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बदलाव: भारत का योग सऊदी अरब को कर रहा निरोग, पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त अरब महिला मारवई बोलीं- बदली मेरी जिंदगी

Sat, 19 Oct 2024 05:20 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, रियाद
एजेंसी, रियाद Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 19 Oct 2024 05:20 AM IST
सार

मारवई कहती हैं कि सऊदी अरब के लोगों ने सात साल पहले योग को बेहिचक अपनाया था। अब यह प्राचीन भारतीय पद्धति इस देश में बेहद लोकप्रिय है और इसमें महिलाओं का दबदबा है। मारवई  को 17 साल की उम्र में ऑटोइम्यून बीमारी ल्यूपस एरिथेमेटोसस होने का पता चला और यहीं से उनके योग के सफर का आगाज हुआ। 
 

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Saudi Arabia's Padmashree awardee Nouf Marwai says yoga changed my life
नूफ मारवई - फोटो : पीटीआई

विस्तार

जब मेरी बीमारी की वजह से चिकित्सकों ने माता-पिता से कह दिया, जिंदा नहीं बचूंगी, तो मैंने रियाद में घर पर रहकर योग सीखा और सच में इसने मेरी जिंदगी बदल दी। यह बात सऊदी अरब  की पहली प्रमाणित योग प्रशिक्षक और पद्म श्री पुरस्कार पाने वाली पहली अरब महिला नूफ मारवई ने कही।

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मारवई कहती हैं कि सऊदी अरब के लोगों ने सात साल पहले योग को बेहिचक अपनाया था। अब यह प्राचीन भारतीय पद्धति इस देश में बेहद लोकप्रिय है और इसमें महिलाओं का दबदबा है। मारवई  को 17 साल की उम्र में ऑटोइम्यून बीमारी ल्यूपस एरिथेमेटोसस होने का पता चला और यहीं से उनके योग के सफर का आगाज हुआ। रियाद में घर पर रहकर योग सीखा। बाद में उन्होंने भारत आकर योग सीखने का फैसला किया व 2008 में वह योग व आयुर्वेद के अध्ययन के लिए वह भारत आ गईं। 
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2017 में मारवई ने सऊदी अरब में की योग की शुरुआत
मारवई ने ही 2017 में सऊदी अरब में योग की शुरुआत की। यही वजह रही कि भारत सरकार ने उन्हें 2018 में पद्मश्री से सम्मानित किया। अब वह  2021 में बनी सऊदी योग समिति की प्रमुख हैं, और अरब योग फाउंडेशन भी चलाती हैं। उनका कहना है कि आज सऊदी अरब में योग अधिकतर महिलाएं करती हैं। उन्होंने बताया कि इस जनवरी में अल-वहदा क्लब और सऊदी योग समिति की मक्का में आयोजित दूसरी सऊदी ओपन योग आसन चैंपियनशिप में 56 लड़कियां और सिर्फ 10 लड़के थे।
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सऊदी में नहीं, बाहर से प्रतिरोध झेलना पड़ा
जब उनसे पूछा गया कि इस्लाम जहां पैदा हुआ, उस सऊदी अरब में योग की शुरू करना कितना मुश्किल था। इस पर मारवई ने बताया कि यहां लोगों को बस यह समझने भर की जरूरत थी कि योग का अभ्यास उनके मजहब के खिलाफ नहीं है। सऊदी अरब में योग को लेकर विरोध नहीं था। इसके उलट बाहर से कुछ प्रतिरोध झेलना पड़ा। वह कहती हैं कि अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए किसी भी दर्शन का अध्ययन करने और सीखने में कोई बुराई नहीं है। बेशक, वैदिक दर्शन और योग वेदों जैसी पृष्ठभूमि से आता है, जो वास्तव में प्राचीन हैं और हजारों सालों से मानवता के लिए फायदेमंद रहा है।  


अलग संस्कृति अपनाने में कोई हिचक नहीं
मारवई ने कहा-सऊदी लोग अपने धर्म को जानते हैं। वे अलग-अलग संस्कृतियों को जानने और कुछ ऐसा अपनाने से हिचकिचाते नहीं हैं जो विवादित न हो। वे  कुछ भी ऐसा अपनाने में दिलचस्पी रखते हैं जो सेहत, तंदुरुस्ती के लिए अच्छा हो। बीते साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सऊदी नागरिकों सहित 10,000 लोगों ने शिरकत की।  वहीं, इस साल हज की छुट्टियों के बावजूद, 8,000 लोग इस आयोजन में शामिल हुए।

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