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Russia-Ukraine War: यूक्रेन युद्ध ने दे दी है तुर्किये और ईरान को हथियार निर्यातक की खास पहचान

Wed, 21 Dec 2022 05:13 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अंकारा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अंकारा Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 21 Dec 2022 05:13 PM IST
सार

Russia-Ukraine War: जानकारों के मुताबिक दोनों देश काफी समय से हथियार उत्पादन में निवेश कर रहे थे। इसके जरिए उन्होंने देश के अंदर ड्रोंस और अन्य मारक हथियारों के निर्माण का एक ढांचा खड़ा कर लिया है। यूक्रेन युद्ध ने उन्हें हथियारों के निर्यात का मौका दिया...

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Russia-Ukraine War given Turkey and Iran special recognition of arms exporter
Russia-Ukraine War- Iranian Drones - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) से ईरान और तुर्किये को हथियार निर्यातक देश की खास पहचान मिली है। इसे साल 2022 की एक प्रमुख घटना समझा जा रहा है। दशकों तक इन दोनों देशों की छवि हथियारों के आयातक की थी। लेकिन इस वर्ष उन्होंने हथियारों का बड़े पैमाने निर्यात शुरू किया, जिस घटनाक्रम ने दुनिया का ध्यान खींचा है।

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जानकारों के मुताबिक दोनों देश काफी समय से हथियार उत्पादन में निवेश कर रहे थे। इसके जरिए उन्होंने देश के अंदर ड्रोंस और अन्य मारक हथियारों के निर्माण का एक ढांचा खड़ा कर लिया है। यूक्रेन युद्ध ने उन्हें हथियारों के निर्यात का मौका दिया।

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अमेरिकी पत्रिका फॉर्ब्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के कारण रूस और यूक्रेन दोनों को भारी नुकसान हुआ है। उनके हजारों टैंक, दर्जनों लड़ाकू विमान और सैकड़ों हेलीकॉप्टर नष्ट हो गए हैं। अब दोनों देशों के सामने अपनी सेनाओं के लिए नए हथियार जुटाने की चुनौती है। उनका यह संकट तुर्किये और ईरान के लिए एक अवसर की तरह आया। भौगोलिक रूप से तुर्किये और ईरान रूस और यूक्रेन के करीब हैं।

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रूस पर पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगा रखे हैं। इसलिए उसके लिए हथियारों के स्रोत सिकुड़ गए हैं। इस कारण भी ईरान को मौका मिला है। ईरान पर भी पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए हुए हैं, इसलिए दुनिया के कई हिस्सों में उसके लिए निर्यात करना संभव नहीं है। जबकि उसके विमान और जहाज कैस्पियन सागर को पार कर सीधे रूस पहुंच जाते हैं। 

तुर्किये ने अब ड्रोन निर्यातक के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर ली है। उसकी बेयकर कंपनी को लगभग 20 देशों से टीबी-2 अटैक ड्रोन्स की सप्लाई के ऑर्डर मिल चुके हैं। उसके खरीदारों में यूक्रेन भी है। मौजूदा युद्ध में यूक्रेन की सेना ने दूर-संचालित इन ड्रोंस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है।

दूसरी तरफ ईरान ने रूस की जरूरतों को पूरा किया है। उसने अपनी क्रूज मिसाइलें भी रूस को बेची हैं। इन मिसाइलों की खूबी यह है कि यह धीमी गति से उड़ान भरती हैं, इसलिए इन्हें रोक पाना कठिन बना हुआ है। कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने लगभग दो हजार शाहेद-136 ड्रोन भी रूस को बेचे हैं। साथ ही कुछ जासूसी ड्रोन भी ईरान ने रूस को दिए हैं। रूस ने ईरान से मिले हथियारों का गुजरे महीनों में यूक्रेन के खिलाफ इस्तेमाल किया है।

रूस दुनिया के सबसे बड़े हथियार निर्यातकों में शामिल रहा है। उसे हथियार बेचने में मिली सफलता से ईरान की हथियार निर्माता के रूप में प्रतिष्ठा बढ़ी है। फॉर्ब्स पत्रिका के मुताबिक हथियारों की बिक्री अब ईरान और तुर्किये दोनों के लिए आमदनी का एक बड़ा जरिया बन गई है। इसलिए संभावना है कि दोनों देश हथियार निर्माण और अस्त्र व्यापार पर अब और ज्यादा ध्यान केंद्रित करेंगे।

एक अनुमान के मुताबिक तुर्किये को इस वर्ष हथियार निर्यात से चार बिलियन डॉलर की आय होगी। पिछले वर्ष की तुलना में यह आंकड़ा 42 प्रतिशत अधिक है। रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस वर्ष बनी छवि का फायदा तुर्किये और ईरान दोनों को आने वाले वर्षों में भी मिलेगा। दोनों के हथियारों की दुनिया में अब मांग बढ़ने की संभावना है।

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