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सऊदी अरब: नींबू की खुशबू के साथ, कृषि में नवाचार को प्रोत्साहन
Wed, 18 Dec 2024 02:34 PM IST
अभिषेक दीक्षित
यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 18 Dec 2024 02:34 PM IST
सार
मोहम्मद अलनवैरन बताते हैं कि मेरे बाईं ओर वो पेड़ हैं, जिन्हें नई तकनीकों से सिंचित किया गया है और दाईं ओर वो पेड़ हैं जिन्हें मैंने पारम्परिक तरीके से अपने हाथ से पानी दिया है। नई तकनीकों से सींचे गए पेड़ अधिक बेहतर तरीके से पनप रहे हैं। उनके रंग, आकार और मजबूती में अंतर साफ नजर आता है, और इन पेड़ों के अच्छे स्वास्थ्य का कारण मुख्यत: सिंचाई का तरीका ही है।
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UN
- फोटो : UN
विस्तार
सऊदी अरब में जल एवं भूमि संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए किसानों को नई सिंचाई तकनीकें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मोहम्मद अलनवैरन एक हरे-भरे नींबू के पेड़ के सामने खड़े हैं, जिससे चार महीने बाद नींबू की पहली उपज हासिल होने वाली है। एक व्यवसायी से किसान बने अलनवैरन पिछले 15 वर्षों से सऊदी अरब के पूर्वी रेगिस्तानी क्षेत्र अल-अहसा में खेती कर रहे हैं। अब जलवायु परिवर्तन और घटती जल आपूर्ति के कारण वो नई तकनीकें व नई फसलें अपना रहे हैं।
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उन्होंने यूएन न्यूज को बताया कि हम इस क्षेत्र में अपने नींबू की खेती पर बहुत गर्व महसूस करते हैं। जब आप इन्हें छूते हैं, तो हाथों पर उनके खट्टे तेल की खुशबू महसूस कर सकते हैं। इससे हमारे बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं और अब तो मुझे इन्हें व्यावसायिक रूप से उगाने का अवसर मिल रहा है। मोहम्मद अलनवैरन, होफुफ शहर के समीप एक मरूद्यान में स्थित अपने छोटे से खेत को निहारते हैं। लगभग एक हजार वर्ग मीटर वाले इस खेत की रेतीली मिट्टी में दो मीटर लंबे लगभग 120 पेड़ लगे हुए हैं, जो पिछले चार साल से बढ़ रहे हैं।
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कुशल सिंचाई तकनीक
मोहम्मद अलनवैरन बताते हैं कि मेरे बाईं ओर वो पेड़ हैं, जिन्हें नई तकनीकों से सिंचित किया गया है और दाईं ओर वो पेड़ हैं जिन्हें मैंने पारम्परिक तरीके से अपने हाथ से पानी दिया है। नई तकनीकों से सींचे गए पेड़ अधिक बेहतर तरीके से पनप रहे हैं। उनके रंग, आकार और मजबूती में अंतर साफ नजर आता है, और इन पेड़ों के अच्छे स्वास्थ्य का कारण मुख्यत: सिंचाई का तरीका ही है।
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मोहम्मद अलनवैरन के खेत में कुशल सिंचाई तकनीक का परीक्षण किया जा रहा है। यह फसल उगाने का एक संसाधन-कुशल उपाय है, जिसे संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा इस क्षेत्र में प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसके लिए वो अपने स्मार्टफोन पर एक एप के जरिए मिट्टी की गुणवत्ता की जांच करते हैं और अपने नींबू के पेड़ों के लिए आवश्यक पानी की जरूरत को समझते व आवश्यकतानुसार उसकी आपूर्ति करते हैं।
