फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   S Jaishankar said reducing risk is growing compulsion; sharply questioned UN

Jaishankar On Tariffs: 'जोखिम घटाना बढ़ती मजबूरी'; आर्थिक चिंता के आयाम गिनाकर विदेश मंत्री का UN से तीखा सवाल

Sun, 28 Sep 2025 01:25 AM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: शिव शुक्ला Updated Sun, 28 Sep 2025 01:25 AM IST
सार

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में तीखे शब्दों में संयुक्त राष्ट्र संघ की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने यहां अपने संबोधन में कहा कि जब दुनिया गंभीर संघर्षों और संकटों से जूझ रही है, तब संयुक्त राष्ट्र निष्क्रियता और ‘ग्रिडलॉक’ में फंसा हुआ है।

विज्ञापन
S Jaishankar said reducing risk is growing compulsion; sharply questioned UN
एस. जयशंकर, विदेश मंत्री - फोटो : पीटीआई

विस्तार

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में बोलते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था और सहयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आज दुनिया टैरिफ की अस्थिरता और बाजार तक पहुंच की अनिश्चितता का सामना कर रही है, जिसके चलते जोखिम कम करना एक मजबूरी बन चुका है। अपने संबोधन के दौरान जयशंकर ने कहा कि तकनीक पर नियंत्रण, सप्लाई चेन और महत्वपूर्ण खनिजों पर पकड़, कनेक्टिविटी का स्वरूप और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसी चुनौतियां वैश्विक संतुलन को प्रभावित कर रही हैं। साथ ही वैश्विक कार्यबल की प्रगति पर अंकुश भी एक गंभीर चिंता है। आगे बोलते हुए विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि इन तमाम चुनौतियों का हल अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने में है, न कि घटाने में। लेकिन सवाल यह है कि क्या हम वास्तव में उस दिशा में बढ़ रहे हैं? आगे उन्होंने यूएन से सवाल करते हुए कहा कि इन सबके बीच सबसे अहम यह है कि संयुक्त राष्ट्र ने इन मुद्दों पर अब तक क्या ठोस फर्क पैदा किया है? 

विज्ञापन


विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में तीखे शब्दों में संयुक्त राष्ट्र संघ की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने यहां अपने संबोधन में कहा कि जब दुनिया गंभीर संघर्षों और संकटों से जूझ रही है, तब संयुक्त राष्ट्र निष्क्रियता और ‘ग्रिडलॉक’ में फंसा हुआ है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज दुनिया दो बड़े युद्धों से जूझ रही है। एक यूक्रेन में और दूसरा पश्चिम एशिया में। ऐसे हालात में हमें पूछना चाहिए कि यूएन अब तक कितनी उम्मीदों पर खरा उतरा है। आगे उन्होंने वैश्विक आर्थिक असुरक्षा का भी जिक्र किया। 
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि ये निश्चय ही चुनौतीपूर्ण समय हैं। ऐसे में जरूरी यह है कि हम मजबूत और साथ बने रहें। अंतरराष्ट्रीय सहयोग कायम रहना चाहिए क्योंकि अशांति के समुद्र में समृद्धि के द्वीप नहीं टिक सकते। ऐसे में एक विश्व व्यवस्था के लिए साझा उद्देश्य और दूसरों के प्रति सहानुभूति आवश्यक है। इसीलिए हम संयुक्त राष्ट्र की ओर देखते हैं। हर सदस्य जो इस दुनिया को एक बेहतर जगह बना सकता है, उसे अपना सर्वश्रेष्ठ करने का अवसर मिलना चाहिए। और ऐसा होने के लिए, सुधारित बहुपक्षवाद ही स्पष्ट रास्ता है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


यूएनजीए में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यह भी याद दिलाया कि कोरोना महामारी के दौरान वैक्सीन  हुए भेदभाव ने बहुपक्षवाद पर से विश्वास कमजोर किया। उन्होंने कहा कि जब शांति संघर्षों से खतरे में हो, विकास संसाधनों की कमी से बाधित हो और आतंकवाद मानवाधिकारों का हनन करे ऐसे में यूएन का ‘ग्रिडलॉक’ में फंसा रहना बेहद चिंताजनक है।

जयशंकर ने साफ कहा कि अगर यूएन की प्रगति का आकलन किया जाए तो यह संस्था बेहद गहरे संकट से गुजर रही है। आगे उन्होंने जोर देते हुए कहा कि नौवें दशक में प्रवेश कर चुका संयुक्त राष्ट्र तभी प्रासंगिक रहेगा, जब वह सुधारित बहुपक्षवाद को अपनाए और दुनिया के लिए नेतृत्व व आशा का केंद्र बने।

टैरिफ का मुद्दा भी उठाया
जयशंकर ने टैरिफ के कारण दुनिया भर में फैली अस्थिरता और अनिश्चितता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भारत टैरिफ अस्थिरता और अनिश्चित बाजार पहुंच देख रहा है। जयशंकर ने कहा कि टैरिफ में उतार-चढ़ाव, सीमित आपूर्ति स्रोतों पर निर्भरता, तकनीकी नियंत्रण, सप्लाई चेन और महत्वपूर्ण खनिजों पर पकड़, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वैश्विक कार्यस्थल पर बढ़ती पाबंदिया, ये सभी ऐसे मुद्दे हैं, जो और अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग करते हैं। 


यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को व्यापार का हथियार बना लिया है और भारत समेत विभिन्न देशों पर भार-भरकम टैरिफ लगाया है। वहीं, भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन संकट और संसाधनों पर पकड़ को लेकर दुनिया भर में खींचतान तेज हो रही है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed