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परमाणु हथियार पर हलचल तेज: फ्रांस के राष्ट्रपति की टिप्पणी पर रूस का तंज, अमेरिका के लिए कही ये बड़ी बात
Fri, 07 Apr 2023 11:11 AM IST
हिमांशु मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Fri, 07 Apr 2023 11:11 AM IST
सार
चीन की राजकीय यात्रा के दौरान मैक्रॉन ने यह भी तर्क दिया कि बेलारूस में परमाणु हथियारों को तैनात करने का रूस का हालिया निर्णय अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों के साथ "बाहर" है।
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रूस-अमेरिका और फ्रांस
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
रूस ने बेलारूस में परमाणु हथियार तैनात करने का एलान किया है। इसके बाद से पश्चिमी देशों में हलचल तेज हो गई है। अमेरिका, ब्रिटेन के बाद फ्रांस ने भी रूस को ऐसा न करने के लिए कहा। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रॉन इमैनुएल ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा था, 'फ्रांस का मानना है कि यूक्रेन में संघर्ष से परमाणु हथियारों को पूरी तरह से बाहर रखा जाना चाहिए। किसी भी स्थिति में परमाणु हथियारों को परमाणु शक्ति के क्षेत्र के बाहर तैनात नहीं किया जा सकता है, विशेष रूप से यूरोप में।'
चीन की राजकीय यात्रा के दौरान मैक्रॉन ने यह भी तर्क दिया कि बेलारूस में परमाणु हथियारों को तैनात करने का रूस का हालिया निर्णय अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों के साथ "बाहर" है। अब इसपर रूस ने पलटवार किया है। ट्विटर पर रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने लिखा, 'क्या मैं यह समझने में सही हूं कि पेरिस की कठोर मांग वाशिंगटन को संबोधित है?' मंत्रालय ने दो तस्वीरें भी साझा कीं, जिसमें दावा किया गया कि अमेरिका ने पूरे यूरोप में परमाणु हथियार तैनात कर दिए हैं। इसमें उन छह देशों के नाम भी सूचीबद्ध हैं जहां अमेरिका ने अपने परमाणु हथियार "US B61" को तैनात किया था।
नाटो की दहलीज पर परमाणु हथियार तैनात करेगा रूस
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच परमाणु हमले का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के एलान के बाद बेलारूस ने भी साफ कर दिया है कि वह अपने देश में रूस के टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार को तैनात करने के लिए मंजूरी दे चुका है। सबसे बड़ी बात ये है कि रूस के इस परमाणु हथियारों की तैनाती नाटो देशों के चौखट पर ही होगी। मतलब नाटो सदस्य देशों के ठीक बॉर्डर पर ये हथियार रखे जाएंगे। ऐसा करने से रूस पश्चिमी देशों के बिल्कुल करीब पहुंच जाएगा।
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बेलारूस में रूसी राजदूत बोरिस ग्रिजलोव ने बेलारूसी राज्य टेलीविजन को बताया, 'हथियारों को हमारे संघ राज्य की पश्चिमी सीमा पर ले जाया जाएगा और सुरक्षा सुनिश्चित करने की संभावनाओं को बढ़ाएगा।' उन्होंने आगे कहा, 'यह यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में शोर के बावजूद किया जाएगा।'
हालांकि, ग्रीजलोव ने यह नहीं बताया कि हथियार कहां तैनात किए जाएंगे, लेकिन ये जरूर साफ कर दिया कि एक जुलाई तक पुतिन के आदेश के अनुसार बेलारूस के पश्चिम में परमाणु हथियार तैनात कर दी जाएगी। बेलारूस के उत्तर में लिथुआनिया और लातविया की सीमाएं हैं और पश्चिम में पोलैंड। ये सभी नाटो सदस्य देश हैं। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद इन सीमाओं पर अतिरिक्त सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तैनाती की गई है।
परमाणु युद्ध की चेतावनी
