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वजन घटाने की दवाओं से गंजेपन का खतरा: ओजेम्पिक-वेगोवी पर नया अध्ययन, आनुवंशिक जोखिम में 7% इजाफा
Mon, 14 Sep 2026 12:42 AM IST
राकेश कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, न्यूयॉर्क।
अमर उजाला नेटवर्क, न्यूयॉर्क।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 14 Sep 2026 12:42 AM IST
सार
वजन घटाने और टाइप-2 डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली ओजेम्पिक, वेगोवी और जेपबाउंड जैसी दवाओं को लेकर नए अध्ययन में बाल झड़ने का संभावित खतरा सामने आया है। एनवाईयू लैंगोन हेल्थ के शोधकर्ताओं के अनुसार, पुरुष-पैटर्न गंजेपन के प्रति आनुवंशिक रूप से संवेदनशील पुरुषों में जोखिम करीब 7 प्रतिशत अधिक हो सकता है। अब तक तेजी से वजन घटने को बाल झड़ने की प्रमुख वजह माना जाता था, लेकिन अध्ययन दवाओं के सीधे जैविक असर की संभावना की ओर भी इशारा करता है।
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गंजापन
- फोटो : @AI/अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
वजन कम करने और टाइप-2 डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए तेजी से लोकप्रिय हुई ओजेम्पिक, वेगोवी और जेपबाउंड जैसी दवाओं को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी (एनवाईयू) लैंगोन हेल्थ के शोधकर्ताओं के अध्ययन में संकेत मिला है कि जिन पुरुषों में आनुवंशिक रूप से पुरुष-पैटर्न गंजेपन की आशंका पहले से अधिक है, उनमें इन दवाओं से जुड़े जीएलपी-1 असर के कारण बाल झड़ने का जोखिम करीब 7 प्रतिशत बढ़ सकता है।
यह निष्कर्ष इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इन दवाओं का इस्तेमाल करने वाले पुरुषों और महिलाओं, दोनों में बाल पतले होने या अधिक झड़ने की शिकायत पहले सामने आ चुकी है। अब तक इसका प्रमुख कारण तेजी से वजन कम होना माना जाता रहा है। नए अध्ययन से संकेत मिलता है कि कुछ मामलों में इसके पीछे दवा का शरीर और बालों की जड़ों पर सीधा जैविक असर भी हो सकता है।
ओजेम्पिक और वेगोवी में सेमाग्लूटाइड तथा जेपबाउंड में टिरजेपाटाइड जैसे पदार्थ होते हैं। ये दवाएं शरीर में प्राकृतिक रूप से बनने वाले जीएलपी-1 हार्मोन की तरह काम करती हैं। जीएलपी-1 भोजन के बाद शरीर को यह संकेत देने में मदद करता है कि अब पर्याप्त ऊर्जा मिल चुकी है। इससे भूख कम होती है, पेट अपेक्षाकृत देर से खाली होता है और शरीर में इंसुलिन की प्रतिक्रिया बेहतर होती है। नतीजे में ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद मिलती है और व्यक्ति कम खाना खाता है, जिससे वजन घटता है।
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ओजेम्पिक मुख्य रूप से टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए इस्तेमाल होती है, जबकि वेगोवी को मोटापे या अधिक वजन के प्रबंधन के लिए मंजूरी मिली है। जेपबाउंड भी वजन घटाने के लिए इस्तेमाल की जाती है और इसका असर जीएलपी-1 के साथ एक अन्य हार्मोन संबंधी मार्ग पर भी होता है।
वजन घटने से अलग भी हो सकता है असर
