Russian Crude Oil: प्रतिबंध लगाने से पहले जम कर रूसी तेल की खरीदारी कर रहे हैं यूरोपीय देश
Russian Crude Oil: 14 अक्तूबर को समाप्त हुए महीने में रूस से कच्चे तेल के निर्यात में कुल मिला कर रोजाना औसतन साढ़े 30 लाख बैरल की बढ़ोतरी हुई। इनमें बड़ी मात्रा में तेल या तो भारत या चीन पहुंचा...
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पिछले एक महीने में समुद्री मार्ग से भेजे जाने वाले रूस के कच्चे तेल के निर्यात में भारी बढ़ोतरी हुई है। अमेरिकी टीवी चैनल ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि ये वृद्धि खास कर यूरोपीय देशों के बड़े पैमाने पर रूसी तेल खरीदने के कारण हुई। ब्लूमबर्ग ने ये रिपोर्ट समुद्री वाहनों की आवाजाही के आंकड़ों के हवाले से दी है। ये आंकड़े 14 अक्तूबर को खत्म हुए सप्ताह से पहले के चार हफ्तों के हैं। इसके मुताबिक तुर्किये, भारत और चीन इस दौरान रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार रहे। लेकिन यूरोप जाने वाले तेल में पहले की तुलना में भारी वृद्धि हुई।
इसके पहले यूरोपीय देशों के लिए रूसी तेल का निर्यात जून में सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा था। उस महीने रोजाना औसतन 22 लाख बैरल तेल यूरोप पहुंचा। उसके बाद उसमें गिरावट आई। लेकिन 14 अक्तूबर को पूरे हुए महीने के दौरान रोजाना औसतन साढ़े 18 लाख बैरल कच्चा तेल रूस से यूरोप पहुंचा।
इस दौरान तुर्किये ने जिस बड़े पैमाने पर रूसी तेल खरीदा, उसने सबका ध्यान खींचा है। तुर्किये नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) का सदस्य है। इसके बावजूद यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से उनसे रूस के साथ अपने संबंध बेहतर बनाए हैं। तुर्किये पहुंचे समुद्री वाहकों ने यह स्पष्ट नहीं किया था कि उन्हें अंतिम रूप से कहां जाना है। वे पोर्ट सैद या गिब्राल्टर जैसे बंदरगाहों पर ठहरे। समझा जाता है कि इस दौरान तुर्किये के लिए भेजे गए तेल के टैंकर उतारे गए।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक 14 अक्तूबर को समाप्त हुए महीने में रूस से कच्चे तेल के निर्यात में कुल मिला कर रोजाना औसतन साढ़े 30 लाख बैरल की बढ़ोतरी हुई। इनमें बड़ी मात्रा में तेल या तो भारत या चीन पहुंचा। इन आंकड़ों के आधार पर विश्लेषकों ने कहा है कि 2022 खत्म होते होते इन देशों के लिए रूसी तेल के निर्यात का पिछला पुराना सभी रिकॉर्ड टूट जाएगा।
विश्लेषकों के मुताबिक भारत और चीन घोषित रूप से रूस से ज्यादा तेल खरीद रहे हैं। लेकिन यूरोप ने जिस तरह आयात बढ़ाया है, वह काबिल-ए-गौर है। यूरोपियन यूनियन ने एलान कर रखा है कि अगले पांच दिसंबर के बाद रूस से समुद्री मार्ग से आने वाले कच्चे तेल के आयात पर वहां पूरी रोक लगा दी जाएगी। मगर ये तारीख आने के पहले यूरोपीय देश रूसी तेल की ज्यादा से ज्यादा खरीदारी कर अपने भंडार भर रहे हैं।
ब्लूमबर्ग ने रूसी वित्त मंत्रालय के आंकड़ों पर का भी हवाला दिया है। इन आंकड़ों के मुताबिक 14 अक्तूबर को पूरे हुए महीने में समुद्री रास्ते से तेल के निर्यात से रूस की आमदनी 90 लाख डॉलर से बढ़ कर एक करोड़ 34 लाख डॉलर तक पहुंच गई।
विश्लेषकों के मुताबिक ताजा आंकड़ों से आलोचकों की इस दलील को बल मिलेगा कि यूरोपियन यूनियन ने रूस से ऊर्जा आयात के मामले में दोहरा रुख अपना रखा है। एक तरफ उसने कई देशों पर रूस से आयात रोकने का दबाव डाला है, जबकि उसने खुद रूसी ऊर्जा का न सिर्फ आयात किया है, बल्कि हाल में उसकी मात्रा भी बढ़ा दी है।