रूस का कहना है कि बेलारूस में इन हथियारों की तैनाती ठीक उसी तरह होगी, जैसी अमेरिका ने नाटो देशों में अपने पमाणु बम तैनात किए हैं। बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको का कहना है कि वह चाहेंगे कि रूस अंतरमहाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइलों को भी तैनात करें। उनका कहना है कि रूस के परमाणु हथियारों की तैनाती उनके देश को सुरक्षा प्रदान करेगा। हाल ही में उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पुतिन हारते हैं तो परमाणु युद्ध हो सकता है।
पुतिन ने दिया था आदेश
पिछले दिनों रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि रूस इस साल एक जुलाई तक बेलारूस में टैक्टिकल वीपन्स के भंडारण के लिए बनाई जा रहा स्टोरेज यूनिट का काम पूरा कर लेगा। उन्होंने आगे बताया कि रूस ने पहले ही परमाणु मिसाइलें लॉन्च करने के लिए जरूरी कुछ इस्कंदर मिसाइल सिस्टम बेलारूस भेज दिए हैं।
1990 के दशक के मध्य के बाद ये पहली बार है जब रूस अपने परमाणु हथियार अपने देश से बाहर अपने किसी मित्र देश में तैनात कर रहा है। 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस के हथियार नए स्वतंत्र हुए चार देशों में रह गए थे- रूस, यूक्रेन, बेलारूस और कजाकस्तान। इन सभी हथियारों को साल 1996 तक रूस लाने का काम पूरा कर लिया गया था।
अमेरिका-ताइवान बैठक से भड़का चीन, अमेरिकी संस्थानों पर लगाई पाबंदी
वहीं, गत वर्ष अमेरिकी संसद (प्रतिनिधि सभा) की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा पर बौखलया चीन, इस बार ताइवानी राष्ट्रपति साइ इंग-वेन की अमेरिका में प्रतिनिधि सभा के नए अध्यक्ष केविन मैक्कार्थी से मुलाकात पर चिढ़ा है। खीज निकालते हुए चीन इस बैठक के विरोध में अमेरिकी रोनाल्ड रीगन प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी व अमेरिका के अन्य एशिया आधारित संगठनों पर रोक लगा रहा है। चीन नहीं चाहता कि यह द्वीपीय राष्ट्र उसकी अनुमति के बिना किसी देश के साथ आधिकारिक रिश्ते बनाए।
श्रीलंका में बड़ा रडार लगाना चाह रहा चीन, भारत को होगा खतरा
उधर, श्रीलंका को कर्ज के जाल में फंसाकर चीन अब यहां शक्तिशाली रडार लगाना चाहता है। चीन के इस कदम से न केवल भारत, बल्कि अमेरिका और ब्रिटेन को भी खतरा पैदा हो गया है। चीन इस रडॉर से हिंद महासागर में भारत, अमेरिका और ब्रिटेन की नौसैनिक गतिविधियों पर नजर रखना चाहता है। चीन इसके जरिए भारत के कूडनकुलम, कलपक्कम परमाणु बिजली संयंत्र, अंडमान निकोबार, अमेरिका व ब्रिटेन के संयुक्त नौसैनिक अड्डे डियागोगार्सिया की जासूसी कर सकता है।
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चीन की राजकीय यात्रा के दौरान मैक्रॉन ने यह भी तर्क दिया कि बेलारूस में परमाणु हथियारों को तैनात करने का रूस का हालिया निर्णय अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों के साथ "बाहर" है। अब इसपर रूस ने पलटवार किया है। ट्विटर पर रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने लिखा, 'क्या मैं यह समझने में सही हूं कि पेरिस की कठोर मांग वाशिंगटन को संबोधित है?' मंत्रालय ने दो तस्वीरें भी साझा कीं, जिसमें दावा किया गया कि अमेरिका ने पूरे यूरोप में परमाणु हथियार तैनात कर दिए हैं। इसमें उन छह देशों के नाम भी सूचीबद्ध हैं जहां अमेरिका ने अपने परमाणु हथियार "US B61" को तैनात किया था।
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नाटो की दहलीज पर परमाणु हथियार तैनात करेगा रूस
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच परमाणु हमले का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के एलान के बाद बेलारूस ने भी साफ कर दिया है कि वह अपने देश में रूस के टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार को तैनात करने के लिए मंजूरी दे चुका है। सबसे बड़ी बात ये है कि रूस के इस परमाणु हथियारों की तैनाती नाटो देशों के चौखट पर ही होगी। मतलब नाटो सदस्य देशों के ठीक बॉर्डर पर ये हथियार रखे जाएंगे। ऐसा करने से रूस पश्चिमी देशों के बिल्कुल करीब पहुंच जाएगा।
