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Russia- Ukraine War: यूक्रेन तबाह-बर्बाद होने लगा, लेकिन कौन है जो नाटो को वहां सैनिक भेजने से रोक रहा है?
Thu, 03 Mar 2022 07:11 PM IST
प्रतिभा ज्योति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Thu, 03 Mar 2022 07:11 PM IST
सार
मॉस्को ने जैसे ही कीव पर हमला शुरू किया अमेरिका और उसके सहयोगियों ने रूस पर कई कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। इससे रूस की अर्थव्यवस्था पर धीरे-धीरे नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगा है।
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यूक्रेन के तेल डिपो पर हमला
- फोटो : Social media
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विस्तार
रूस और यूक्रेन के बीच आज युद्ध का आठवां दिन है। रूस की ओर से अभी भी ताबड़तोड़ हमले किए जा रहे हैं। रूसी सेना ने खेरसान में क्षेत्रीय प्रशासन भवन पर कब्जा कर लिया है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने बुधवार को खेरसान पर कब्जा कर लिया है। वहीं यूक्रेन का दक्षिणी बंदरगाह मारियुपोल रूसी सैनिकों से घिरा हुआ है, आंतरिक मंत्रालय के सलाहकार एंटोन हेराशचेंको ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
अपने हमले में रूस ने यूक्रेन के 10 बड़े शहरों को तबाह कर दिया है। इस वजह से करीब 10 लाख लोगों ने यूक्रेन छोड़ दिया है। कई रियासशी इलाकों को बहुत नुकसान पहुंचा है और कई इमारतें खंडहर में तब्दील हो गई हैं। सड़कें सूनीं और विरान पड़ी है। इस बीच रूस-यूक्रेन के बीच गुरुवार को होने वाली बेलारूस में दूसरे दौर की वार्ता पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।
नाटो ने क्यों सेना भेजने से किया इनकार?
अब भी इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि यूक्रेन और रूस के बीच जंग के कारण पूरे यूक्रेन में तबाही मच गई है लेकिन नार्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (नाटो) यूक्रेन की मदद के लिए आगे क्यों नहीं आ रहा है? जिस नाटो पर यूक्रेन को भरोसा था, उसी ने यूक्रेन की मदद के लिए अपनी सेना भेजने से इनकार क्यों कर दिया है? जबकि नाटो पूर्वी यूरोप के सदस्य देशों में तेजी से सैनिकों की तैनाती कर रहा है, लेकिन उसने साफ कर दिया है यूक्रेन में सेना भेजने की उसकी कोई योजना नहीं है।
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दरअसल यदि नाटो ऐसा करता है तो उसे अनुच्छेद 5 का उल्लंघन माना जाएगा जिससे संघर्ष संभावित रूप से बढ़ सकता है। पिछले हफ्ते, नाटो प्रमुख जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने घोषणा की कि गठबंधन रूस के खिलाफ अपनी रक्षा को मजबूत करने के लिए पहली बार अपनी रैपिड रिस्पांस फोर्स शुरू कर रहा है।
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अपने हमले में रूस ने यूक्रेन के 10 बड़े शहरों को तबाह कर दिया है। इस वजह से करीब 10 लाख लोगों ने यूक्रेन छोड़ दिया है। कई रियासशी इलाकों को बहुत नुकसान पहुंचा है और कई इमारतें खंडहर में तब्दील हो गई हैं। सड़कें सूनीं और विरान पड़ी है। इस बीच रूस-यूक्रेन के बीच गुरुवार को होने वाली बेलारूस में दूसरे दौर की वार्ता पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।
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नाटो ने क्यों सेना भेजने से किया इनकार?
अब भी इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि यूक्रेन और रूस के बीच जंग के कारण पूरे यूक्रेन में तबाही मच गई है लेकिन नार्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (नाटो) यूक्रेन की मदद के लिए आगे क्यों नहीं आ रहा है? जिस नाटो पर यूक्रेन को भरोसा था, उसी ने यूक्रेन की मदद के लिए अपनी सेना भेजने से इनकार क्यों कर दिया है? जबकि नाटो पूर्वी यूरोप के सदस्य देशों में तेजी से सैनिकों की तैनाती कर रहा है, लेकिन उसने साफ कर दिया है यूक्रेन में सेना भेजने की उसकी कोई योजना नहीं है।
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दरअसल यदि नाटो ऐसा करता है तो उसे अनुच्छेद 5 का उल्लंघन माना जाएगा जिससे संघर्ष संभावित रूप से बढ़ सकता है। पिछले हफ्ते, नाटो प्रमुख जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने घोषणा की कि गठबंधन रूस के खिलाफ अपनी रक्षा को मजबूत करने के लिए पहली बार अपनी रैपिड रिस्पांस फोर्स शुरू कर रहा है।
नाटो
क्या है अनुच्छेद 5
यह एक समझौता जो नाटो सदस्य देशों की ‘सामूहिक रक्षा’ सुनिश्चित करता है। जिसका अर्थ है कि एक सहयोगी पर हमले को सभी सहयोगियों पर हमला माना जाएगा। अनुच्छेद 5, 1949 की नार्थ अटलांटिक संधि या वाशिंगटन संधि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिस पर 1949 में हस्ताक्षर किए गए थे।
24 फरवरी के एक बयान में, नाटो ने इस पर सारे संशय साफ करते हुए कहा था कि ‘संधि के अनुच्छेद 5 के प्रति हमरी प्रतिबद्धता लोहे की कवच जैसी है और हम एक दूसरे की रक्षा के लिए एकजुट हैं। अनुच्छेद पांच केवल नाटो सदस्यों पर लागू होता है और यूक्रेन नाटो का सदस्य नहीं है।
तो क्या इसी ने नाटो के हाथ बांध दिए हैं?
