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रूस-यूक्रेन: ब्राजील-भारत का नजरिया अच्छा, जेलेंस्की गंभीर नहीं; युद्धविराम और ब्लिंकन-लैमी के दौरे पर लावरोव
Wed, 11 Sep 2024 03:30 PM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रियाद (सऊदी अरब)
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रियाद (सऊदी अरब)
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 11 Sep 2024 03:30 PM IST
सार
रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष बीते 28 महीने से अधिक समय से जारी है। युद्धविराम की अंतरराष्ट्रीय अपीलों के बीच रूस ब्राजील और भारत जैसे देशों की मध्यस्थता पर सकारात्मक रूख दिखा चुका है। भारत ने भी शांति बहाल करने की कवायद का समर्थन करने की बात कही है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी और ब्रिटिश विदेश मंत्री कीव दौरे पर पहुंचे हैं। रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने कहा है कि ब्राजील और भारत का नजरिया सराहनीय है, जबकि वे यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की बातों को गंभीरता से नहीं लेते।
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रूसी विदेश मंत्री लावरोव (फाइल)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि वे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की बातों और युद्धविराम को लेकर उनके फॉर्मूले को गंभीरता से नहीं लेते। उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध की समाप्ति को लेकर ब्राजील और भारत का नजरिया सराहनीय है। लावरोव ने कहा कि उन्होंने जेलेंस्की के शांति प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार नहीं किया है। रूसी विदेश मंत्री ने यूक्रेन की नीयत पर भी गंभीर सवालिया निशान लगाए। उन्होंने यह भी कहा कि जेलेंस्की का खुद के 'शांति सूत्र' पर अड़े रहना दिखाता है कि वे युद्धविराम को लेकर गंभीर नहीं हैं।
जलेंस्की की बातों पर क्या बोले रूसी विदेश मंत्री
लावरोव ने कहा, ऐसा लगता है कि जेलेंस्की ईमानदारी से समझौता नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'जेलेंस्की सूत्र' के इर्द-गिर्द तैरते कई विचार ऐसे शब्दों से शुरू होते हैं, जिसमें सैन्य अभियानों को समाप्त करने की बात करते हैं। उनकी बातों में अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की अपील भी नजर आती है। बकौल लावरोव, अंतरराष्ट्रीय कानून केवल उन बातों से संबंधित नहीं हैं, जिनके बारे में जेलेंस्की बातें कर रहे हैं।
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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ब्लिंकन और ब्रिटिश विदेश मंत्री के दौरे पर नजरें
तमाम अंतरराष्ट्रीय कवायदों के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड लैमी भी यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे हैं। ब्लिंकन और लैमी के 11 सितंबर को कीव पहुंचने से पहले यूक्रेन पश्चिमी देशों पर रूस के खिलाफ लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल करने की अनुमति देने का दबाव बना रहा है। ब्लिंकन का दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि नवंबर में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले डेमोक्रेट प्रत्याशी कमला हैरिस और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच ढाई साल से अधिक समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध पर बहस हो चुकी है।
नौ सितंबर की मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद रूसी विदेश मंत्री का बयान अहम
रूस और यूक्रेन के संघर्ष विराम की कवायदों के बीच लावरोव का यह बयान रियाद में हुई रणनीतिक वार्ता के बाद सामने आय़ा है। 9 सितंबर को 7वीं रूस -खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) की मंत्रिस्तरीय बैठक हुई थी। बता दें कि युद्ध की शुरूआत के लगभग नौ महीने बाद, नवंबर, 2022 में इंडोनेशिया में जी-20 सम्मेलन हुआ था। इस मंच पर वैश्विक नेताओं के सामने जेलेंस्की ने युद्धविराम की अपील के साथ कुछ प्रस्ताव सामने रखे थे।
'जेलेंस्की समझौता ईमानदारी से नहीं करना चाहते', रूस को ऐसा क्यों लगता है
कुर्स्क क्षेत्र में हमलों के बाद यूक्रेन के साथ वार्ता न करने के रूस के रुख के बारे में पूछे जाने पर लावरोव ने कहा, यूक्रेनी सशस्त्र बलों ने कुर्स्क क्षेत्र में आतंकी आक्रमण हो रहे हैं। बेलगोरोड और सीमावर्ती इलाकों में कई संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पांच सितंबर, 2024 को पूर्वी आर्थिक मंच पर अहम बात कही। उन्होंने कुर्स्क क्षेत्र और रूसी संघ के पूरे इलाके की मुक्ति का जिक्र किया था। कई इलाकों में यूक्रेनी नव-नाजी उत्पात मचा रहे हैं। ऐसे में रूसी सशस्त्र बलों का पवित्र कर्तव्य है। तनाव व्याप्त होने के बीच यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने जो बातें कही हैं, वह चौंकाने वाली होने के साथ-साथ चेतावनी के भी संकेत देती हैं। पश्चिमी देशों पर जेलेंस्की का दबाव बनाना साफ दर्शाता है कि वे समझौता ईमानदारी से नहीं करना चाहते। वे रूस को ऐसी स्थिति में लाना चाहते हैं, जहां यह घोषणा की जा सके कि युद्ध के मैदान में रूस को 'रणनीतिक हार' झेलनी पड़ी है। वे प्रतिद्वंद्वियों को कमजोर बनाना चाहते हैं। यही कारण है कि उन्होंने जेलेंस्की की बातों को गंभीरता से नहीं लिया।
