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Hindi News ›   World ›   Russia Ukraine War: 32 year old man Jakub Kotowicz became the messiah of animals, saved the lives of 200 cats and 60 dogs in 15 days

रूस-यूक्रेन युद्ध : जानवरों के लिए मसीहा बना 32 वर्षीय शख्स, 15 दिन में 200 बिल्लियों और 60 कुत्तों की बचाई जान

Tue, 22 Mar 2022 06:44 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, लवीव।
एजेंसी, लवीव। Published by: योगेश साहू Updated Tue, 22 Mar 2022 06:44 AM IST
सार

जाकुब कोटोविक्स एडीए नामक फाउंडेशन में पशु चिकित्सक के तौर पर कार्यरत है। लगभग 15 वर्ष से चल रही संस्था (एडीए) के साथ-साथ जाकुब का एक निजी पशु चिकित्सालय भी है, जिसमें लोगों को नि:शुल्क सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। हालांकि, जाकुब के पास दान में मिले धन के अलावा आमदनी का कोई साधन नहीं है।

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Russia Ukraine War: 32 year old man Jakub Kotowicz became the messiah of animals, saved the lives of 200 cats and 60 dogs in 15 days
जाकुब कोटोविक्स - फोटो : Social Media

विस्तार

यूक्रेन और रूस के जारी युद्ध के बीच बहुत से लोगों को देश छोड़कर भागना पड़ा है, जबकि कई लोगों की जान चली गई है। इस परिस्थिति में इंसानों की ही तरह जानवर भी काफी झेल रहे हैं। कुछ अपने पालतू जानवरों को छोड़कर चले गए हैं। लेकिन इस बीच उन जानवरों के लिए 32 वर्षीय शख्स मसीहा बनकर आया है जो अपने देश से बॉर्डर पार कर यूक्रेन में दाखिल होकर उन्हें वहां से सुरक्षित निकाल रहा है। 

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पोलैंड के रहने वाले जाकुब कोटोविक्स नामक शख्स ने लवीव शहर से पिछले 15 दिनों में 200 बिल्लियों और 60 कुत्तों की जान बचाई है। बचाए गए पालतू जानवर  स्वास्थ्य मानसिक और शारीरिक रूप से ठीक हो रहे हैं। जाकुब ने एक पिगमाय बकरी के बच्चे को भी बचाया है जिसका नाम साशा है और वो सिर्फ 2 महीने का है। अब वह उसे गोद लेने की सोच रहा है।

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  • रिपोर्ट के अनुसार जाकुब जब पोलैंड से लौटा तो बिल्लियां कुछ दिनों तक डर के साए में थीं। आमतौर पर लवीव से बॉर्डर पार करने में एक दिन का समय लगता है लेकिन भीड़ के चलते काफी वक्त लगा।
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  • जाकुब के मुताबिक, उसने जानवरों को वहां से निकालने के लिए 12 लाख रुपये किराए पर दो कार खरीदी थी।
  • जाकुब कोटोविक्स एडीए नामक फाउंडेशन में पशु चिकित्सक के तौर पर कार्यरत है। लगभग 15 वर्ष से चल रही संस्था (एडीए) के साथ-साथ जाकुब का एक निजी पशु चिकित्सालय भी है, जिसमें लोगों को नि:शुल्क सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं।
  • हालांकि, जाकुब के पास दान में मिले धन के अलावा आमदनी का कोई साधन नहीं है। फिलहाल जाकुब ने पशुओं की मदद करने के लिए गिल्डफोर्ड छोड़कर अनिश्चितकाल के लिए पोलैंड में रहने का सोचा है।
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