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Aashish Khan Demise: सरोद वादक आशीष खान का निधन, अमेरिका के अस्पताल में 84 साल की आयु में ली अंतिम सांस
Sat, 16 Nov 2024 11:50 PM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लॉस एंजेलिस (अमेरिका)
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लॉस एंजेलिस (अमेरिका)
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 16 Nov 2024 11:50 PM IST
सार
दुनियाभर में सरोद को लोकप्रिय बनाने वाले आशीष खान का अमेरिका में निधन हो गया। उनके भाई आलम खान ने इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया कि आशीष ने 84 साल की आयु में लॉस एंजिल्स के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली।
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सरोद वादक आशीष खान का अमेरिका में निधन
- फोटो : सोशल मीडिया / अमर उजाला
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विस्तार
प्रसिद्ध सरोद वादक आशीष खान (84) का निधन हो गया। उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि खान का निधन बृहस्पतिवार को अमेरिका के लॉस एंजिल्स के एक अस्पताल में हुआ। उनके भाई आलम खान ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, मेरे सबसे बड़े भाई, सरोद वादक और मैहर घराने के खलीफा, उस्ताद आशीष खान का निधन हो गया है। पिछले दो दिनों से वह अस्पताल में भर्ती थे।
इंस्टाग्राम पर भावनाओं का ज्वार
आशीष का अंतिम संस्कार 20 नवंबर को किया जाएगा। ये जानकारी उनके भाई उस्ताद आलम खान ने इंस्टाग्राम पोस्ट में शेयर की। भतीजे शिराज खान ने भी इंस्टाग्राम पर आशीष खान के निधन की खबर साझा की। उन्होंने कहा, 'हम भाग्यशाली हैं कि वह हमारे जीवन में हैं और वह हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।'
सरोद को लोकप्रिय बनाने में योगदान, अंतरराष्ट्रीय संगीतकारों के साथ काम
शास्त्रीय वाद्य संगीत की इस विभूति को देखने के लिए परिवार के सदस्य, उनके कुछ दोस्त और लॉस एंजिल्स में छात्रों का एक समूह मौजूद था। आलम खान ने लिखा, सरोद को लोकप्रिय बनाने के लिए मेरे भाई ने जॉर्ज हैरिसन, एरिक क्लैप्टन और रिंगो स्टार जैसे अंतरराष्ट्रीय संगीतकारों के साथ बहुत काम किया।
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दुनिया भर के कई छात्रों के प्रिय शिक्षक थे आशीष
आशीष एक बेहतरीन सरोद वादक और संगीतकार थे। उनके संगीत ने कई संगीतकारों और श्रोताओं को प्रेरित किया है। वह दुनिया भर के कई छात्रों के प्रिय शिक्षक थे। खान के भतीजे शिराज खान ने भी सोशल मीडिया पर यह खबर साझा की और लिखा, अपने जीवन में आपको पाकर हमें सौभाग्य मिला। आप हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।
1939 में जन्म, दादा, पिता और चाची से तालीम ली
आशीष खान ने बहुत छोटी उम्र में ही सरोद वादन की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। 1939 में मध्य प्रदेश के मैहर में जन्मे आशीष खान ने अपने दादा उस्ताद अलाउद्दीन खान से शुरुआती तालीम ली। दादा सेनिया मैहर घराने के संस्थापक थे। इसके साथ ही उन्होंने अपने पिता उस्ताद अली अकबर खान और चाची अन्नपूर्णा देवी के मार्गदर्शन में भी प्रशिक्षण लिया।
पश्चिमी देशों के दिग्गज कलाकारों के साथ भी काम किया
उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने के साथ-साथ विश्व भर के छात्रों को प्रेरित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पंडित रविशंकर और पन्नालाल घोष जैसे दिग्गजों के पदचिन्हों पर चलते हुए 1989 में उन्हें आकाशवाणी के वाद्यवृन्द समूह से जुड़ने का मौका मिला। उन्हें संगीतकार और संचालक नियुक्त किया गया। आशीष खान ने पश्चिमी देशों में जॉर्ज हैरिसन, रिंगो स्टार, एरिक क्लैप्टन, चार्ल्स लॉयड और एलिस कोलट्रैन जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ भी काम किया।
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इंस्टाग्राम पर भावनाओं का ज्वार
आशीष का अंतिम संस्कार 20 नवंबर को किया जाएगा। ये जानकारी उनके भाई उस्ताद आलम खान ने इंस्टाग्राम पोस्ट में शेयर की। भतीजे शिराज खान ने भी इंस्टाग्राम पर आशीष खान के निधन की खबर साझा की। उन्होंने कहा, 'हम भाग्यशाली हैं कि वह हमारे जीवन में हैं और वह हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।'
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सरोद को लोकप्रिय बनाने में योगदान, अंतरराष्ट्रीय संगीतकारों के साथ काम
शास्त्रीय वाद्य संगीत की इस विभूति को देखने के लिए परिवार के सदस्य, उनके कुछ दोस्त और लॉस एंजिल्स में छात्रों का एक समूह मौजूद था। आलम खान ने लिखा, सरोद को लोकप्रिय बनाने के लिए मेरे भाई ने जॉर्ज हैरिसन, एरिक क्लैप्टन और रिंगो स्टार जैसे अंतरराष्ट्रीय संगीतकारों के साथ बहुत काम किया।
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दुनिया भर के कई छात्रों के प्रिय शिक्षक थे आशीष
आशीष एक बेहतरीन सरोद वादक और संगीतकार थे। उनके संगीत ने कई संगीतकारों और श्रोताओं को प्रेरित किया है। वह दुनिया भर के कई छात्रों के प्रिय शिक्षक थे। खान के भतीजे शिराज खान ने भी सोशल मीडिया पर यह खबर साझा की और लिखा, अपने जीवन में आपको पाकर हमें सौभाग्य मिला। आप हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।
1939 में जन्म, दादा, पिता और चाची से तालीम ली
आशीष खान ने बहुत छोटी उम्र में ही सरोद वादन की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। 1939 में मध्य प्रदेश के मैहर में जन्मे आशीष खान ने अपने दादा उस्ताद अलाउद्दीन खान से शुरुआती तालीम ली। दादा सेनिया मैहर घराने के संस्थापक थे। इसके साथ ही उन्होंने अपने पिता उस्ताद अली अकबर खान और चाची अन्नपूर्णा देवी के मार्गदर्शन में भी प्रशिक्षण लिया।
पश्चिमी देशों के दिग्गज कलाकारों के साथ भी काम किया
उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने के साथ-साथ विश्व भर के छात्रों को प्रेरित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पंडित रविशंकर और पन्नालाल घोष जैसे दिग्गजों के पदचिन्हों पर चलते हुए 1989 में उन्हें आकाशवाणी के वाद्यवृन्द समूह से जुड़ने का मौका मिला। उन्हें संगीतकार और संचालक नियुक्त किया गया। आशीष खान ने पश्चिमी देशों में जॉर्ज हैरिसन, रिंगो स्टार, एरिक क्लैप्टन, चार्ल्स लॉयड और एलिस कोलट्रैन जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ भी काम किया।