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शोध: पृथ्वी में हाइड्रोजन का खजाना, विश्व को वर्षों मिलेगी बिजली; यह भंडार धरती पर मौजूद तेल से 26 गुना अधिक
Wed, 18 Dec 2024 04:30 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Wed, 18 Dec 2024 04:30 AM IST
सार
वैज्ञानिकों ने कहा कि हमारी धरती की सतह के नीचे करीब 6.3 लाख करोड़ टन हाइड्रोजन मौजूद है। ये पत्थरों और अंडरग्राउंड रिजरवॉयर में है। हालांकि, वैज्ञानिकों को अभी इस हाइड्रोजन के सटीक स्थान का पता नहीं चल पाया है।
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पृथ्वी
- फोटो : Istock
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विस्तार
वैज्ञानिकों का दावा है कि पृथ्वी की सतह के नीचे हाइड्रोजन का खजाना मौजूद है। इसका मात्र दो फीसदी हिस्सा ही पूरी धरती पर 200 साल तक बिजली की आपूर्ति कर सकता है। ये हाइड्रोजन पत्थरों और जमीन के नीचे स्रोतों में मौजूद है।
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ये धरती पर मौजूद तेल से 26 गुना अधिक है। वैज्ञानिकों ने कहा कि हमारी धरती की सतह के नीचे करीब 6.3 लाख करोड़ टन हाइड्रोजन मौजूद है। ये पत्थरों और अंडरग्राउंड रिजरवॉयर में है। हालांकि, वैज्ञानिकों को अभी इस हाइड्रोजन के सटीक स्थान का पता नहीं चल पाया है।
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सटीक स्थान को खोजने के लिए शोध
वैज्ञानिकों ने धरती में मौजूद हाइड्रोजन की जानकारी देते हुए बताया कि सटीक स्थान की खोज पर शोध जारी है। उम्मीद है कि जल्द ही यह खजाना सार्वजनिक हो जाए।
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करीब 4.5 अरब साल पुराने हैं शनि के चमकीले छल्ले
शनि के चमकीले छल्ले करीब 4.5 अरब साल पुराने हैं। हाल ही में जापानी वैज्ञानिकों ने एक शोध में यह दावा किया। अब तक किए गए शोध में शनि के छल्लों को 10 करोड़ से 40 करोड़ साल पुराना बताया गया था। वैज्ञानिकों ने कहा कि शनि के छल्लों की उम्र हमारी सोच से कहीं अधिक हो सकती है। नासा के कैसिनी मिशन के डाटा के आधार पर इसका दावा किया गया है।
इस कारण से साफ रहते हैं शनि के छल्ले
वैज्ञानिकों ने कहा कि शनि के छल्ले पर धूल की परत न होने के कारण उन्हें साफ देख सकते हैं। जब रेत के कणों से भी छोटे कण छल्लों की बर्फ से टकराते हैं, तो वह वाष्प बन जाते हैं। इसी वजह से छल्ले हमेशा साफ रहते हैं।
छल्लों पर नहीं टिकता गैर-बर्फीला पदार्थ
ह्योडो ने कहा, भले ही छल्ले करीब 2.25 अरब साल पहले बने हों, लेकिन संभावना है कि ये सौरमंडल के शुरुआती समय में बने थे। गैर-बर्फीला पदार्थ इन छल्लों पर टिकता ही नहीं है।