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जोसेफ स्टालिन से इतनी नफरत क्यों करती थी उनकी बेटी?

Tue, 30 Jan 2018 04:32 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Tue, 30 Jan 2018 04:32 PM IST
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 Why did Joseph Stalin's daughter Svetlana Alliluyeva hate him 
- फोटो : social media

जब उनकी मौत हुई तब वो लारा पीटर्स थीं। इससे पहले उनका नाम स्वेतलाना अलिलुयेवा था और उससे भी पहले वो स्वेतलाना लोसिफोवना स्टालिन के नाम से जानी जाती थीं। वो सोवियत संघ के नेता और शासक जोसेफ स्टालिन की एकलौती बेटी थीं। जोसेफ स्टालिन ने 1922 से 1953 तक सोवियत संघ पर शासन किया था।

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स्टालिन के दो बेटे थे पर वो उनकी खास थीं. स्टालिन का जीवन विनयशीलता और विद्रोह के बीच एक विरोधाभास था। इसका असर स्वेतलाना के जीवन पर पड़ा। यहां तक कि उन्हें अपना नाम बदलने के लिए क्रेमलिन से इजाजत लेनी पड़ी थी। इसके लिए उन्हें लोगों की आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा था कि वो स्टालिन की पहचान मिटा रही हैं।
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स्वेतलाना अलिलुयेवा की बायोग्राफी 'स्टालिन्स डॉटरः द एक्सट्राऑर्डिनरी एंड टूमलट्यूअस लाइफ ऑफ स्वेतलाना अलिलुयेवा' की लेखक रोजमेरी सुलीवन कहती हैं, "उन्होंने पूरा जीवन अपने पिता के नाम से जिया।" स्वेतलाना की जिंदगी पर चार सालों तक कई देशों में शोध और उनके परिवार के दर्जनों सदस्यों, दोस्तों और परीचितों से इंटरव्यू करने वाली सुलीवन के मुताबिक स्टालिन की बेटी एक योद्धा थीं।
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सुलीवन ने बीबीसी मुंडो से कहा, "उनमें कल्पनाशक्ति थी, लिखने का जुनून था। वो अपने पिता के नाम में खुद को कैद महसूस करती थीं। वो निराश हो चुकी थीं, लेकिन उन्होंने इसके खिलाफ लड़ना बंद नहीं किया। उनका दृढ़ संकल्प बहुत प्रभावशाली था।" स्वेतलाना का जन्म 26 फरवरी 1926 को हुआ था। वो स्टालिन की सबसे छोटी संतान थीं। उनके लाल बाल और नीली आंखें उनकी नानी की तरह थीं।

वो क्रेमलिन की राजकुमारी थीं, लेकिन कहा जाता है कि वो वहां सादगी से जीवन जीती थीं. स्वेतलाना जोसेफ स्टालिन की कमजोरी थीं। स्टालिन उन्हें नन्हीं बुलबुल या छोटी तितली कह कर बुलाते थे। सुलीवन की किताब में स्वेतलाना की मां नाद्या की एक दोस्त के मुताबिक स्टालिन को अगर कोई शांत कर सकता था तो वो स्वेतलाना थीं।

स्वेतलाना साढ़े छह साल की थीं जब उनकी मां ने आत्महत्या की थी। एक वयस्क के तौर पर स्वेतलाना ने कहा था कि उनके पिता की क्रूरता से बचने के लिए मां के पास आत्महत्या के अलावा कोई और रास्ता नहीं था। स्टालिन अपनी बेटी पर नाद्या की मौत का असर समझते थे। जब भी स्वेतलाना अपने पिता से कुछ मांगती थीं तो स्टालिन कहते थे, "मांग क्यों रही हैं, आप आदेश दीजिए और मैं उसे तुरंत पूरा करूंगा।"

'साम्यवाद की योद्धा'
स्वेतलाना का स्कूली जीवन स्टालिन के विशाल व्यक्तित्व के साथ गुजरा। उनकी छवि हर जगह थी। सुलीवन के मुताबिक स्वेतलाना कहती थीं, "लेनिन मेरे आदर्श थे। मार्क्स और एंगल्स हमारे प्रचारक और स्टालिन तो बिना अपवाद के हमेशा सही थे।"