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के शांति प्रस्ताव में क्या बातें हैं, रूस पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों से जुड़े आरोप भी शामिल
गौरतलब है कि इंडोनेशिया के बाली में जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन के दौरान जेलेंस्की ने साल 2022 में ही दुनियाभर के बड़े नेताओं के सामने 10 सूत्री शांति फॉर्मूले का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने परमाणु सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और रूस के कथित युद्ध अपराध के लिए विशेष न्यायाधिकरण और मॉस्को-कीव के बीच अंतिम शांति संधि जैसी बातों का प्रस्ताव रखा था। बकौल जेलेंस्की, रूस चाहता है कि उनकी भाषा, संस्कृति, इतिहास और धर्म से इत्तेफाक रखने वाले लोगों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक इंसानों की तरह बर्ताव किया जाए।
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जलेंस्की की बातों पर क्या बोले रूसी विदेश मंत्री
लावरोव ने कहा, ऐसा लगता है कि जेलेंस्की ईमानदारी से समझौता नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'जेलेंस्की सूत्र' के इर्द-गिर्द तैरते कई विचार ऐसे शब्दों से शुरू होते हैं, जिसमें सैन्य अभियानों को समाप्त करने की बात करते हैं। उनकी बातों में अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की अपील भी नजर आती है। बकौल लावरोव, अंतरराष्ट्रीय कानून केवल उन बातों से संबंधित नहीं हैं, जिनके बारे में जेलेंस्की बातें कर रहे हैं।
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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ब्लिंकन और ब्रिटिश विदेश मंत्री के दौरे पर नजरें
तमाम अंतरराष्ट्रीय कवायदों के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड लैमी भी यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे हैं। ब्लिंकन और लैमी के 11 सितंबर को कीव पहुंचने से पहले यूक्रेन पश्चिमी देशों पर रूस के खिलाफ लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल करने की अनुमति देने का दबाव बना रहा है। ब्लिंकन का दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि नवंबर में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले डेमोक्रेट प्रत्याशी कमला हैरिस और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच ढाई साल से अधिक समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध पर बहस हो चुकी है।
नौ सितंबर की मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद रूसी विदेश मंत्री का बयान अहम
रूस और यूक्रेन के संघर्ष विराम की कवायदों के बीच लावरोव का यह बयान रियाद में हुई रणनीतिक वार्ता के बाद सामने आय़ा है। 9 सितंबर को 7वीं रूस -खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) की मंत्रिस्तरीय बैठक हुई थी। बता दें कि युद्ध की शुरूआत के लगभग नौ महीने बाद, नवंबर, 2022 में इंडोनेशिया में जी-20 सम्मेलन हुआ था। इस मंच पर वैश्विक नेताओं के सामने जेलेंस्की ने युद्धविराम की अपील के साथ कुछ प्रस्ताव सामने रखे थे।
'जेलेंस्की समझौता ईमानदारी से नहीं करना चाहते', रूस को ऐसा क्यों लगता है
कुर्स्क क्षेत्र में हमलों के बाद यूक्रेन के साथ वार्ता न करने के रूस के रुख के बारे में पूछे जाने पर लावरोव ने कहा, यूक्रेनी सशस्त्र बलों ने कुर्स्क क्षेत्र में आतंकी आक्रमण हो रहे हैं। बेलगोरोड और सीमावर्ती इलाकों में कई संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पांच सितंबर, 2024 को पूर्वी आर्थिक मंच पर अहम बात कही। उन्होंने कुर्स्क क्षेत्र और रूसी संघ के पूरे इलाके की मुक्ति का जिक्र किया था। कई इलाकों में यूक्रेनी नव-नाजी उत्पात मचा रहे हैं। ऐसे में रूसी सशस्त्र बलों का पवित्र कर्तव्य है। तनाव व्याप्त होने के बीच यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने जो बातें कही हैं, वह चौंकाने वाली होने के साथ-साथ चेतावनी के भी संकेत देती हैं। पश्चिमी देशों पर जेलेंस्की का दबाव बनाना साफ दर्शाता है कि वे समझौता ईमानदारी से नहीं करना चाहते। वे रूस को ऐसी स्थिति में लाना चाहते हैं, जहां यह घोषणा की जा सके कि युद्ध के मैदान में रूस को 'रणनीतिक हार' झेलनी पड़ी है। वे प्रतिद्वंद्वियों को कमजोर बनाना चाहते हैं। यही कारण है कि उन्होंने जेलेंस्की की बातों को गंभीरता से नहीं लिया।
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के शांति प्रस्ताव में क्या बातें हैं, रूस पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों से जुड़े आरोप भी शामिल
गौरतलब है कि इंडोनेशिया के बाली में जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन के दौरान जेलेंस्की ने साल 2022 में ही दुनियाभर के बड़े नेताओं के सामने 10 सूत्री शांति फॉर्मूले का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने परमाणु सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और रूस के कथित युद्ध अपराध के लिए विशेष न्यायाधिकरण और मॉस्को-कीव के बीच अंतिम शांति संधि जैसी बातों का प्रस्ताव रखा था। बकौल जेलेंस्की, रूस चाहता है कि उनकी भाषा, संस्कृति, इतिहास और धर्म से इत्तेफाक रखने वाले लोगों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक इंसानों की तरह बर्ताव किया जाए।