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India-Japan: जयशंकर बोले- हम जापानी प्रधानमंत्री के एशियाई नाटो के विचार से सहमत नहीं, भारत का अलग इतिहास
Tue, 01 Oct 2024 10:37 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 01 Oct 2024 10:37 PM IST
सार
India-Japan: जापान के प्रधानमंत्री इशिबा के एशियाई नाटो के आह्वान के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्री एश जयशंकर ने कहा कि हमारे मन में उस तरह की रणनीतिक सोच नहीं है। हमारा इतिहास अलग है और दृष्टिकोण भी अलग है।
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एस. जयशंकर
- फोटो : X/ Jaishankar
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विस्तार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत जापान के नए प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के ‘एशियाई नाटो’ के दृष्टिकोण को साझा नहीं करता है। जापान के विपरीत, भारत कभी भी किसी अन्य देश का संधि सहयोगी नहीं रहा है। जयशंकर वॉशिंगटन के कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
इशिबा के आह्वान के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा, हमारे मन में उस तरह की रणनीतिक सोच नहीं है। हमारा इतिहास अलग है और दृष्टिकोण भी अलग है। इशिबा ने मंगलवार को कहा कि वह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अपने देश के सामने आए सबसे गंभीर सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने के लिए मित्र देशों के साथ गहरे संबंध बनाने की कोशिश करेंगे।
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उन्होंने एशियाई नाटो के निर्माण, अमेरिकी धरती पर जापानी सैनिकों को तैनात करने और यहां तक कि जापान के परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों, चीन, रूस और उत्तर कोरिया के खिलाफ निवारक के रूप में वॉशिंगटन के परमाणु हथियारों पर साझा नियंत्रण के लिए आह्वान किया है। इशिबा का तर्क है कि ये परिवर्तन चीन को एशिया में सैन्य बल का प्रयोग करने से रोकेंगे।
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इशिबा के आह्वान के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा, हमारे मन में उस तरह की रणनीतिक सोच नहीं है। हमारा इतिहास अलग है और दृष्टिकोण भी अलग है। इशिबा ने मंगलवार को कहा कि वह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अपने देश के सामने आए सबसे गंभीर सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने के लिए मित्र देशों के साथ गहरे संबंध बनाने की कोशिश करेंगे।
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उन्होंने एशियाई नाटो के निर्माण, अमेरिकी धरती पर जापानी सैनिकों को तैनात करने और यहां तक कि जापान के परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों, चीन, रूस और उत्तर कोरिया के खिलाफ निवारक के रूप में वॉशिंगटन के परमाणु हथियारों पर साझा नियंत्रण के लिए आह्वान किया है। इशिबा का तर्क है कि ये परिवर्तन चीन को एशिया में सैन्य बल का प्रयोग करने से रोकेंगे।