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Hormuz Crisis: होर्मुज में समुद्री रास्ता खुलवाना चाहता है भारत; संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जताई चिंता
Tue, 28 Apr 2026 06:52 PM IST
Pavan
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: Pavan
Updated Tue, 28 Apr 2026 06:52 PM IST
सार
भारत ने होर्मुज खुलवाने के लिए संयुक्त राष्ट्र की बैठक में आग्रह किया है। बता दें कि, होर्मुज में समुद्री आवागमन का सुरक्षित और निर्बाध प्रवाह वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और मानवीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत का मानना है कि नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों को खुला रखना वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए सर्वोपरि है।
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योजना पटेल, UNSC में भारत की स्थायी मिशन की प्रभारी राजदूत
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवागमन को जल्द से जल्द बहाल करने का आग्रह किया है। भारत ने अपने नाविकों की सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि किसी भी महत्वपूर्ण जलमार्ग को बंद करने के कथित प्रयासों के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधे परिणाम होते हैं।
यह भी पढ़ें - Afghanistan-Pakistan Conflict: अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में पाकिस्तान का हवाई हमला; सात की मौत, 75 लोग घायल
समुद्री सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 'समुद्री क्षेत्र में जलमार्गों की सुरक्षा और संरक्षण' पर एक खुली बहस को संबोधित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रभारी राजदूत, योजना पटेल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत समुद्री सुरक्षा और जलमार्गों के संरक्षण को वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि के लिए आवश्यक मानता है। भारत ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक वाणिज्य का पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए और जल्द से जल्द सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवागमन बहाल किया जाना चाहिए।
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भारतीय नाविकों की सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति
बता दें कि, भारत दुनिया के शीर्ष तीन नाविक-आपूर्ति करने वाले देशों में से एक है, जो वैश्विक समुद्री कार्यबल का लगभग 13 प्रतिशत योगदान देता है। इसलिए, भारत अपने नाविकों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर गहराई से चिंतित है। राजदूत पटेल ने कहा, 'किसी भी महत्वपूर्ण जलमार्ग में व्यवधान, बाधा या कथित बंद होने के वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और मानवीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर सीधे परिणाम होते हैं।' पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच, विदेश मंत्रालय ने पिछले महीने कहा था कि क्षेत्र में 'कई घटनाओं' में आठ भारतीय नागरिकों की जान चली गई है, जबकि एक अभी भी लापता है।
तत्काल हल की जाने वाली चिंताएं
भारत ने इस बात पर जोर दिया कि तत्काल हल की जाने वाली मुख्य चिंताएं नौवहन की सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखलाओं की निरंतरता (विशेष रूप से मानवीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर जोर के साथ), समुद्री जागरूकता में वृद्धि और नाविकों के लिए संचार की सुविधा प्रदान करना है।
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव की अपील
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि विश्व के जलमार्गों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की परीक्षा बन गई है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के आवागमन में व्यवधान पर चिंता व्यक्त की। फरवरी में प्रतिदिन लगभग 130 जहाज गुजरते थे, जो मार्च में घटकर केवल छह रह गए। गुटेरेस ने संघर्षरत पक्षों से जलडमरूमध्य को खोलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जहाजों को बिना किसी टोल या भेदभाव के गुजरने दिया जाए।
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समुद्री सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 'समुद्री क्षेत्र में जलमार्गों की सुरक्षा और संरक्षण' पर एक खुली बहस को संबोधित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रभारी राजदूत, योजना पटेल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत समुद्री सुरक्षा और जलमार्गों के संरक्षण को वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि के लिए आवश्यक मानता है। भारत ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक वाणिज्य का पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए और जल्द से जल्द सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवागमन बहाल किया जाना चाहिए।
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भारतीय नाविकों की सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति
बता दें कि, भारत दुनिया के शीर्ष तीन नाविक-आपूर्ति करने वाले देशों में से एक है, जो वैश्विक समुद्री कार्यबल का लगभग 13 प्रतिशत योगदान देता है। इसलिए, भारत अपने नाविकों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर गहराई से चिंतित है। राजदूत पटेल ने कहा, 'किसी भी महत्वपूर्ण जलमार्ग में व्यवधान, बाधा या कथित बंद होने के वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और मानवीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर सीधे परिणाम होते हैं।' पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच, विदेश मंत्रालय ने पिछले महीने कहा था कि क्षेत्र में 'कई घटनाओं' में आठ भारतीय नागरिकों की जान चली गई है, जबकि एक अभी भी लापता है।
तत्काल हल की जाने वाली चिंताएं
भारत ने इस बात पर जोर दिया कि तत्काल हल की जाने वाली मुख्य चिंताएं नौवहन की सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखलाओं की निरंतरता (विशेष रूप से मानवीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर जोर के साथ), समुद्री जागरूकता में वृद्धि और नाविकों के लिए संचार की सुविधा प्रदान करना है।
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव की अपील
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि विश्व के जलमार्गों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की परीक्षा बन गई है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के आवागमन में व्यवधान पर चिंता व्यक्त की। फरवरी में प्रतिदिन लगभग 130 जहाज गुजरते थे, जो मार्च में घटकर केवल छह रह गए। गुटेरेस ने संघर्षरत पक्षों से जलडमरूमध्य को खोलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जहाजों को बिना किसी टोल या भेदभाव के गुजरने दिया जाए।