बिल्कुल। यूक्रेन पश्चिमी देशों के रक्षा गठबंधन का भागीदार है लेकिन वह नाटो का सदस्य नहीं है। नतीजतन उस पर अनुच्छेद 5 यानी सामूहिक रक्षा प्रतिज्ञा लागू नहीं होती है। पिछले महीने के अंत में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने एक टेलीविजन संबोधन में यूक्रेन को गठबंधन के पूर्ण सदस्य के रूप में जोड़ने का अनुरोध किया था। हालांकि रूस लंबे समय से नाटो के साथ यूक्रेन की बढ़ती नजदीकियों का विरोध करता रहा है और उस पर हमले की मुख्य वजह यही मानी जा रही है।
अनुच्छेद 5 को समझने के लिए उन लक्ष्यों को समझना जरूरी है जिनके साथ नाटो का गठन हुआ। दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद दुनिया दो महाशक्ति के प्रभुत्व की लड़ाई में बंट गई थी। 1949 में, अमेरिका, कनाडा और कई पश्चिमी यूरोपीय देशों ने मिलकर सोवियत संघ के बढ़ते खतरे के खिलाफ सामूहिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक इसे एक तंत्र के रूप में बनाया।
यह एक समझौता जो नाटो सदस्य देशों की ‘सामूहिक रक्षा’ सुनिश्चित करता है। जिसका अर्थ है कि एक सहयोगी पर हमले को सभी सहयोगियों पर हमला माना जाएगा। अनुच्छेद 5, 1949 की नार्थ अटलांटिक संधि या वाशिंगटन संधि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिस पर 1949 में हस्ताक्षर किए गए थे।
24 फरवरी के एक बयान में, नाटो ने इस पर सारे संशय साफ करते हुए कहा था कि ‘संधि के अनुच्छेद 5 के प्रति हमरी प्रतिबद्धता लोहे की कवच जैसी है और हम एक दूसरे की रक्षा के लिए एकजुट हैं। अनुच्छेद पांच केवल नाटो सदस्यों पर लागू होता है और यूक्रेन नाटो का सदस्य नहीं है।
तो क्या इसी ने नाटो के हाथ बांध दिए हैं?
बिल्कुल। यूक्रेन पश्चिमी देशों के रक्षा गठबंधन का भागीदार है लेकिन वह नाटो का सदस्य नहीं है। नतीजतन उस पर अनुच्छेद 5 यानी सामूहिक रक्षा प्रतिज्ञा लागू नहीं होती है। पिछले महीने के अंत में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने एक टेलीविजन संबोधन में यूक्रेन को गठबंधन के पूर्ण सदस्य के रूप में जोड़ने का अनुरोध किया था। हालांकि रूस लंबे समय से नाटो के साथ यूक्रेन की बढ़ती नजदीकियों का विरोध करता रहा है और उस पर हमले की मुख्य वजह यही मानी जा रही है।
अनुच्छेद 5 को समझने के लिए उन लक्ष्यों को समझना जरूरी है जिनके साथ नाटो का गठन हुआ। दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद दुनिया दो महाशक्ति के प्रभुत्व की लड़ाई में बंट गई थी। 1949 में, अमेरिका, कनाडा और कई पश्चिमी यूरोपीय देशों ने मिलकर सोवियत संघ के बढ़ते खतरे के खिलाफ सामूहिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक इसे एक तंत्र के रूप में बनाया।
नाटो के महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग (फाइल फोटो)
- फोटो : twitter
कब-कब हुआ है अनुच्छेद 5 का इस्तेमाल
अब तक केवल इसका इस्तेमाल एक बार हुआ है। 2001 में अमेरिका पर 9/11 के हमलों के बाद अनुच्छेद 5 का उपयोग किया गया था। यह हमला अलकायदा के आतंकवादियों ने किया था। आतंकवादियो को इसका जवाब देने और अमेरिका के साथ एकजुटता दिखाने के लिए नाटो ने अपनी सेना उतार दी थी।
नाटो अनुच्छेद 5 को लागू करने के लिए कब बाध्य हो सकता है?
यह तभी हो सकता है जब रूस नाटो के सहयोगियों में से किसी एक पर पूर्ण हमला करेगा।
अब तक केवल इसका इस्तेमाल एक बार हुआ है। 2001 में अमेरिका पर 9/11 के हमलों के बाद अनुच्छेद 5 का उपयोग किया गया था। यह हमला अलकायदा के आतंकवादियों ने किया था। आतंकवादियो को इसका जवाब देने और अमेरिका के साथ एकजुटता दिखाने के लिए नाटो ने अपनी सेना उतार दी थी।
नाटो अनुच्छेद 5 को लागू करने के लिए कब बाध्य हो सकता है?
यह तभी हो सकता है जब रूस नाटो के सहयोगियों में से किसी एक पर पूर्ण हमला करेगा।