का खतरा

Mon, 13 Jun 2022 04:59 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 13 Jun 2022 04:59 PM IST
सार

चावल की बढ़ती खपत के बीच खबर है कि थाईलैंड और वियतनाम अपने यहां से निर्यात होने वाले चावल की कीमत बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। पिछले हफ्ते एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में बताया गया कि फिलहाल चावल कारोबारी भारत से अधिक मात्रा में चावल खरीद रहे हैं...

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Shortage of Wheat: After many grains, now it is the turn of rice to become expensive
चावल - फोटो : iStock

विस्तार

कई अनाजों के बाद अब बारी चावल के महंगा होने की है। चावल के कारोबार से जुड़े लोगों ने ये आशंका जताई है। दुनिया पहले से ही गेहूं, जई (ओट), कुछ अन्य अनाजों, शक्कर, खाद्य तेलों, और मांस की महंगाई से परेशान है। अब संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के मई के आंकड़ों से सामने आया है कि बीते महीने अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल का भाव 12 महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। पिछले पांच महीनों से लगातार चावल महंगा हो रहा है।

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विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना महामारी और उसके बाद यूक्रेन युद्ध के कारण बने हालात से उर्वरक और ईंधन महंगा हो गए हैं। इनका असर खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ रहा है। इसके अलावा कुछ देशों ने अनाज और खाद्य तेलों के निर्यात पर रोक लगा दी है। उसका असर भी विश्व बाजार में कीमतों पर पड़ा है।

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चावल की मांग बढ़ी

जानकारों के मुताबिक अभी दुनिया में चावल का उत्पादन उचित स्तर पर है। लेकिन गेहूं महंगा होने के कारण चावल की मांग बढ़ गई है। जापानी इन्वेस्टमेंट बैंक नोमुरा की मुख्य अर्थशास्त्री सोनाल वर्मा ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनबीसी से कहा- ‘हमें चावल के दामों पर नजर रखनी होगी। गेहूं महंगा होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने अपने भोजन में चावल की मात्रा बढ़ा दी है। उससे मौजूद भंडार की तुलना में चावल की मांग बढ़ गई है।’

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वर्मा ने कहा कि उर्वरकों की कीमत बढ़ने के कारण खेती की लागत बढ़ गई है। ईंधन की महंगाई भी खेती को प्रभावित कर रही है। फिर भी उन्होंने कहा कि चावल के अन्य अनाजों जितना महंगा होने की संभावना अभी कम है।

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से गेहूं की महंगाई बढ़ती चली गई है। रूस और यूक्रेन दोनों गेहूं के सबसे निर्यातकों में शामिल हैं। लेकिन बीते तीन महीनों से वहां से निर्यात काफी घट गया है। बीते हफ्ते इसके दाम में चार फीसदी की बढ़ोतरी हुई। एक साल पहले की तुलना में आज विश्व बाजार में गेहूं का दाम डेढ़ गुना ज्यादा है।

चावल के दाम बढ़ाने पर विचार, भारत न रोक दे निर्यात

चावल की बढ़ती खपत के बीच खबर है कि थाईलैंड और वियतनाम अपने यहां से निर्यात होने वाले चावल की कीमत बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। पिछले हफ्ते एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में बताया गया कि फिलहाल चावल कारोबारी भारत से अधिक मात्रा में चावल खरीद रहे हैं। वाशिंगटन स्थित अनुसंधान संस्थान- फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट में वरिष्ठ शोधकर्ता डेविड लेबोर्डे ने सीएनबीसी से कहा- ‘अभी मुझे सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर है कि कहीं भारत अगले कुछ हफ्तों में चावल का निर्यात न रोक दे।’

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में चावल उत्पादन के लिहाज से चीन पहले और भारत दूसरे नंबर पर है। इंडोनेशिया तीसरे, बांग्लादेश चौथे, वियतनाम पांचवे और थाईलैंड छठे नंबर पर है।



विशेषज्ञों का कहना है कि चावल की महंगाई का सबसे बुरा असर एशिया पर पड़ेगा, जहां चावल की सबसे ज्यादा खपत होती है। इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट में दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय प्रतिनिधि नफीस मियां ने कहा- ‘ईस्ट तिमोर, लाओस, कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे देशों की आबादी बड़ी है। वहां बड़ी संख्या में लोग खाद्य असुरक्षा का शिकार हैं। ऐसे में अगर चावल महंगा हुआ, तो उन पर बहुत खराब असर पड़ेगा।’

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