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UNSC: भारतीय दूत ने प्रभावी बहुपक्षवाद पर यूएन चार्टर के सिद्धांतों पर उठाए सवाल, स्थायी सदस्यता पर दिया जोर

Tue, 25 Apr 2023 05:55 AM IST
देव कश्यप एएनआई, न्यूयॉर्क।
एएनआई, न्यूयॉर्क। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 25 Apr 2023 05:55 AM IST
सार

राजदूत कंबोज ने कहा कि भले ही हम इस मुद्दे पर बहस कर रहे हैं और चाहते हैं कि 'प्रभावी बहुपक्षवाद' कायम रहे, लेकिन हम सामूहिक रूप से बहुपक्षीय व्यवस्था की कमियों से अवगत हैं जो समकालीन चुनौतियों का जवाब देने में विफल रही है, चाहे वह कोविड महामारी हो या यूक्रेन में चल रहा संघर्ष।

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Ruchira Kambo at UN Open Debate on Effective Multilateralism through Defense of the Principles of UN Charter
रुचिरा कंबोज, संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि। - फोटो : Twitter@ruchirakamboj

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सोमवार को आयोजित "संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों की रक्षा के माध्यम से प्रभावी बहुपक्षवाद" पर खुली बहस में संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि राजदूत रुचिरा कांबोज ने हिस्सा लिया। रुचिरा कंबोज ने पूछा कि क्या 'प्रभावी बहुपक्षवाद' को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों की रक्षा का बचाव करके अमल में लाया जा सकता है, जो पांच देशों को दूसरों की तुलना में अधिक शक्तिशाली बनाता है और उन पांचों में से प्रत्येक को शेष 188 सदस्य देशों की सामूहिक इच्छा को अनदेखा करने की शक्ति प्रदान करता है।

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राजदूत कंबोज ने कहा, भले ही हम इस मुद्दे पर बहस कर रहे हैं और चाहते हैं कि 'प्रभावी बहुपक्षवाद' कायम रहे, लेकिन हम सामूहिक रूप से बहुपक्षीय व्यवस्था की कमियों से अवगत हैं जो समकालीन चुनौतियों का जवाब देने में विफल रही है, चाहे वह कोविड महामारी हो या यूक्रेन में चल रहा संघर्ष। कंबोज ने कहा, इसके अलावा, आतंकवाद, कट्टरवाद, जलवायु न्याय और जलवायु कार्रवाई, विघटनकारी गैर-देश संगठन, ऋण और कई भू-राजनीतिक प्रतियोगिताओं जैसी महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियां वैश्विक शांति और सुरक्षा को कमजोर करना जारी रखे हुए है।
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उन्होंने यह भी पूछा कि क्या 21वीं सदी में एक निकाय के माध्यम से बहुपक्षवाद को प्रभावी ढंग से अमल में लाया जा सकता है जो "लूट का माल विजेता का है" के सिद्धांत का जश्न मनाता है।
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बहस के दौरान तीसरा सवाल उठाते हुए कंबोज ने पूछा, क्या हम वास्तव में संयुक्त राष्ट्र चार्टर का बचाव करके 'प्रभावी बहुपक्षवाद' को बढ़ावा दे सकते हैं, जहां दो स्थायी सदस्य अपने नाम भी बदलवाने में सक्षम नहीं हो पाए हैं? चार्टर का अनुच्छेद 109 कभी नहीं चाहता है कि इसे हमेशा के लिए पत्थर की लकीर बना दिया जाए, और इसीलिए इसने 10वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा से पहले चार्टर की एक सामान्य समीक्षा सम्मेलन आयोजित करने की सिफारिश की थी। 77 साल बाद, हम इसे हकीकत बनाने के करीब भी नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि यूएनएससी को अपनी प्रभावशीलता और विश्वसनीयता के लिए अधिक विकासशील देशों के बीच इस कोर संस्थान के अपने प्रतिनिधित्व को विस्तृत करना होगा। उन्होंने आगे कहा, अगर हम 1945 की पुरातनपंथी मानसिकता को बनाए रखना जारी रखते हैं, तो हम अपने लोगों का संयुक्त राष्ट्र में विश्वास खोते रहेंगे।

यूएनएससी में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग की
उन्होंने कहा, भारत 26 जून, 1945 को सैन फ्रांसिस्को में संयुक्त राष्ट्र चार्टर का संस्थापक हस्ताक्षरकर्ता है। उन्होंने यूएनएससी में भारत की स्थायी सदस्यता के बारे में दृढ़ता से कहा कि 77 साल बाद जब हम देखते हैं कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ-साथ अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के पूरे महाद्वीपों को वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है, तो हम सही तरीके से इसमें प्रमुख सुधार की मांग करते हैं।


जयशंकर के बयान को दोहराया
कंबोज ने कहा कि पिछले साल सितंबर में यूएनजीए ने 70 से अधिक वैश्विक नेताओं से सुधारों के लिए एक समान आह्वान सुना। जैसा कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 14 दिसंबर 2022 को इस परिषद की खुली बहस में कहा था और आज मैं उसे उद्धृत करती हूं, "हमारा साझा एजेंडा और भविष्य का शिखर सम्मेलन तभी परिणाम देगा, जब वे बहुपक्षवाद में सुधार की बढ़ती मांग पर जवाब देंगे। सुधार आज की जरूरत है। और मुझे विश्वास है कि ग्लोबल साउथ विशेष रूप से दृढ़ रहने के लिए भारत के दृढ़ संकल्प को साझा करता है।"



उन्होंने कहा, बहुपक्षीय संस्थान शायद ही कभी खत्म होते हैं। वे बस अप्रासंगिकता में मिट जाते हैं। एक जमाने में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 'मॉडल यूएन' रोल प्ले और वास्तविक दुनिया के बीच बहुत लंबा फासला था। उन्होंने पूछा कि क्या वह दूरी कम हो रही है।

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