2011 में मरने से पहले स्वेतलाना ने रूस के वर्तमान राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन की आलोचना की थी। उनके मुताबिक पुतिन उनके पिता की तरह जी रहे थे। 1939 में गृह विभाग ने स्वेतलाना को उनकी देखरेख करने वाली अलेक्जेंड्रा एंड्रीवना से दूर करने की कोशिश की। विभाग का मानना था कि अलेक्जेंड्रा पर विश्वास नहीं किया जा सकता था।

स्वेतलाना ने ऐसा न करने के लिए अपने पिता से बहुत मिन्नतें कीं। स्वेतलाना ने अपनी एक किताब में लिखा, "मेरे पिता मेरे आंसू नहीं देख सकते थे।" स्टालिन अपनी बेटी पर गर्व करते थे। वो सबसे कम उम्र की 'साम्यवाद की योद्धा' थीं। वह उस विचारधारा को गुलामों की मानसिकता मानती थीं जिसमें निजी विचारों पर अंकुश लगाया जाता था। 

 Why did Joseph Stalin's daughter Svetlana Alliluyeva hate him 
svetlana alliluyeva

किशोरावस्था में स्वेतलाना चंचल, सरल, मांग करने वालीं और उदार थीं. वो अपने पिता की एक डरी हुई बेटी थीं। 16 साल की उम्र में उन्हें अपनी मां की मौत के कारणों का पता चला जिसके बाद उनके मन में अपने पिता के खिलाफ गहरी नफरत पैदा हो गई। इसी दौरान वो यहूदी लेखक अलेक्सी कपलर से प्यार करने लगीं। अलेक्सी उनसे उम्र में काफी बड़े थे जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था।

सुलीवन ने बीबीसी वर्ल्ड से कहा, "यह वो वक्त था जब स्वेतलाना को समझ आया कि उनके पिता ने ही अलेक्सी को गिरफ्तार करवाया है। यहां से उन्हें यह एहसास होने लगा कि स्टालिन कौन थे।" इन घटनाओं ने उनके भ्रम को तोड़ डाला। सुलीवन के मुताबिक स्वेतलाना ने 1981 में लिखा, "मेरी आंखों से पर्दा हट गया। मैं अब और अंधी नहीं रह सकती।"

शादीशुदा ज़िंदगी
क्रेमलिन के बाहर स्वेतलाना अपनी ज़िंदगी ज्यादा आजादी से जीती थीं। मॉस्को यूनिवर्सिटी में इतिहास की पढ़ाई करने के दौरान वो ग्रिगोरी मोरोजोफ से मिलीं जिससे उन्होंने शादी कर ली। 19 साल की उम्र में उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया, जिसका नाम उन्होंने जोसेफ रखा। उनके परिवार के सदस्यों के मुताबिक स्वेतलाना एक बेहतर मां नहीं थी क्योंकि वो यह समझ नहीं पाईं थी कि एक मां कैसी होती है।

1947 में स्वेतलाना और गिग्रोरी का तलाक हो गया. ये तलाक उनके जीवन में हुए चार तलाकों में पहला था। पहले तलाक के बाद स्वेतलाना अपने पिता के पास लौटीं पर इस बार उन दोनों के बीच रिश्ते पहले जैसे नहीं थे। वो अपने पिता से बहुत कम मिलती थीं। स्टालिन ने भी अपने नाती से पहली मुलाकात तब की थी जब उसकी उम्र चार साल थी।


लेखिका सुलीवन के मुताबिक स्वेतलाना का अपने पिता के साथ रहना मुश्किल था पर फिर भी वो उनसे अलग नहीं हो सकती थीं। स्टालिन ने 1949 में अपनी बेटी को अपने नजदीकी रहे एक शख्स एंड्रे श्दानफ के बेटे यूरी श्दानफ से शादी करने के लिए कहा। स्वेतलाना के काफी मना करने के बाद भी उन्हें शादी करनी पड़ी। एक साल बाद उन्होंने कात्या को जन्म दिया, हालांकि शादी बहुत ज्यादा नहीं चल पाई।