शोधकर्ताओं ने जीएलपी-1 रिसेप्टर से जुड़े जीएलपी1आर जीन की गतिविधि और पुरुषों में होने वाले एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया यानी पुरुष-पैटर्न बाल झड़ने के आनुवंशिक आंकड़ों की तुलना की। जिन आनुवंशिक बदलावों से शरीर में जीएलपी-1 रिसेप्टर प्रोटीन की मात्रा अधिक होने का संकेत मिलता था, वे पुरुष-पैटर्न गंजेपन वाले पुरुषों में अधिक पाए गए।शोधकर्ताओं ने हाई ब्लड प्रेशर जैसे दूसरे जोखिम कारकों को भी विश्लेषण में शामिल किया। उच्च रक्तचाप को बालों की जड़ों तक रक्त प्रवाह और बालों के विकास पर असर डालने वाला संभावित कारक माना जाता है। लेकिन इसे ध्यान में रखने के बाद भी करीब 7 प्रतिशत का अतिरिक्त जोखिम बना रहा।
इंसुलिन रेजिस्टेंस और कम टेस्टोस्टेरोन जैसे अन्य संभावित कारण भी इस संबंध को पूरी तरह नहीं समझा सके।इसका अर्थ यह नहीं है कि जीएलपी-1 दवा लेने वाले हर पुरुष के बाल झड़ेंगे। अध्ययन ने यह भी साबित नहीं किया है कि दवा सीधे तौर पर गंजापन पैदा करती है। इसके बजाय आनुवंशिक आंकड़ों से संभावित कारणात्मक संबंध का संकेत मिला है, जिसकी पुष्टि के लिए आगे के अध्ययन जरूरी हैं।
भविष्य में दवा से पहले हो सकती है आनुवंशिक जांच
शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि आगे के प्रयोग इन निष्कर्षों की पुष्टि करते हैं तो भविष्य में कुछ पुरुषों, और संभवतः महिलाओं में भी, दवा शुरू करने से पहले बाल झड़ने के आनुवंशिक जोखिम की जांच की जा सकती है। ज्यादा जोखिम वाले मरीजों में बालों की सुरक्षा के लिए मिनॉक्सिडिल जैसे उपचारों को जीएलपी-1 दवाओं के साथ इस्तेमाल करने की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है। यह अध्ययन जर्नल ऑफ इन्वेस्टिगेटिव डर्मेटोलॉजी में ऑनलाइन प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने दो बड़े सार्वजनिक आनुवंशिक डेटाबेस का इस्तेमाल किया, जिनमें कुल मिलाकर लाखों आनुवंशिक आंकड़ों का प्रतिनिधित्व करने वाले बड़े समूह शामिल थे। हालांकि अध्ययन में मुख्य रूप से पुरुषों के आंकड़ों का इस्तेमाल हुआ, इसलिए महिलाओं में यही संबंध मौजूद है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
गंजापन सिर के आगे और ऊपर से शुरू होता है
पुरुष-पैटर्न गंजापन आमतौर पर सिर के आगे और ऊपर के हिस्से से बाल पतले होने के रूप में शुरू होता है। आनुवंशिक रूप से संवेदनशील लोगों में उम्र के साथ इसकी संभावना बढ़ती है। इसलिए नए निष्कर्ष का सबसे अहम संदेश यह है कि जीएलपी-1 दवाओं के संभावित बाल झड़ने के असर को केवल तेजी से वजन घटने से जोड़कर देखने के बजाय आनुवंशिक संवेदनशीलता और दवा के जैविक प्रभाव को भी समझना जरूरी हो सकता है।
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यह निष्कर्ष इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इन दवाओं का इस्तेमाल करने वाले पुरुषों और महिलाओं, दोनों में बाल पतले होने या अधिक झड़ने की शिकायत पहले सामने आ चुकी है। अब तक इसका प्रमुख कारण तेजी से वजन कम होना माना जाता रहा है। नए अध्ययन से संकेत मिलता है कि कुछ मामलों में इसके पीछे दवा का शरीर और बालों की जड़ों पर सीधा जैविक असर भी हो सकता है।
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ओजेम्पिक और वेगोवी में सेमाग्लूटाइड तथा जेपबाउंड में टिरजेपाटाइड जैसे पदार्थ होते हैं। ये दवाएं शरीर में प्राकृतिक रूप से बनने वाले जीएलपी-1 हार्मोन की तरह काम करती हैं। जीएलपी-1 भोजन के बाद शरीर को यह संकेत देने में मदद करता है कि अब पर्याप्त ऊर्जा मिल चुकी है। इससे भूख कम होती है, पेट अपेक्षाकृत देर से खाली होता है और शरीर में इंसुलिन की प्रतिक्रिया बेहतर होती है। नतीजे में ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद मिलती है और व्यक्ति कम खाना खाता है, जिससे वजन घटता है।
