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Serbia: राष्ट्रपति वुसिक के खिलाफ असंतोष के बीच संसदीय चुनाव; महंगाई, भ्रष्टाचार और हिंसा से जनता आक्रोशित
Sun, 17 Dec 2023 08:11 PM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बेलग्रेड
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बेलग्रेड
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 17 Dec 2023 08:11 PM IST
सार
सर्बिया में राष्ट्रपति वुसिक के खिलाफ असंतोष पनपने की खबरों के बीच संसदीय चुनाव शुरू हो गए हैं। संसदीय चुनाव के साथ-साथ स्थानीय निकाय के चुनाव भी कराए जा रहे हैं। जनता लगातार बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार और हिंसा के मामलों के कारण आक्रोशित है।
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संसदीय चुनाव में मतदान के दौरान सर्बिया के राष्ट्रपति वुसिक
- फोटो : ANI
विस्तार
दक्षिण पूर्वी यूरोपीय देश सर्बिया में राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुसिक (Aleksandar Vucic) के खिलाफ बढ़ते असंतोष के बीच संसदीय चुनाव की शुरुआत हो गई है। इस देश की जनता के बीच लगातार आसमान छूती जा रही महंगाई, बढ़ते भ्रष्टाचार और हिंसा की घटनाओं को लेकर भारी आक्रोश है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक देश के इस आम चुनाव में राष्ट्रपति वुसिक की पार्टी एसपीएस की अग्निपरीक्षा होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव अचानक कराए जा रहे हैं। पिछले महीने आम चुनाव की घोषणा के बाद रविवार को संसदीय चुनाव के लिए मतदान की शुरुआत हुई। इस चुनाव के बाद सर्बिया की 250 सदस्यीय संसद में जनप्रतिनिधियों का निर्वाचन होगा। नई सरकार का गठन होगा। साथ ही अधिकांश शहरों के स्थानीय निकायों के लिए भी प्रतिनिधि चुने जाएंगे।
खबरों के अनुसार, जनता के बीच पनपते असंतोष और आक्रोश के बावजूद सर्बिया के वर्तमान राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुसिक की दक्षिणपंथी पार्टी- सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SPS) को चुनाव में जीत मिलने की प्रबल संभावना है। ओपिनियन पोल में वुसिक की पार्टी के पक्ष में मजबूत बढ़त दिखाई गई है। संसदीय चुनाव में बढ़त के बावजूद देश की राजधानी बेलग्रेड में निकाय चुनाव वुसिक के लिए बेहद मुश्किल होने के आसार हैं।
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दरअसल, सर्बिया में विपक्षी दलों के गठबंधन ने हिंसा की घटनाओं के खिलाफ दमदार आवाज उठाई है। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक निकाय चुनाव में हिंसा का मुद्दा प्रमुखता से उठाए जाने के कारण राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुसिक को कड़ी चुनौती मिल सकती है। यह भी रोचक है कि खुद वुसिक इस चुनाव में प्रत्याशी नहीं है, लेकिन इस चुनाव को उनके कार्यकाल के प्रति जनमत संग्रह के तौर पर देखा जा रहा है।
यूरोपीय मीडिया की खबरों के मुताबिक इस साल वुसिक की नीतियों के खिलाफ कई बार प्रदर्शन हुए। सर्बिया हिंसा के खिलाफ (Serbia Against Violence) का नारा देकर इसी नाम से गठबंधन भी बनाया गया। इसके समर्थन में सैकड़ों की संख्या में नागरिक सड़कों पर उतरे। जनाक्रोश के कारण वुसिक को कड़ी चुनौती मिलने की अनुमान है।
विरोध की जड़ में करीब सात महीने पहले हुई गोलीबारी की वारदात है। मई में हुई दो घटनाओं में 18 लोगों की मौत हुई थी। इसमें नौ बच्चे शामिल थे। इन घटनाओं के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता ने आने वाले महीनों में देश में बढ़ती महंगाई और सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार को भी बड़ा मुद्दा बना लिया।
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रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव अचानक कराए जा रहे हैं। पिछले महीने आम चुनाव की घोषणा के बाद रविवार को संसदीय चुनाव के लिए मतदान की शुरुआत हुई। इस चुनाव के बाद सर्बिया की 250 सदस्यीय संसद में जनप्रतिनिधियों का निर्वाचन होगा। नई सरकार का गठन होगा। साथ ही अधिकांश शहरों के स्थानीय निकायों के लिए भी प्रतिनिधि चुने जाएंगे।
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खबरों के अनुसार, जनता के बीच पनपते असंतोष और आक्रोश के बावजूद सर्बिया के वर्तमान राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुसिक की दक्षिणपंथी पार्टी- सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SPS) को चुनाव में जीत मिलने की प्रबल संभावना है। ओपिनियन पोल में वुसिक की पार्टी के पक्ष में मजबूत बढ़त दिखाई गई है। संसदीय चुनाव में बढ़त के बावजूद देश की राजधानी बेलग्रेड में निकाय चुनाव वुसिक के लिए बेहद मुश्किल होने के आसार हैं।
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दरअसल, सर्बिया में विपक्षी दलों के गठबंधन ने हिंसा की घटनाओं के खिलाफ दमदार आवाज उठाई है। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक निकाय चुनाव में हिंसा का मुद्दा प्रमुखता से उठाए जाने के कारण राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुसिक को कड़ी चुनौती मिल सकती है। यह भी रोचक है कि खुद वुसिक इस चुनाव में प्रत्याशी नहीं है, लेकिन इस चुनाव को उनके कार्यकाल के प्रति जनमत संग्रह के तौर पर देखा जा रहा है।
यूरोपीय मीडिया की खबरों के मुताबिक इस साल वुसिक की नीतियों के खिलाफ कई बार प्रदर्शन हुए। सर्बिया हिंसा के खिलाफ (Serbia Against Violence) का नारा देकर इसी नाम से गठबंधन भी बनाया गया। इसके समर्थन में सैकड़ों की संख्या में नागरिक सड़कों पर उतरे। जनाक्रोश के कारण वुसिक को कड़ी चुनौती मिलने की अनुमान है।
विरोध की जड़ में करीब सात महीने पहले हुई गोलीबारी की वारदात है। मई में हुई दो घटनाओं में 18 लोगों की मौत हुई थी। इसमें नौ बच्चे शामिल थे। इन घटनाओं के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता ने आने वाले महीनों में देश में बढ़ती महंगाई और सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार को भी बड़ा मुद्दा बना लिया।