Bangladesh: खालिदा जिया के जनाजे में जुटे दक्षिण एशियाई नेता, मोहम्मद यूनुस बोले- जिंदा है सार्क की भावना
खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों की मौजूदगी पर बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने कहा- सार्क की भावना आज भी जिंदा है।
विस्तार
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में दक्षिण एशियाई देशों की साझा मौजूदगी को लेकर बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस मौके पर यह साफ दिखा कि सार्क की भावना आज भी जिंदा है और दुख की घड़ी में पूरा दक्षिण एशिया बांग्लादेश के साथ खड़ा हुआ।
बुधवार को ढाका में हुए खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर समेत कई दक्षिण एशियाई देशों के शीर्ष नेताओं ने शिरकत की। यूनुस ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि तीन बार प्रधानमंत्री रहीं और दुनिया की दूसरी मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री के प्रति सार्क देशों द्वारा दिखाया गया सम्मान उन्हें गहराई से छू गया। खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अलावा श्रीलंका, मालदीव, नेपाल और पाकिस्तान के वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। 80 वर्षीय खालिदा जिया का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था।
दुख में साझा हुई संवेदना
यूनुस ने कहा कि अंतिम संस्कार के दौरान दक्षिण एशियाई देशों के नेताओं ने बांग्लादेश के साथ अपना दुख और शोक साझा किया, जो सार्क की मूल भावना को दर्शाता है। मालदीव के उच्च शिक्षा, श्रम और कौशल विकास मंत्री अली हैदर अहमद से मुलाकात में यूनुस ने कहा कल हमने सच्ची सार्क भावना देखी। यह भावना अब भी जीवित है। वहीं श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ से बातचीत में यूनुस ने कहा कि बुधवार को सार्क व्यवहार में नजर आया, जब सभी देशों ने मिलकर बांग्लादेश के दुख को साझा किया।
सार्क को फिर से सक्रिय करने की जरूरत
यूनुस ने अलग-अलग बैठकों में इस बात पर जोर दिया कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) को फिर से सक्रिय किया जाना चाहिए। उन्होंने याद किया कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान उन्होंने सार्क नेताओं की एक अनौपचारिक बैठक बुलाने की कोशिश की थी, उन्होंने बताया मैं चाहता था कि सार्क नेता कम से कम पांच मिनट के लिए ही सही, एक साथ बैठें। उन्होंने उम्मीद जताई कि सार्क को फिर से एक अर्थपूर्ण मंच के रूप में पुनर्जीवित किया जा सकता है, जो दक्षिण एशिया की करीब दो अरब आबादी के लिए काम करे।
2016 से ठप है सार्क
गौरतलब है कि सार्क लंबे समय से निष्क्रिय है। इसका आखिरी शिखर सम्मेलन वर्ष 2014 में काठमांडू में हुआ था। 2016 में इस्लामाबाद में प्रस्तावित शिखर सम्मेलन को उरी आतंकी हमले के बाद भारत के बहिष्कार और बाद में बांग्लादेश, भूटान व अफगानिस्तान के भी पीछे हटने के कारण रद्द कर दिया गया था। भारत ने साफ किया था कि पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को समर्थन दिए जाने के चलते सार्क के पुनरुद्धार की तत्काल कोई संभावना नहीं है।
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