अमेरिका-रूस के बीच एक और मोर्चा खुला: आईटीयू के प्रमुख का पद हथियाने की होड़
अमेरिका ने आईटीयू के प्रमुख पद के लिए डोरीन बोगडम-मार्टिन को अपना उम्मीदवार बनाया है। अगर विजयी रहीं, तो वे आईटीयू की पहली महिला प्रमुख होंगी। उनका मुकाबला रूस के राशिद इस्माइलोव से है। इस्माइलोव कई बड़ी संचार कंपनियों के लिए काम कर चुके हैं। उनमें नोकिया, इरिक्सन और हुवावे भी हैं...
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अमेरिका और रूस के बीच एक और मोर्चा खुल गया है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी- इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेन यूनियन (आईटीयू) के प्रमुख पद पर अपने उम्मीदवार को बैठाने के लिए दोनों देशों ने मुहिम तेज कर दी है। इस पद के लिए होने वाले चुनाव से तय होगा कि इंटरनेट के संचालन में दोनों में से किस देश का ज्यादा दखल होगा।
जानकारों के मुताबिक आईटीयू के प्रमुख पद के चुनाव ने कभी दुनिया का ध्यान उस तरह नहीं खींचा, जैसा इस बार हो रहा है। अमेरिकी टीकाकारों ने चेतावनी दी है कि अगर रूसी उम्मीदवार जीत गया, तो उसका दुनिया के लिए क्या मतलब होगा, इसे अभी कई देश ठीक से नहीं समझ रहे हैं। अमेरिका के नेशनल टेलीकम्युनिकेशन्स एंड इनफॉर्मेशन एडमिनिट्रेशन के प्रमुख एलन डेविडसन ने कहा है- ‘इस बात को समझने के लिए आपको सिर खपाने की जरूरत नहीं है। आज के दौर और इस दौर की भू-राजनीति के बीच यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण है कि उचित संचार नेटवर्क कितने खुलेपन के साथ काम करते हैं।’ उन्होंने अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा- ‘यूक्रेन में जो रहा है, अगर हम उसे देख पा रहे हैं, उसका एक कारण संचार का खुलापन भी है।’
इन्हें बनाया उम्मीदवार
अमेरिका ने आईटीयू के प्रमुख पद के लिए डोरीन बोगडम-मार्टिन को अपना उम्मीदवार बनाया है। अगर विजयी रहीं, तो वे आईटीयू की पहली महिला प्रमुख होंगी। उनका मुकाबला रूस के राशिद इस्माइलोव से है। इस्माइलोव कई बड़ी संचार कंपनियों के लिए काम कर चुके हैं। उनमें नोकिया, इरिक्सन और हुवावे भी हैं।
अमेरिका के फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन की अध्यक्ष जेसिका रोजेवर्सेल बॉडगम-मार्टिन के पक्ष में जोरदार प्रचार अभियान में जुटी हुई हैं। इस सिलसिले में उन्होंने इस हफ्ते यूरोप का दौरा किया। इसके अलावा वे एशिया और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधियों से भी लगातार मिल रही हैं। विश्लेषकों ने कहा है कि आईटीयू की क्या भूमिका होनी चाहिए, इसे लेकर दुनिया में एक खास तरह का टकराव चल रहा है। चीन और रूस की दलील है कि इंटरनेट स्टैंडर्ड और प्रोटोकॉल तय करने का अधिकार सरकारों के पास होना चाहिए। जबकि पश्चिमी देश चाहते हैं कि ये अधिकार निजी क्षेत्र के पास बना रहे।
193 देश डालेंगे वोट
आईटीयू के प्रमुख पद का चुनाव गुप्त मतदान के जरिए होगा। उसमें संयुक्त राष्ट्र के सदस्य सभी 193 देशों को वोट डालने का अधिकार होगा। ये चुनाव इस साल सर्दियों में बुखारेस्ट में आईटीओ के होने वाले सम्मेलन के दौरान होगा। अमेरिका बडगम-मार्टिन के पक्ष में यह दलील दे रहा है कि वे तकरीबन 30 साल से आईटीयू में काम कर रही हैं। इसलिए वे इसके प्रमुख का रोल निभाने के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हैँ।
गैर सरकारी संस्था जर्मन मार्शल फंड में फेलॉ सुजेन नेस ने वेबसाइट एक्सियोस से कहा- ‘आईटीयू में आम तौर पर फैसले आम सहमति से होते हैँ। लेकिन इंटरनेट पर नियंत्रण एक महत्त्वपूर्ण सवाल है, जिसके महत्त्व की अनदेखी किसी को नहीं करनी चाहिए।’ डेविडसन ने कहा- अगर कोई अधिनायकवादी सोच वाला व्यक्ति इस पद पर आ गया, तो उसका क्या परिणाम होगा, इसको लेकर हम चिंतित हैँ।