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काम कर गया यूक्रेन के राष्ट्रपति का प्लान 'सी': जब खौलने लगा खून तो निहत्थे लोगों ने रोक दिए रूसी सेना के 'टैंक'

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 01 Mar 2022 08:36 PM IST
सार

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस के साथ लड़ाई में कई प्लान तैयार किए हैं। उनका प्लान 'ए' सफल नहीं रहा। जेलेंस्की को उम्मीद थी कि जैसे ही लड़ाई शुरु होगी तो 'नाटो' उसकी मदद के लिए आ जाएगा। नाटो की सेना के पहुंचने की उम्मीद थी। ऐसा कुछ नहीं हुआ।

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Russia Ukraine War know how Volodymyr Zelensky invoked Nationalism in Countrymen to fightback
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की। - फोटो : Social Media

विस्तार

रूस और यूक्रेन की लड़ाई में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की का प्लान 'सी' काम कर गया है। रूसी आर्मी ने पहले दो दिन जिस तरह की लड़ाई लड़ी, उन परिस्थितियों में यूक्रेन के लिए नए प्लान पर काम करना जरुरी हो गया था। जेलेंस्की का वह प्लान कामयाब रहा। उन्होंने मीडिया के जरिए इस लड़ाई में खुद को जिस तरीके से पेश किया, उससे यूक्रेन के लोगों का खून खोलने लगा। बहुत से लोग जो यूक्रेन छोड़ने की तैयारी कर रहे थे, वे वापस लौट आए। निहत्थे लोगों ने रूसी सेना के टैंकों को रोक दिया। इस तरह के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। ले.जन. संजय मेस्टन (रिटायर्ड) के अनुसार, यूक्रेन में सभी लोग एक साथ खड़े हो गए हैं। कीव और खारकीव इलाके में भारी बमबारी के बीच लोग सामने आ रहे हैं। वे हथियार उठा रहे हैं। खुद को आगे की 'स्ट्रीट फाइट' के लिए तैयार कर रहे हैं। 
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ये जेलेंस्की के लिए सबसे मुश्किल घड़ी थी... 
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस के साथ लड़ाई में कई प्लान तैयार किए हैं। उनका प्लान 'ए' सफल नहीं रहा। जेलेंस्की को उम्मीद थी कि जैसे ही लड़ाई शुरु होगी तो 'नाटो' उसकी मदद के लिए आ जाएगा। नाटो की सेना के पहुंचने की उम्मीद थी। ऐसा कुछ नहीं हुआ। प्लान 'बी' के तहत जेलेंस्की को आशा की किरण दिखी कि जब वे पश्चिम के राष्ट्रों और एशियाई देशों से बात करेंगे तो उन्हें मदद मिल जाएगी। इसके लिए राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कई बड़े नेताओं को फोन किया। सार्वजनिक तौर से अपना बयान जारी कर मदद की गुहार लगाई, लेकिन बात नहीं बन सकी। इस बीच यूक्रेन से लोगों ने सुरक्षित जगहों पर जाना शुरु कर दिया। ये जेलेंस्की के लिए सबसे मुश्किल घड़ी थी। उन्होंने प्लान 'सी' पर काम किया, जो पूरी तरह कामयाब रहा। उससे जेलेंस्की की सामरिक रणनीति को बल मिला। 
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सड़क के बीच खड़े होकर रूसी टैंकों का मुंह मोड़ दिया... 

राष्ट्रपति जेलेंस्की की अपील का सबसे बड़ा असर यह हुआ कि स्थानीय लोगों ने यूक्रेन से बाहर जाने का इरादा त्याग दिया। खारकीव और कीव के अलावा पश्चिम यूक्रेन के क्षेत्रों में लोगों ने रूसी सेना के टैंक रोक दिए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिखाया गया है कि लोग सड़क पर खड़े हैं और वे रूसी टैंक के चालक को वापस जाने के लिए कह रहे हैं। खास बात है कि रूसी टैंक वापस हो जाता है। लोगों ने इस वीडियो को शेयर करते वक्त लिखा, रूसी सेना को लड़ाई से कोई मतलब नहीं है। वे यूक्रेन के बेगुनाह लोगों को मारना नहीं चाहते। ले.जन. संजय मेस्टन (रिटायर्ड) के मुताबिक, रूस के लिए आसान स्थिति नहीं है। ये लड़ाई निर्णायक दौर में पहुंचेगी। वेस्टर्न बॉर्डर पर लोगों का जुनून देखने लायक होगा। वहां अनेक छोटे शहर और गांव भी हैं। वहां के लोग चुप नहीं बैठेंगे। उन्हें हथियार मुहैया कराए जा रहे हैं। रूस के पास ताकत बहुत ज्यादा है, इसलिए उसने बड़े शहरों पर पहले कंट्रोल करने की रणनीति अख्तियार की है। रूस द्वारा सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाना बहुत गलत है। रिहायशी इलाके को टारगेट करना अनैतिक है। 
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कैप्चर करना आसान है, मैनेज करना मुश्किल होगा...  
रूस की सेना तेजी से 'कीव और खारकीव' की ओर बढ़ रही है। इन शहरों पर बमबारी की जा रही है। लगातार सायरन बजने लगे हैं। मंगलवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन में रहने वाले छात्रों के लिए चेतावनी जारी कर दी है। इसमें कहा गया है कि वे किसी भी तरह से राजधानी कीव को छोड़ दें। वहां से निकल जाएं। जिसे जो भी साधन यानी बस, ट्रेन या टैक्सी मिले, उसे लेकर निकल जाएं। इसका मतलब समझा जा सकता है। रूस की सेना बहुत जल्द इन शहरों तक पहुंच सकती है। ले.जन. संजय मेस्टन (रिटायर्ड) कहते हैं, रूसी सेना ने नागरिक ठिकानों पर हमला कर आतंकियों से भी गई गुजरी हरकत की है। खारकीव में नागरिकों हमला किया गया है। दूसरी ओर यूक्रेन को अपनी रणनीति पर काम करने का समय भी मिल गया। दूसरे देशों से हथियार मिलने लगे हैं। दुनिया की सहानुभूति मिल रही है। विंग कमांडर अभिषेक मतिमान (रिटायर्ड) कहते हैं, रूस के लिए यूक्रेन को कैप्चर करना आसान है, लेकिन मैनेज करना मुश्किल होगा। जब ये लड़ाई गली तक पहुंचेगी तो रूस के लिए यूक्रेन से निपटना आसान नहीं होगा। ये लंबा चलने वाला संघर्ष है।
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