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ओजेम्पिक मुख्य रूप से टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए इस्तेमाल होती है, जबकि वेगोवी को मोटापे या अधिक वजन के प्रबंधन के लिए मंजूरी मिली है। जेपबाउंड भी वजन घटाने के लिए इस्तेमाल की जाती है और इसका असर जीएलपी-1 के साथ एक अन्य हार्मोन संबंधी मार्ग पर भी होता है।
वजन घटने से अलग भी हो सकता है असर
शोधकर्ताओं ने जीएलपी-1 रिसेप्टर से जुड़े जीएलपी1आर जीन की गतिविधि और पुरुषों में होने वाले एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया यानी पुरुष-पैटर्न बाल झड़ने के आनुवंशिक आंकड़ों की तुलना की। जिन आनुवंशिक बदलावों से शरीर में जीएलपी-1 रिसेप्टर प्रोटीन की मात्रा अधिक होने का संकेत मिलता था, वे पुरुष-पैटर्न गंजेपन वाले पुरुषों में अधिक पाए गए।शोधकर्ताओं ने हाई ब्लड प्रेशर जैसे दूसरे जोखिम कारकों को भी विश्लेषण में शामिल किया। उच्च रक्तचाप को बालों की जड़ों तक रक्त प्रवाह और बालों के विकास पर असर डालने वाला संभावित कारक माना जाता है। लेकिन इसे ध्यान में रखने के बाद भी करीब 7 प्रतिशत का अतिरिक्त जोखिम बना रहा।
इंसुलिन रेजिस्टेंस और कम टेस्टोस्टेरोन जैसे अन्य संभावित कारण भी इस संबंध को पूरी तरह नहीं समझा सके।इसका अर्थ यह नहीं है कि जीएलपी-1 दवा लेने वाले हर पुरुष के बाल झड़ेंगे। अध्ययन ने यह भी साबित नहीं किया है कि दवा सीधे तौर पर गंजापन पैदा करती है। इसके बजाय आनुवंशिक आंकड़ों से संभावित कारणात्मक संबंध का संकेत मिला है, जिसकी पुष्टि के लिए आगे के अध्ययन जरूरी हैं।
भविष्य में दवा से पहले हो सकती है आनुवंशिक जांच
शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि आगे के प्रयोग इन निष्कर्षों की पुष्टि करते हैं तो भविष्य में कुछ पुरुषों, और संभवतः महिलाओं में भी, दवा शुरू करने से पहले बाल झड़ने के आनुवंशिक जोखिम की जांच की जा सकती है। ज्यादा जोखिम वाले मरीजों में बालों की सुरक्षा के लिए मिनॉक्सिडिल जैसे उपचारों को जीएलपी-1 दवाओं के साथ इस्तेमाल करने की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है। यह अध्ययन जर्नल ऑफ इन्वेस्टिगेटिव डर्मेटोलॉजी में ऑनलाइन प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने दो बड़े सार्वजनिक आनुवंशिक डेटाबेस का इस्तेमाल किया, जिनमें कुल मिलाकर लाखों आनुवंशिक आंकड़ों का प्रतिनिधित्व करने वाले बड़े समूह शामिल थे। हालांकि अध्ययन में मुख्य रूप से पुरुषों के आंकड़ों का इस्तेमाल हुआ, इसलिए महिलाओं में यही संबंध मौजूद है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
गंजापन सिर के आगे और ऊपर से शुरू होता है
पुरुष-पैटर्न गंजापन आमतौर पर सिर के आगे और ऊपर के हिस्से से बाल पतले होने के रूप में शुरू होता है। आनुवंशिक रूप से संवेदनशील लोगों में उम्र के साथ इसकी संभावना बढ़ती है। इसलिए नए निष्कर्ष का सबसे अहम संदेश यह है कि जीएलपी-1 दवाओं के संभावित बाल झड़ने के असर को केवल तेजी से वजन घटने से जोड़कर देखने के बजाय आनुवंशिक संवेदनशीलता और दवा के जैविक प्रभाव को भी समझना जरूरी हो सकता है।