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बेलारूस में रूसी राजदूत बोरिस ग्रिजलोव ने बेलारूसी राज्य टेलीविजन को बताया, 'हथियारों को हमारे संघ राज्य की पश्चिमी सीमा पर ले जाया जाएगा और सुरक्षा सुनिश्चित करने की संभावनाओं को बढ़ाएगा।' उन्होंने आगे कहा, 'यह यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में शोर के बावजूद किया जाएगा।'
हालांकि, ग्रीजलोव ने यह नहीं बताया कि हथियार कहां तैनात किए जाएंगे, लेकिन ये जरूर साफ कर दिया कि एक जुलाई तक पुतिन के आदेश के अनुसार बेलारूस के पश्चिम में परमाणु हथियार तैनात कर दी जाएगी। बेलारूस के उत्तर में लिथुआनिया और लातविया की सीमाएं हैं और पश्चिम में पोलैंड। ये सभी नाटो सदस्य देश हैं। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद इन सीमाओं पर अतिरिक्त सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तैनाती की गई है।
परमाणु युद्ध की चेतावनी
रूस का कहना है कि बेलारूस में इन हथियारों की तैनाती ठीक उसी तरह होगी, जैसी अमेरिका ने नाटो देशों में अपने पमाणु बम तैनात किए हैं। बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको का कहना है कि वह चाहेंगे कि रूस अंतरमहाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइलों को भी तैनात करें। उनका कहना है कि रूस के परमाणु हथियारों की तैनाती उनके देश को सुरक्षा प्रदान करेगा। हाल ही में उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पुतिन हारते हैं तो परमाणु युद्ध हो सकता है।
पुतिन ने दिया था आदेश
पिछले दिनों रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि रूस इस साल एक जुलाई तक बेलारूस में टैक्टिकल वीपन्स के भंडारण के लिए बनाई जा रहा स्टोरेज यूनिट का काम पूरा कर लेगा। उन्होंने आगे बताया कि रूस ने पहले ही परमाणु मिसाइलें लॉन्च करने के लिए जरूरी कुछ इस्कंदर मिसाइल सिस्टम बेलारूस भेज दिए हैं।
1990 के दशक के मध्य के बाद ये पहली बार है जब रूस अपने परमाणु हथियार अपने देश से बाहर अपने किसी मित्र देश में तैनात कर रहा है। 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस के हथियार नए स्वतंत्र हुए चार देशों में रह गए थे- रूस, यूक्रेन, बेलारूस और कजाकस्तान। इन सभी हथियारों को साल 1996 तक रूस लाने का काम पूरा कर लिया गया था।
अमेरिका-ताइवान बैठक से भड़का चीन, अमेरिकी संस्थानों पर लगाई पाबंदी
वहीं, गत वर्ष अमेरिकी संसद (प्रतिनिधि सभा) की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा पर बौखलया चीन, इस बार ताइवानी राष्ट्रपति साइ इंग-वेन की अमेरिका में प्रतिनिधि सभा के नए अध्यक्ष केविन मैक्कार्थी से मुलाकात पर चिढ़ा है। खीज निकालते हुए चीन इस बैठक के विरोध में अमेरिकी रोनाल्ड रीगन प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी व अमेरिका के अन्य एशिया आधारित संगठनों पर रोक लगा रहा है। चीन नहीं चाहता कि यह द्वीपीय राष्ट्र उसकी अनुमति के बिना किसी देश के साथ आधिकारिक रिश्ते बनाए।
श्रीलंका में बड़ा रडार लगाना चाह रहा चीन, भारत को होगा खतरा
उधर, श्रीलंका को कर्ज के जाल में फंसाकर चीन अब यहां शक्तिशाली रडार लगाना चाहता है। चीन के इस कदम से न केवल भारत, बल्कि अमेरिका और ब्रिटेन को भी खतरा पैदा हो गया है। चीन इस रडॉर से हिंद महासागर में भारत, अमेरिका और ब्रिटेन की नौसैनिक गतिविधियों पर नजर रखना चाहता है। चीन इसके जरिए भारत के कूडनकुलम, कलपक्कम परमाणु बिजली संयंत्र, अंडमान निकोबार, अमेरिका व ब्रिटेन के संयुक्त नौसैनिक अड्डे डियागोगार्सिया की जासूसी कर सकता है।