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Russia Ukraine War: संयुक्त राष्ट्र की विशेष आपात बैठक के मायने क्या है? क्या इसका देशों पर असर पड़ता है?

Mon, 28 Feb 2022 02:32 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Mon, 28 Feb 2022 02:32 PM IST
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सार
आपातकालीन विशेष सत्र बुलाने के लिए 1950 में 377ए (वी) के तहत ‘शांति के लिए एकजुट’ होने का एक प्रस्ताव पारित हुआ था। यह विशेष सत्र 24 घंटों के भीतर बुलाया जा सकता है। यूएन महासभा का इस तरह का सत्र बहुत असाधारण होता है।
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russia ukraine war un general assembly call for a rare emergency special session of the 193-member on russia’s military operation in ukraine what is the meaning of special emergency meeting of the united nations
संयुक्त राष्ट्र - फोटो : youtube

विस्तार

सोमवार को यूक्रेन-रूस युद्ध का पांचवां दिन है। दोनों तरफ से भीषण जंग जारी है। रूस ने यूक्रेन के शहर कीव, खारकीव, सुमी पर भीषण बम बरसाए हैं। रूसी बमों से बचने के लिए यूक्रेन के कई गांव खाली हो गए हैं। राजधानी कीव में एयर रेड अलर्ट जारी हो गया है। रूस की तमाम कोशिशों के बाद यूक्रेन ने रूसी सेना को पिछले चार दिनों से कीव पर कब्जा जमाने में कामयाब नहीं होने दिया है। रूसी हमलों में यूक्रेन के 352 आम नागरिकों की मौत हुई है। इसमें 14 बच्चे भी शामिल हैं।  इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सोमवार को यूक्रेन पर रूस के हमले के मुद्दे पर 193 सदस्यीय महासभा का एक आपातकालीन विशेष सत्र बुलाया है। 


यूएन महासभा का विशेष आपात सत्र बुलाने के लिए रविवार को एक मतदान के जरिए रास्ता साफ हुआ है। आपात सत्र बुलाने की प्रक्रिया के समर्थन में 11 मत पड़े। रूस ने इसके खिलाफ मतदान किया। वहीं चीन, भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतिहास में यह 11वां मौका होगा, जब विशेष आपात बैठक बुलाई गई है। 


आपात बैठक कब बुलाई जा सकती है?
साल 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद दुनिया में शांति की बहाली के लिए तब 50 देशों के प्रतिनिधियों ने मिलकर एक चार्टर पर हस्ताक्षर किए और एक नई अंतरराष्ट्रीय संस्था की नींव रखी गई, जिसे आज संयुक्त राष्ट्र कहते हैं। इसके छह अंग हैं, जिनमें से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्राथमिक जिम्मेदारी दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की है, जिसके लिए वो प्रभावित देशों में पीस कीपिंग फोर्स भेजते हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध।
रूस-यूक्रेन युद्ध। - फोटो : ANI
इस बैठक के मायने क्या?
संयुक्त राष्ट्र महासभा का एक आपातकालीन विशेष सत्र किसी विशेष मुद्दे पर तत्काल कोई प्रस्ताव करने के लिए बुलाई जाती है। 1950 के बाद से यूएन महासभा के ऐसे केवल 10 विशेष आपात सत्र आयोजित हुए हैं। माना जा रहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर रूस को यूक्रेन पर और हमला करने से रोकने के लिए कोई प्रस्ताव पारित किया जा सकता है।

सुरक्षा परिषद का ये ताजा कदम यूक्रेन संकट को हल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के सप्ताह भर के कूटनैतिक प्रयासों का हिस्सा हैं। जिसमें महासचिव एंटोनियो गुटेरस की लगभग रोज हुईं प्रेस वार्ताएं, सुरक्षा परिषद की चार आपात बैठकें हुई और यूएन महासभा की एक बैठक भी शामिल हैं। इन सभी मंचों पर वक्ताओं ने रूस तनाव कम करने की अपीलें कीं। फ्रेंच राजदूत निकोला डी रिवियेरे के मुताबिक महासभा के यह विशेष सत्र  यूएन चार्टर और अन्तरराष्ट्रीय कानून की रक्षा करने और यूक्रेन के खिलाफ हमले को रोकने के इरादे से उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

कब-कब बुलाई गई विशेष आपात बैठक
पहला सत्र 1-10 नवंबर 1956 

दूसरा सत्र- 4-10 नवंबर 1956 

तीसरा सत्र 8-21 अगस्त 1958 

चौथा सत्र  19 सितंबर 1960 

5वां सत्र   17-18 जून 1967 

छठा सत्र - 10-14 जनवरी 1980

7वां सत्र - 22-29 जुलाई 1980, 20-28 अप्रैल 1982, 25-26 जून 1982, 16-19 अगस्त और 24 सितंबर 1982 

यूएन
यूएन - फोटो : twitter
आठवां सत्र  13-14 सितंबर 1981

नौवां सत्र  29 जनवरी से 5 फरवरी 1982

10वां सत्र अप्रैल 1997 में पहली बार, अंतिम बार 13 जून 2018 को 

क्या संयुक्त राष्ट्र के दबाव का देशों पर कोई असर पड़ता है?
यूएन महासभा के प्रस्ताव वैसे तो बाध्यकारी नहीं होते हैं, मगर उनका राजनैतिक वजन होता है क्योंकि उनमें संयुक्त राष्ट्र के ज्यादा सदस्यों की राय झलकती है। एक समय सुरक्षा परिषद को कार्रवाई न करने वाली संस्था कहते हुए आलोचना की जाती थी लेकिन विश्व पटल पर हाल के वर्षों में उसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनमें प्रतिबंधों को लागू करना और संघर्षों को रोकने के लिए सैनिक कार्रवाई की अनुमति देना शामिल है। 

रूस-यूक्रेन युद्ध
रूस-यूक्रेन युद्ध - फोटो : EPA
रूस के खिलाफ क्या हो सकता है?
संयुक्त राष्ट्र में शांति और सुरक्षा के मुद्दे तभी तक सुलझाए जा सकते हैं जब बात दो कमजोर देशों की हो। अगर पांच स्थाई सदस्य में से एक भी सदस्य पर शांति और सुरक्षा भंग करने का आरोप हो तो मामला पेंचीदा हो जाता है। स्थायी सदस्यों के फैसले से अगर कोई सदस्य सहमत नहीं है तो वह वीटो पावर का इस्तेमाल करके उस फैसले को रोक सकता है।

इसलिए माना जा रहा है कि अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन इस आपात बैठक के जरिए रूस के खिलाफ कुछ नहीं कर सकते हैं, क्योंकि स्थायी सदस्य होने के कारण रूस के पास वीटो पावर है। ऐसे में इन देशों की तरफ से रूस के खिलाफ आने वाले किसी भी प्रस्ताव के पारित होने की संभावना नहीं है। हालांकि रूस को विश्व समुदाय में अलग-थलग करने की कोशिश जरूर हो सकती है।
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