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एआई की मदद से तैयार हुआ एंटीबायोटिक, ई-कोली जैसी बीमारियों को करेगा खत्म
Sat, 22 Feb 2020 10:04 AM IST
Sneha Baluni
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: Sneha Baluni
Updated Sat, 22 Feb 2020 10:04 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
अमेरिका के मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से पहली बार एक नया एंटीबायोटिक तैयार किया है। इससे दुनिया के खतरनाक और दवा को बेअसर करने वाले बैक्टिरिया को खत्म करने में मदद मिलेगी।
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जर्नल सेल में प्रकाशित शोध के अनुसार वैज्ञानिकों ने इस नए एंटीबायोटिक को हेलिसिन का नाम दिया है। यह काफी ताकतवार एंटीबायोटिक है जो ई-कोली जैसे बैक्टिरिया को भी आसानी से खत्म कर सकता है। बायोइंजीनियर और एमआईटी की रिसर्च टीम के जेम्स कॉलिन का कहना है कि फिलहाल चूहों पर हेलिसिन का इस्तेमाल किया गया है। जल्द इंसानों पर इसका ट्रायल किया जाएगा।
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एंटीबायोटिक का बैक्टीरिया पर असर घट रहा है। ऐसे में हम एआई की मदद से ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार कर रहे हैं जिससे नए किस्म की दवा की खोज की जाए। शोधकर्ताओं का कहना है कि इंसान के मुकाबले एआई की मदद से काम कम समय में और बेहतर किया जा सकता है।
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इससे चंद दिनों में 10 करोड़ से ज्यादा ऐसे रसायनों की जांच हो सकती है जो बैक्टीरिया खत्म कर सकते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि अब हम एल्गोरिदम बनाने वाले हैं। एल्गोरिदम की मदद से नए एंटीबायोटिक कंपाउंड को पहचानना आसान हो जाता है। यह 30 दिन तक रेसिस्टेंस डेवलप नहीं होने देता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस यौगिक को हमने डायबिटीज के इलाज के लिए विकसित किया था। हमने इसके जरिए कई तरह के संक्रमण का इलाज किया है। शोधकर्ता जोनाथन स्टोक्स के अनुसार, हम एआई का इस्तेमाल करके दवाओं की कीमत कम करने के साथ ही एक ऐसा बाजार तैयार कर रहे हैं जहां से जटिल बीमारियों का इलाज हो सके।
परीक्षण के बाद हुई मॉलेक्यूल की पहचान
एमआईटी के वैज्ञानिकों ने एआई की मदद से 800 प्राकृतिक उत्पादों का एक सेट बनाया है। इसके अलावा उन्होंने 2500 अणुओं पर इसे प्रशिक्षित किया है। उन्होंने 6,000 यौगिकों के बीच इसका परीक्षण किया। आखिर में एक मॉलेक्यूल की पहचान करने में मदद मिली जो एंटीबायोटिक दवाओं से अलग एक रासायनिक संरचना थी।