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Russia Ukraine war : रूस और यूक्रेन के बीच इस्राइल क्यों करना चाहता है मध्यस्थता, क्या जंग खत्म करने पर बनेगी बात?

Mon, 14 Mar 2022 07:01 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Mon, 14 Mar 2022 07:01 PM IST
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सार
इस्राइल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट यूक्रेन-रूस युद्ध में शांतिदूत की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं।
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russia ukraine war why does israel want to mediate between russia and ukraine, israeli prime minister naftali bennett has offered to mediate peace to end,  will there be talk of ending the war?
Israeli Prime Minister Naftali Bennett - फोटो : Wikipedia

विस्तार

रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग सोमवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गई है, लेकिन अभी तक यूक्रेन ने हार नहीं मानी है। वह हर संभव तरीके से रूस से मुकाबला कर रहा है। इस बीच एक बार फिर यह खबर आई है कि रूस और यूक्रेन के बीच इस्राइल मध्यस्थता करना चाहता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के प्रमुख एंड्री यरमक ने यह जानकारी दी है।


उम्मीद जताई जा रही है कि इस मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच जंग को रोकने को लेकर कुछ बात बन सकती है। इससे पहले रूस के हमले के कुछ दिनों बाद ही इस्राइल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष में मध्यस्थता करने की पेशकश की थी। रूसी मीडिया का दावा है कि जेलेंस्की रूस के साथ हर मुद्दे पर बातचीत करने को तैयार हैं। बताया जा रहा है कि जेलेंस्की ने यरुशलम में पुतिन से मिलने का प्रस्ताव रखा है।  


इस्राइल क्यों करना चाहता है मध्यस्थता?
फिलहाल इस्राइल इस मामले में तटस्थ रहकर अपनी भूमिका निभा रहा है।  वह संकट को कम करने के लिए रूस के साथ बातचीत कर रहा है। दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने की इच्छा के कारण ही इस्राइल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट पांच मार्च की रात अचानक मास्को जा पहुंचे थे। इसी मसले को लेकर पुतिन और बेनेट के बीच ढाई घंटे से भी ज्यादा समय तक बातचीत हुई थी।
 

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की - फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल इस्राइल उन कुछ देशों में से एक है जिनके रूस और यूक्रेन दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं। इसने यूक्रेन को 100 टन मानवीय सहायता पहुंचाई है और घोषणा की है कि वह वहां एक फील्ड अस्पताल स्थापित करेगा। 

यूक्रेन में करीब 200,000 यहूदी रहते हैं, जिनमें से सैकड़ों पहले ही इस्राइल में बस चुके हैं।  यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की स्वयं यहूदी हैं। वे 2020 में इस्राइल की यात्रा पर गए थे।

जेलेंस्की ने ही इस्राइल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट से मध्यस्थ के रूप में आगे आने की अपील की थी। बेनेट यहूदियों के प्रति सहानुभूति रहते हैं। इसलिए पुतिन और जेलेंस्की के बीच बातचीत करने का प्रस्ताव भी यहूदी और ईसाइयों की पवित्र नगरी यरुशलम में रखा गया है।

इस्राइल का बहुत कुछ दांव पर लगा है
रूस के साथ इस्राइल के संबंध सामरिक महत्व के हैं। इस्राइल, सीरिया में सुरक्षा समन्वय के लिए रूस पर निर्भर है, जहां रूस की सैन्य उपस्थिति है। इस्राइल को सीरिया में ईरान समर्थित उग्रवादी गुटों पर हमले जारी रखने के लिए रूस के समर्थन की जरूरत है। इस्राइल रूस के साथ सैन्य समन्वय बनाए रखता है। बेनेट और उनसे पहले इस पद पर रहने वाले बिन्यामिन नेतन्याहू कई बार पुतिन से मिल चुके हैं। 

यूक्रेन में युद्ध के हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
यूक्रेन में युद्ध के हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। - फोटो : Social Media
इसलिए जंग रोकना चाहता है इस्राइल
दोनों देशों से अच्छे संबंध की वजह से ही बेनेट चाहते हैं कि यह जंग रूक जाए और शांति कायम हो। रूस पर पश्चिम देशों के प्रतिबंध बढ़ने के बावजूद बेनेट ने पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति से संपर्क बनाए रखा है।

खतरा क्या?
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तेहरान के साथ इस्राइल मास्को वार्ता की मेज पर बैठा हुआ है। रूस ईरान के परमाणु कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसका इस्राइल विरोध करता है। ऐसे में इस्राइल रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को नाराज नहीं कर सकता। 

इसलिए कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात की आशंका जताई जा रही है कि क्या बेनेट युद्ध रोकने के लिए पुतिन की सोच बदल सकते हैं? रिपोर्टस के मुताबिक यदि यह वार्ता विफल हो जाती है तो रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष और बढ़ सकता है और इसके लिए इस्राइल को दोषी ठहराया जा सकता है।

टिप्पणीकार बराक रविद  ने एक न्यूज साइट पर लिखा ‘एक तरफ, उन्होंने (बेनेट) रातों-रात अपनी अंतरराष्ट्रीय स्थिति में सुधार किया है। दूसरी ओर वह न केवल एक राजनेता के रूप में अपने लिए बल्कि इस्राइल के लिए एक बड़ा जोखिम उठा रहे हैं। प्रधानमंत्री पूरी तरह से यह जाने बिना कि यह कितना गहरा है, कीचड़ में उतर गए हैं।’ 
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