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Russia Ukraine War: यूक्रेन में रूस ने पूरा किया खास मकसद, लुहांस्क के आखिरी शहर पर भी करा कब्जा 

Mon, 04 Jul 2022 02:51 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Mon, 04 Jul 2022 02:51 PM IST
सार

यूक्रेन की सेना लिसिचांस्क शहर से पीछे हट गई है। लुहांस्क इलाके में यह आखिरी बड़ा शहर है, जहां अब तक यूक्रेनी सेना का कब्जा था। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इस बात की पुष्टि की है कि रूस समर्थित दोनबास की सेना ने अब इस शहर पर पूरा कब्जा जमा लिया है।

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Russia accomplished a special purpose in Ukraine, captured the last city of Luhansk
पुतिन - फोटो : Twitter @KremlinRussia_E

विस्तार

यूक्रेन के लुहांस्क इलाके में स्थित लिसिचांस्क शहर पर कब्जा होने के साथ ही रूस ने अपनी सैनिक कार्रवाई का एक प्रमुख मकसद हासिल कर लिया है। रविवार को ये खबर आई कि यूक्रेन की सेना लिसिचांस्क शहर से पीछे हट गई है। लुहांस्क इलाके में यह आखिरी बड़ा शहर है, जहां अब तक यूक्रेनी सेना का कब्जा था। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इस बात की पुष्टि की है कि रूस समर्थित दोनबास की सेना ने अब इस शहर पर पूरा कब्जा जमा लिया है। इसके साथ ही ‘लुहांस्क पीपुल्स रिपब्लिक’ को उसने यूक्रेन से मुक्त करा लिया है।
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बीते 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन में अपनी ‘विशेष सैनिक कार्रवाई’ शुरू की थी। तब राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन इस कार्रवाई के ये तीन उद्देश्य घोषित किए थे- दोनबास इलाके को यूक्रेन से मुक्त कराना, यूक्रेन में नाजी विचारधारा वाले गुटों का सफाया, और यूक्रेन को इस बात पर मजबूर करना कि वह नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) का सदस्य नहीं बनेगा। समझा जाता है कि यूक्रेन का मारियापोल शहर नाजी संगठनों का गढ़ था। वहां पहले ही रूसी सेना अपना कब्जा जमा चुकी है।
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रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यूक्रेन की सेना ने लुहांस्क के दो मोर्चों- सिविरोदोनेत्स्क और लिसिचांस्क पर लंबी लड़ाई लड़ी। लेकिन अब रूस ने ये दोनों मोर्चे फतह कर लिए हैँ। लुहांस्क और दोनेत्स्क ये दोनों क्षेत्र पूर्वी यूक्रेन में स्थित दोनबास का हिस्सा हैं। इस क्षेत्र में रूस समर्थिक गुटों और यूक्रेन की सेना के बीच 2014 से झड़प चल रही थी। इस क्षेत्र की बहुसंख्यक आबादी रूसी मूल की है। राष्ट्रपति पुतिन ने इस इलाके को यूक्रेन से मुक्त कराने का लक्ष्य रखा था। इसके पहले 2014 में उन्होंने रूसी बहुल इलाके वाले एक अन्य क्षेत्र क्राइमिया को रूस में मिला लिया था।
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समझा जाता है कि दोनबास को रूस में मिलाने के बजाय पुतिन प्रशासन इसे रूस संरक्षित स्वतंत्र देश के रूप में संगठित करेगा। सीरिया पहले ही इस क्षेत्र को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दे चुका है। अमेरिकी रेडियो- एनपीआर की वेबसाइट पर छपे एक विश्लेषण में कहा गया है- ‘अब व्यावहारिक रूप में पूरे दोनबास इलाके पर रूस का नियंत्रण हो जाएगा। राष्ट्रपति पुतिन इसे अपनी जीत के रूप में पेश करने की स्थिति में होंगे। इसके बावजूद यहां कब्जा करने में रूस को उससे कहीं ज्यादा वक्त लगा, जितनी पुतिन ने उम्मीद की थी।’

दोनबास क्षेत्र कोयला और स्टील उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र है। इसीलिए यहां कब्जे को रूस की बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है। इसके अलावा अब यहां से रूस यूक्रेन के दक्षिण-पूर्व क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की स्थिति में होगा। वहां कब्जा होने पर दोनबास और क्राइमिया के बीच जमीनी संपर्क जुड़ जाएगा।


विश्लेषकों के मुताबिक इस इलाके के हाथ से निकलने के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर जेलेन्स्की पर रूस से बातचीत करने और उसकी शर्तों के मुताबिक समझौता करने का दबाव बढ़ेगा। अब देखने की बात यह होगी कि जेलेन्स्की सरकार नाटो से जुड़ी रूस की शर्त को मानती है या नहीं। रूस का कहना है कि अगर यूक्रेन ये शर्त मान ले, तो युद्ध खत्म होने का रास्ता निकल आएगा। 

 
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