जब बारिश होती है, तो सेंसर नम परिस्थितियों को दर्ज कर लेते हैं और निर्धारित जल आपूर्ति रोक देते हैं। अगर पेड़ों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा होता है, तो एप जरूरत पड़ने पर अधिक पानी की आपूर्ति का निर्देश दे सकता है और यह सब कुछ बिना वहां जाए, दूर से ही किया जा सकता है।
जल संकट
पहले मरूद्यान की कृषि भूमि में प्रचुर मात्रा में पानी था, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा में कमी और पानी की अत्यधिक खपत वाली चावल की खेती के कारण जल स्तर नीचे गिरता गया। इससे पानी की उपलब्धता अधिक चुनौतीपूर्ण और महंगी हो गई है। नजदीक के एक अन्य भूखंड पर चावल की खेती करने वाले मोहम्मद अलनवैरन को तब काम बन्द करना पड़ा, जब उनके कुएं का पानी 300 मीटर नीचे चला गया।
FAO के सिंचाई विशेषज्ञ महमूद अब्देलनबी ने बताया कि कुशल सिंचाई से जल की खपत 70 फीसदी तक कम की जा सकती है और यह पर्यावरण के लिए अधिक टिकाऊ है। आमतौर पर सऊदी अरब जैसे देश में भीषण गर्मी के मौसम में खेतों में पानी देने के काम में बहुत समय व मेहनत लगती है। फिलहाल किसानों को जल आपूर्ति के लिए भुगतान नहीं करना पड़ता और स्वचालन (ऑटोमेशन) की वजह से पेड़ों को पानी देने के लिए कम मजदूरों की जरूरत होती है, जिससे अच्छी बचत हो जाती है।
हालांकि, यह एक उन्नत तकनीक है, लेकिन स्थानीय बाजार में आसानी से उपलब्ध है। इसके लिए कुछ वित्तीय निवेश की आवश्यकता होती है, लेकिन FAO के महमूद अब्देलनबी के अनुसार, इससे उत्पादन में वृद्धि होती है और मजदूरी की लागत कम हो जाती है, जिससे अतिरिक्त लाभ मिलता है।
भूमि क्षरण
सऊदी अरब के रेगिस्तानी इलाकों में जलवायु परिवर्तन के कारण सूखे की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, जिससे किसानों को न केवल जल संकट, बल्कि मरुस्थलीकरण व उर्वर भूमि की हानि का सामना करना पड़ रहा है। FAO के साझीदार सऊदी सिंचाई संगठन के जाफर अलमुबारक ने बताया कि कुशल सिंचाई, जलवायु परिवर्तन के प्रति एक समग्र प्रतिक्रिया का हिस्सा है, जिसमें मिट्टी प्रबन्धन एवं फसल चयन भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि ये दृष्टिकोण अपनाकर ना केवल जल का सर्वोत्तम उपयोग किया जा सकता है, बल्कि भूमि पुनर्वास एवं मरुस्थलीकरण से निपटने में भी मदद मिलती है। दुनियाभर में लगभग 40 प्रतिशत भूमि का क्षरण हो चुका है, जिससे जलवायु, जैव विविधता एवं लोगों की आजीविकाओं पर गम्भीर प्रभाव पड़ रहा है। दुनिया के अन्य किसानों की तरह, मोहम्मद अलनवैरन भी अपने लंबे अनुभव और विशेषज्ञता का उपयोग अपनी फसल की उपज बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। यह जरूरत और अवसर दोनों से प्रेरित है।
उन्होंने कहा कि मैं अपनी पूरी खेती के लिए कुशल सिंचाई का तरीका अपनाने पर विचार कर रहा हूं और मुख्य रूप से नींबू की खेती पर ध्यान केंद्रित करना चाहता हूं, जिसके लिए मेरे पास बाजार तैयार है। अगर अन्य किसान भी उनकी राह पर चलते हैं तो इन शुष्क क्षेत्रों में जल आपूर्ति का अधिक कुशल उपयोग सम्भव हो सकेगा, और खेती के जरिए मरुस्थलीकरण की रोकथाम में मदद मिलेगी।
(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)