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रिसर्च: 329 एयरोस्पेस इंजीनियर, 72 न्यूरोसर्जन से अलग-अलग पेशे वाले आम लोगों की तुलना, जानें कौन निकला ज्यादा बुद्धिमान?

Tue, 14 Dec 2021 07:14 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 14 Dec 2021 07:14 PM IST
सार

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के रिसर्चरों की एक हालिया स्टडी में रॉकेट साइंटिस्ट्स और ब्रेन सर्जन्स की बुद्धिमत्ता की तुलना आम लोगों से की गई है। यह रिसर्च ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल 'बीएमजे' में भी छापी गई।

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Rocket scientists Brain surgeons intelligence compared with ordinary people of different professions know who came out on top study claims news and updates
रॉकेट साइंटिस्ट्स, ब्रेन सर्जन्स और आम लोगों की बुद्धिमानी की तुलना में आए चौंकाने वाले नतीजे। - फोटो : Social Media

विस्तार

'ये काम कोई रॉकेट साइंस नहीं' या 'ये बात ब्रेन सर्जरी जैसी कठिन भी नहीं'। आम भाषा में यह दोनों वाक्य पूरी दुनिया में एक ही समय में इस्तेमाल होते हैं। तब, जब कोई व्यक्ति किसी कठिन काम को करने या समझने की कोशिश करता है। यानी आम जीवन में माना जाता है कि कोई रॉकेट साइंटिस्ट या ब्रेन सर्जन साधारण व्यक्ति से ज्यादा बुद्धिमान होता है और वह मुश्किल से मुश्किल समस्या को आसानी से सुलझा लेता है। हालांकि, अब एक स्टडी में सामने आया है कि किसी रॉकेट साइंटिस्ट या ब्रेन सर्जन की बुद्धिमानी आम इंसान से कुछ खास अलग नहीं होती और कोई साधारण व्यक्ति भी इन प्रोफेशन में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है। 
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यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के रिसर्चरों की एक हालिया स्टडी में रॉकेट साइंटिस्ट्स और ब्रेन सर्जन्स की बुद्धिमत्ता की तुलना आम लोगों से की गई है। यह रिसर्च ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल 'बीएमजे' में भी छापी गई है। इसमें सामने आया है कि लोकप्रिय मान्यता के उलट एयरोस्पेस इंजीनियर और न्यूरोसर्जन की बुद्धिमत्ता का स्तर भी आम आबादी की तरह ही होता है। स्टडी में कहा गया, "यह संभव है कि दोनों न्यूरोसर्जन्स और एयरोस्पेस इंजीनियर्स सामाजिक पायदान में काफी ऊपर रखे जा रहे हों और कुछ और पेशे (प्रोफेशन्स) इससे भी कठिन हों।"
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कैसे टेस्ट की गई बुद्धिमता?
यूसीएल के रिसर्चर्स ने इस स्टडी के लिए 329 एयरोस्पेस इंजीनियर्स, 72 न्यूरोसर्जन और 18,257 आम लोगों की बुद्धिमानी की तुलना की। इस स्टडी में हिस्सा लेने वालों का एक ऑनलाइन टेस्ट कराया गया, जिसमें उनक बुद्धिमानी के अलग-अलग पहलुओं की जांच की गई। इसमें योजना बनाने (प्लानिंग) से लेकर तर्क (रीजनिंग), काम करने के दौरान की याद रखने की क्षमता (वर्किंग मेमोरी), ध्यान (अटेंशन) और भावना प्रसंस्करण (इमोशन प्रोसेसिंग) की जांच की गई। 
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इसके अलावा स्टडी के दौरान बुद्धिमत्ता पर प्रभाव डालने वाली चीजें जैसे लिंग (जेंडर), काम संभालने का कौशल (हैंडेडनेस) और अनुभव (एक्सपीरियंस) पर भी ध्यान दिया गया। 

क्या आए नतीजे?
स्टडी के नतीजे काफी चौंकाने वाले रहे। इसमें सामने आया कि एयरोस्पेस इंजीनियर्स और न्यूरोसर्जन्स की बुद्धिमानी के अधिकतर पहलू एक जैसे रहे। हालांकि, एयरोस्पेस इंजीनियर्स जहां मानसिक तौर पर चालाकी की क्षमताओं में बेहतर पाए गए, तो वहीं न्यूरोसर्जन्स की अर्थपूर्ण समस्याओं को सुलझाने की क्षमता ज्यादा अच्छी निकली। 


जब इनके नतीजों की तुलना की गई तो सामने आया कि एयरोस्पेस इंजीनियर्स और आम जनता की बुद्धिमानी में कोई खास अंतर नहीं था। हालांकि, न्यूरोसर्जन्स किसी भी समस्या को आम लोगों के मुकाबले ज्यादा तेजी से सुलझाते देखे गए। लेकिन उनकी किसी चीज को याद करने की क्षमता आम लोगों से धीमी पाई गई। हालांकि, पूरी स्टडी में यह स्पष्ट नतीजा दिया गया कि रॉकेट साइंस और ब्रेन सर्जरी यह कोई ऐसे कठिन काम नहीं हैं, जो इस पेशे वाले लोगों को आम जनता से अलग बनाते हैं।  
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