Russia Ukraine War: अपने नागरिकों को निकालने में कौन देश कितना आगे, अमेरिका-ब्रिटेन के मुकाबले भारत का क्या हाल?
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विस्तार
रूस के ताबड़तोड़ हमले की वजह से यूक्रेन में हालात लगातार बेहद गंभीर होते जा रहे हैं। यूक्रेन के खारकीव और कीव शहरों पर रूसी सैनिक लगातार बमबारी कर रहे हैं, जिसके चलते दूसरे देशों के हजारों छात्र और नागरिक वहां फंस गए हैं। हालांकि, तमाम देश अपने-अपने नागरिकों को यूक्रेन से निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं, जिनमें भारत का ऑपरेशन गंगा भी शामिल है। इस रिपोर्ट में जानते हैं कि यूक्रेन में फंसे नागरिकों को निकालने में कौन-सा देश कितना आगे है? भारत के ऑपरेशन गंगा का स्टेटस क्या है और अमेरिका-ब्रिटेन जैसे दिग्गज देशों के नागरिकों की स्थिति कैसी है?
यूक्रेन में किस देश के कितने नागरिक?
जानकारी के मुताबिक, यूक्रेन में कुल 80 हजार विदेश छात्र हैं, जिनमें 18 हजार से ज्यादा भारतीय छात्र हैं। इसके बाद मोरक्को, अजरबैजान, तुर्कमेनिस्तान और नाइजीरिया का नंबर आता है। अगर पाकिस्तान के नागरिकों की बात करें तो इनकी कुल संख्या 1500 है, जिनमें 500 छात्र हैं। इसके अलावा चीन, अमेरिका और ब्रिटेन के भी काफी नागरिक यूक्रेन में फंसे हुए हैं।
किस देश ने कितने लोग निकाले?
भारत ने यूक्रेन में फंसे छात्रों को निकालने के लिए ऑपरेशन गंगा चलाया है। इसके तहत अब तक हजारों छात्रों को निकाला जा चुका है। भारत लगातार अपने विमान भेजकर छात्रों को निकालने की कोशिश रहा है। इसी कड़ी में भारत के चार मंत्री भी यूक्रेन जा रहे हैं। उधर, चीन अब तक अपने छह हजार नागरिकों को निकाल चुका है, लेकिन अब उसने अपना अभियान रोक दिया है। इसके अलावा अमेरिका 900 कर्मचारियों को निकाल चुका है। वहीं, ब्रिटेन, जर्मनी, मिस्र, मोरक्को और नाइजीरिया ने अपने नागरिकों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन उन्हें निकालने का कोई इंतजाम नहीं किया। कुछ देशों ने अपने नागरिकों को दूसरे सीमावर्ती देशों तक पहुंचने के लिए कहा है।
अमेरिका-ब्रिटेन का ऐसा है रुख
यूक्रेन में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के मामले में अमेरिका ने सक्षम नहीं होने की बात कही है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि उसके नागरिक सीमा पार करके दूसरे पड़ोसी देशों में पहुंच जाएं, जिसके बाद उन्हें मदद दी जाएगी। उधर, ब्रिटेन ने अपने नागरिकों से कहा कि वे यूक्रेन की एडवाइजरी ही मानें। बता दें कि जर्मनी ने तो अस्थायी तौर पर अपना दूतावास ही बंद कर दिया है।
ऐसे मोर्चा संभालेंगे भारत के चार मंत्री
बता दें कि यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए केंद्र सरकार ने चार मंत्रियों ज्योतिरादित्य सिंधिया, हरदीप पुरी, किरण रिजिजू और वीके सिंह को युद्धग्रस्त देश के पड़ोसी देशों में भेजने का फैसला किया। ये मंत्री विशेष दूत के तौर पर जाएंगे। इसके तहत ज्योतिरादित्य सिंधिया रोमानिया और मोल्दोवा, किरण रिजिजू स्लोवाकिया, हरदीप पुरी हंगरी और वीके सिंह पोलैंड में मोर्चा संभालेंगे। अहम बात यह है कि यूक्रेन में फंसे भारतीयों को सकुशल लाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय यात्रा नियमों में बदलाव किया है। इसके तहत कोरोना टेस्ट, टीकाकरण और एयर सुविधा पोर्टल पर पूर्व पंजीकरण की अनिवार्यता को हटा दिया गया है।