शोध: फाइजर और बायोएनटेक वैक्सीन का बूस्टर डोज काफी प्रभावी, लेने के बाद कोरोना का खतरा कम
अगर किसी को कोरोना की दोनों डोज लगी हैं, अगर वह बूस्टर डोज ले लेता है तो उसे संक्रमण होने की दर कम है। बूस्टर डोज को कोरोना के सबसे खतरनाक वैरिएंट डेल्टा पर भी काफी प्रभावी पाया गया है।
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दुनियाभर में कोरोना खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है, रोज सैकड़ों मौंतें एक दिन में दर्ज की जा रही हैं। संक्रमण को रोकने का एकमात्र तरीका है वैक्सीन, जिन्होंने वैक्सीन के पूरे डोज ले लिए हैं उनको बूस्टर डोज देने की बात चल रही है। वहीं कोरोना के बूस्टर डोज को लेकर जर्मन पार्टनर कंपनी बायोएनटेक एसई और फाइजर इंक ने एक शोध किया है।
इस शोध के मुताबिक पता चला है कि अगर किसी को कोरोना की दोनों डोज लगी हैं, अगर वह बूस्टर डोज ले लेता है तो उसे संक्रमण होने की दर कम है। बूस्टर डोज को कोरोना के सबसे खतरनाक वैरिएंट डेल्टा पर भी काफी प्रभावी पाया गया है।
दवा निर्माता कंपनियों ने बताया कि शोध में शामिल छह साल या उससे अधिक उम्र के 10,000 प्रतिभागियों में इसका परीक्षण किया गया था और कोरोना से जुड़ी बीमारियों के खिलाफ यह बूस्टर डोज 95.6 फीसदी प्रभावशाली देखा गया। इन प्रतिभागियों में डेल्टा वैरिएंट के लक्षण वाले व्यक्ति भी शामिल थे। अध्ययन के मुताबिक बूस्टर डोज लोगों की सुरक्षा को लेकर काफी अनुकूल है।
दवा निर्माताओं ने शोध के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि अध्ययन में दूसरी डोज और बूस्टर डोज में लगभग 11 महीने का समय था। ज्यादातर प्रतिभागियों की उम्र 53 वर्ष थी और 55.5 फीसदी प्रतिभागी 16 से 55 साल के बीच के थे। 65 साल से ऊपर के प्रतिभागी 23.3 फीसदी थे।
मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन के बूस्टर को एफडीए ने दी मंजूरी
अमेरिकी खाद्य व दवा प्रशासन (एफडीए) ने मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन के टीकों की तीसरी बूस्टर खुराक के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। उसने कहा है कि जैनसेन कोविड-19 टीके की एकल बूस्टर खुराक का उपयोग 18 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के लोगों को प्राथमिक डोज पूरा होने के कम से कम दो माह बाद दिया जा सकता है। एफडीए ने मिक्स एंड मैच बूस्टर खुराक को मंजूरी दी है।
एफडीए ने मॉडर्ना टीके की एकल बूस्टर खुराक के उपयोग को प्राइमरी डोज के कम से कम 6 महीने के बाद 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए तथा 18 से 64 वर्ष की आयु के कोविड के उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए अधिकृत किया है। जॉनसन एंड जॉनसन बूस्टर खुराक के लिए, एफडीए ने 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए एकल-खुराक के पूरा होने के कम से कम 2 महीने बाद एकल बूस्टर खुराक के उपयोग को अधिकृत किया।
एफडीए के अनुसार, उपलब्ध कोविड-19 टीकों में से किसी की एकल बूस्टर खुराक को एक अलग उपलब्ध कोविड-19 वैक्सीन के साथ प्राथमिक टीकाकरण के पूरा होने के बाद मिक्स एंड मैच बूस्टर खुराक के रूप में प्रशासित किया जा सकता है। यानी जिसे जे एंड जे का टीका मिला है वह बूस्टर के रूप में मॉडर्ना या फाइजर से यह खुराक ले सकता है।
अध्ययन में दावा: मौत का जोखिम 90 फीसदी कम करने में कारगर है कोविशील्ड
कोविशील्ड की दो खुराक कोरोना के डेल्टा वैरिएंट से होने वाली मौतों को रोकने में 90 फीसदी तक कारगर हो सकती है। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित शोध में सामने आया है कि कोविड के डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ फाइजर-बायोएनटेक की दो खुराक संक्रमण के बाद मौत से 90 फीसदी तक सुरक्षा देती है।
वहीं, ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका (कोविशील्ड) की दोनों खुराक 91 फीसदी संक्रमितों में मौतों को रोकने में प्रभावी है। एक अप्रैल से 27 सितंबर, 2021 के बीच स्कॉटलैंड में 54 लाख लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। 115,000 लोग संक्रमित पाए गए, जिनमें से 201 की मौत हो गई। एजेंसी
एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के अशर संस्थान के निदेशक प्रोफेसर अजीज शेख कहते हैं, डेल्टा वैरिएंट महामारी से तनाव का प्रमुख कारण है। हालांकि, यह अच्छी बात है कि टीके की दो खुराक के बाद संक्रमण से मौत के खिलाफ व्यापक सुरक्षा मिलती है। स्ट्रैथक्लाइड विश्वविद्याल के प्रोफेसर क्रिस रॉबर्टसन कहते हैं, यह डेल्टा जैसे घातक वैरिएंट से भी मौत के जोखिम को बहुत कम कर देता है।