स्वेतलाना खुद को अकेला महसूस करती थीं। वो स्टालिन के नौकरों के सामने रोया करती थीं। सुलीवन के मुताबकि स्वेतलाना ने लिखा था, "वे जानते थे कि मैं एक अच्छी बेटी नहीं थी और मेरे पिता एक बुरे पिता थे पर उन्होंने मुझे फिर भी प्यार दिया।" स्वेतलाना ने अपने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए राजनीति से दूर रहने का फैसला किया। वो गुमनामी में जीने की कोशिश करने लगीं। 

सरकार ने उन्हें अपने पिता के खिलाफ बोलने से मना कर दिया था। सरकार ने स्टालिन का सबकुछ अपने स्वामित्व में ले लिया था, यहां तक की स्वेतलाना को भी। 1957 में स्वेतलाना ने अपना उपनाम बदलने का फैसला किया। उन्होंने अपनी मां का उपनाम अलिलुयेवा रख लिया। उन्होंने कहा कि स्टालिन का नाम उनके दिल को चोट पहुंचाता है।

भारतीय नेता से प्रेम

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स्वेतलाना ने अंतिम सांस अमरीका में लीं

भावनात्मक अस्थिरता के बीच स्वेतलाना ने अपनी यादों को लिखना शुरू किया। सरकार उनके लिखे हुए को नष्ट न कर दे इसलिए वह जो भी लिखतीं उसे विदेश भेजने लगीं। 1963 में वो मॉस्को में एक भारतीय नेता ब्रजेश सिंह से मिलीं। एक बार फिर उन्होंने शादी करने का फैसला लिया, लेकिन सोवियत संघ की सरकार ने उन्हें इजाजत देने से मना कर दिया।

ब्रजेश सिंह की मौत उसी साल हो गई। स्वेतलाना विशेष इजाजत लेकर अपने पति (अनाधिकारिक) की अस्थियां भारत लेकर आईं। दिसंबर 1966 में उन्होंने अपने बच्चों को अंतिम बार देखा। उस समय जोसेफ की उम्र 18 और कात्या की उम्र 16 साल थी। हालांकि, भारत में रहते हुए उन्होंने अपने देश से प्यार होने की बात कही। ब्रजेश सिंह के बेटे ने स्वेतलाना को अमरीका जाने की सलाह दी और वहां की नागरिकता लेकर भारत वापस आ जाने को कहा।

स्वेतलाना को यह बात पसंद आई। अप्रैल, 1970 में उन्होंने प्रतिष्ठित अमरीकी वास्तुकार वेस्ले पीटर्स से शादी कर ली। वेस्ले से मिलने के तीन हफ्ते बाद स्वेतलाना ने अपना नाम बदलकर लाना पीटर्स कर लिया। 1971 में दोनों ने ओल्गा को जन्म दिया। 1978 में उन्हें अमरीका की नागरिकता मिली। इस समय तक उनका वेस्ले पीटर्स से तलाक हो चुका था। वो ओल्गा के साथ न्यू जर्सी चली गईं।

इस दौरान अपनी किताब को प्रकाशित करवाने और ओल्गा की शिक्षा के लिए वह 1981 में ब्रिटेन चली गईं। यहां रहते हुए करीब 15 साल बाद उनके बेटे जोसेफ का फोन आया। जोसेफ बीमार थे और उन्हें देखना चाहते थे। उन्होंने सोवियत संघ लौटने के बारे में सोचा। लेकिन, यहां आने के बाद उनके पासपोर्ट को सरकार ने जब्त कर लिया। उन्हें यह महसूस हुआ कि उन्होंने वहां लौट कर सबसे बड़ी गलती की।

दिसंबर 1984 में स्वेतलाना ओल्गा के साथ सोवियत संघ से निकलने में कामयाब रहीं. ओल्गा ब्रिटेन चली गईं और स्वेतलाना अमेरिका। इस दौरान उन्हें आर्थिक तंगी से भी गुजरना पड़ा। 1991 में उन्होंने आत्महत्या की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाईं। 2011 में उन्हें कैंसर हो गया। 22 नवंबर 2011 को 85 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। उनकी बेटी ओल्गा ने उनका अंतिम संस्कार किया।

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