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Sputnik-V: स्पुतनिक वैक्सीन के जरिए अपने भू-राजनीतिक मकसद साध रहा है रूस?

Mon, 01 Mar 2021 08:19 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 01 Mar 2021 08:19 PM IST
सार

चेक रिपब्लिक ने रूस से वैक्सीन भेजने का अनुरोध किया है। चेक रिपब्लिक कोरोना महामारी से सबसे बुरी तरह प्रभावित देशों में है। लेकिन उसे ईयू से वैक्सीन के मामले में कोई सहायता नहीं मिली...

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Russian Sputnik V vaccine demand came from the separatist areas of many countries, those does not have good relations with Russia
sputnik v: स्पुतनिक-V वैक्सीन - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

दुनिया में चीन के कोरोना वैक्सीन डिप्लोमेसी की खूब चर्चा रही है, लेकिन इसके जरिए अपने भू-राजनीतिक मकसदों को हासिल करने में रूस को जो कामयाबी मिली है, उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है। रूस की स्पुतनिक वैक्सीन की मांग कई उन देशों के अलगाववादी इलाकों से आई है, जिनके साथ रूस के संबंध अच्छे नहीं रहे हैं। इन देशों में चेक रिपब्लिक, यूक्रेन, जॉर्जिया और मोल्जोवा शामिल हैं।

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इस बीच रविवार को खबर आई कि चेक रिपब्लिक ने रूस से वैक्सीन भेजने का अनुरोध किया है। चेक रिपब्लिक कोरोना महामारी से सबसे बुरी तरह प्रभावित देशों में है। लेकिन उसे ईयू से वैक्सीन के मामले में कोई सहायता नहीं मिली। इसके बाद उसने रूस को अनुरोध भेजा, जिससे सोवियत संघ के बिखरने के समय से उसके टकराव भरे रिश्ते रहे हैं। चेक रिपब्लिक ने कहा है कि वह चीन से भी कोरोना का टीका मंगवाने पर विचार कर रहा है। इसके पहले हंगरी और सर्बिया रूस से वैक्सीन लेने का फैसला कर चुके हैं। इन सबको रूस की कूटनीतिक जीत माना गया है।
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स्पुतनिक वैक्सीन के लिए यूक्रेन और जॉर्जिया के अलगाववादी इलाकों और मोल्दोवा ने भी रूस से अनुरोध किया है। यूक्रेन, जॉर्जिया और मोल्दोवा सोवियत संघ से अलग हुए देश हैं। यूक्रेन और जॉर्जिया के साथ रूस के संबंध तनावपूर्ण हैं। यूक्रेन के प्रदेश दोनबास में फरवरी के आरंभ से ही स्पुतनिक टीका लगाने का काम चल रहा है। इस इलाके पर रूस समर्थित बागियों ने 2014 में कब्जा कर लिया था। स्पुतनिक वैक्सीन यूक्रेन के अलगाववादी लुशांक इलाके में भी पहुंचाए गए हैं। दोनबास प्रदेश को लेकर रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता चल रही है।
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इस बीच दोनबास प्रशासन ने रूस से टीके की मांग की, जिसे रूस ने तुरंत स्वीकार कर लिया। दोनबास के स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि रूस इस क्षेत्र के लिए उतनी संख्या में वैक्सीन उपलब्ध करवा रहा है, जितनी उसने अपने प्रदेशों के लिए कराई हैं। यूक्रेन की सरकार ने इस वैक्सीन सहायता को यूक्रेन के क्षेत्र में दखल बताया है। पिछले महीने यूक्रेन के उप प्रधानमंत्री ओलकसिय रेजनिकोव ने आशंका जताई थी कि रूस उस क्षेत्र में किसी अप्रमाणित वैक्सीन का परीक्षण कर सकता है और ऐसा करना यूक्रेन के कानून के खिलाफ होगा। यूक्रेन सरकार ने ध्यान दिलाया है कि यूरोपियन मेडिसिंस एजेंसी (ईएमए) ने स्पुतनिक वैक्सीन को अभी मंजूरी नहीं दी है।

लेकिन यूरोपियन यूनियन से जुड़े तीन देशों हंगरी, सर्बिया और चेक रिपब्लिक ने अपने यहां स्पुतनिक लगवाने का फैसला कर लिया है। उधर जॉर्जिया से अलग हुए इलाकों अबखाजिया और साउथ ओसेतिया में भी स्पुतनिक वैक्सीन लगाई जा रही है। 2008 में इन इलाकों को लेकर रूस और जॉर्जिया में युद्ध हुआ था। उसी समय इन दोनों इलाकों ने अपने को आजाद घोषित कर दिया था। रूस इन दोनों को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देता है, लेकिन बाकी दुनिया ने इसे मान्यता नहीं दी है।

यूरोप में आरोप लगाए गए हैं कि रूस स्पुतनिक वैक्सीन के जरिए अपने भू-राजनीतिक मकसदों को साध रहा है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उरसुला वॉन लियेन ने कहा है कि रूस अपने नागरिकों के टीकाकरण में पिछड़ा हुआ है, लेकिन वह दूसरे देशों को लाखों की संख्या में टीके के डोज उपलब्ध करवा रहा है। लियेन के इस बयान पर रूस ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई। रूस ने कहा कि वैक्सीन को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।


जानकारों ने कहा है कि जो देश वैक्सीन के मामले में पिछड़े हुए हैं, रूस ने वहां अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है। वैसे लगभग पूरा यूरोप ही टीकाकरण के मामले में पिछड़ा हुआ है, लेकिन छोटे और कमजोर देश इस मामले में ज्यादा पिछड़े हुए हैं। यूक्रेन में टीकाकरण शुरू होने की उम्मीद अब जाकर बनी है। बीते हफ्ते उसने एलान किया कि उसे ऑक्सफॉर्ड/एस्ट्राजेनेका कंपनी ने पांच डोज देने का फैसला किया है। इस बीच बागियों के कब्जे वाले उसके इलाकों में टीकाकरण काफी आगे बढ़ चुका है। जॉर्जिया में अभी तक टीका नहीं पहुंचा है। जबकि उससे कथित रूप से आजाद हुए इलाकों में टीकाकरण का काम तेजी से चल रहा है।

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