{"_id":"605643d68ebc3e8d38234e63","slug":"russia-still-hopes-to-improve-relations-with-america","type":"story","status":"publish","title_hn":"उम्मीद: रूस को अब भी है अमेरिका से रिश्ते सुधरने की आशा","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
उम्मीद: रूस को अब भी है अमेरिका से रिश्ते सुधरने की आशा
Sun, 21 Mar 2021 12:19 AM IST
Jeet Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 21 Mar 2021 12:19 AM IST
विज्ञापन
रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की अमर्यादित टिप्पणी के बावजूद रूस ने आने वाले दिनों में अमेरिका से संबंध सुधरने की उम्मीद नहीं छोड़ी है। रूसी विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसीलिए इस मामले में रूस की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत नरम रही है।
विज्ञापन
बाइडन ने एक अमेरिकी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू के दौरान इस राय से सहमति जताई थी कि पुतिन ‘हत्यारे’ हैं। लेकिन इस पर पुतिन की प्रतिक्रिया संयत रही। उलटे उन्होंने बाइडन की अच्छी सेहत की कामना की है।
विज्ञापन
अब दोनों पक्षों के रुख की अमेरिका- रूस संबंधों पर संभावित असर के अनुमान लगाए जा रहे हैं। पिछले दिनों खबर आई थी कि रूस ने 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की थी।
विज्ञापन
इसके जवाब में बाइडन ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाने का इरादा जताया है। वैसे भी बाइडन की डेमोक्रेटिक पार्टी का रूस के प्रति रुख सख्त रहा है। इसलिए ये आम आशंका है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ेगा।
लेकिन रूसी मीडिया में चर्चा है कि अमेरिका विरोधाभासी संकेत भेज रहा है। एक तरफ राष्ट्रपति बाइडन ने अनपेक्षित टिप्पणी की, वहीं उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पेत्रुशेव के साथ संपर्क बनाए हुए हैँ।
यहां के अखबार द मास्को टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक सुलिवान ने पद संभालने के बाद हर महीने पेत्रुशेव को फोन किया है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक स्तर पर बातचीत की तैयारी भी चल रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को अप्रैल में अफगानिस्तान के सवाल पर होने वाले सम्मेलन में भाग लेन के लिए आमंत्रित किया है।
मास्को टाइम्स के मुताबिक अगर जो बाइडन ने पुतिन को बातचीत के लिए आमंत्रित किया, तो इस बात की संभावना कम है कि पुतिन उसे ठुकरा देंगे।
लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि रूस अपने देश के घरेलू मामलों में अमेरिकी आलोचनाओं का ख्याल करेगा, इसकी संभावना कम है।
यहां के जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक अलेक्सी चेस्नोकोव ने कहा है- ‘इस मुद्दे पर कोई समझौता संभव नहीं है। यहां जो लोग सार्वजनिक रूप से राष्ट्रपति पुतिन के प्रति अपना समर्थन नहीं जताएंगे, उन्हें देशद्रोही बताया जाएगा।’ गौरतलब है कि अमेरिका लगातार पुतिन विरोधी नेता अलेक्सी नवालनी को जेल में रखे जाने की आलोचना करता रहा है।
अमेरिका और रूस के बीच तनाव का नया दौर अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के निदेश की 2020 के चुनाव में विदेशी दखल के बारे में आई रिपोर्ट से आया है। ये रिपोर्ट इस साल जनवरी में ही अमेरिकी कांग्रेस (संसद) को सौंपी गई थी। लेकिन इसके निष्कर्ष इसी हफ्ते जारी हुए।
इस रिपोर्ट में चुनाव में हस्तक्षेप और चुनाव को प्रभावित करने की कोशिशों के बीच फर्क किया गया है। इसमें कहा गया है कि प्रभावित करने का मतलब परदे के पीछे से किसी उम्मीदवार के लिए सकारात्मक और किसी दूसरे उम्मीदवार के लिए नकारात्मक प्रचार करना है।
जबकि चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप का मतलब चुनावी तंत्र, वोटर लिस्ट, मतगणना प्रक्रिया और चुनाव परिणाम को तय करने में सीधे दखल देना है। ऐसा दखल धन या तकनीक के इस्तेमाल से किया जा सकता है।
सीआईए का निष्कर्ष है कि रूस ने परदे के पीछे से जनमत को प्रभावित करने की कोशिश की। उसने पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप को जितवाने और बाइडन को हराने के मकसद से प्रचार करने में अपनी ताकत लगाई। इसे सूचना युद्ध का हिस्सा बताया गया है।
जानकारों का कहना है कि चूंकि सीआईए की रिपोर्ट में रूस को ट्रंप समर्थक के रूप में बताने की कोशिश की गई है, इसलिए बाइडन का नाराज होना लाजिमी है। इसका दोनों देशों के रिश्तों पर कितना फर्क पड़ेगा, यह आगे चल कर ही जाहिर हो सकेगा।