पुतिन विरोधी नेता के कत्ल पर हंगामा
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रूस की राजधानी मॉस्को में सरकार विरोधी रैली के दो दिन पहले विपक्षी दल के नेता बोरिस नेम्तसोव की सरेआम हत्या पर कई सवाल खडे़ हो गए हैं।
नेम्तसोव ने रविवार को यूक्रेन में जारी युद्ध के खिलाफ एक रैली निकालने की अपील की थी। उनकी इस घोषणा के कुछ घंटे बाद ही उनकी हत्या कर दी गई।
पुलिस का कहना है कि नेम्तसोव क्रेमलिन के पास एक पुल को पार कर रहे थे, तभी एक कार में सवार एक अज्ञात बंदूकधारी ने उनकी कमर पर चार गोलियां दागीं। राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने इस घटना की निंदा की है। उनके प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया है कि पुतिन खुद इस घटना की जांच की निगरानी करेंगे।
दूसरी तरफ, यूक्रेन के राष्ट्रपति पेत्रो पोरोशेंको ने कहा कि नेम्तसोव के पास ऐसे सबूत थे जिससे यह साबित होता था कि यूक्रेन में जारी जंग में रूस का हाथ था। इसी वजह से नेम्तसोव की हत्या कर दी गई।
पोरोशेंको ने कहा ''बोरिस ने यह दावा किया था कि वो यूक्रेन में जारी जंग में रूस की भूमिका को उजागर करेंगे। कोई ऐसा था जो इस बात से बहुत डर गया था। लेकिन बोरिस निडर थे। नेम्सतोव के कातिल वे हैं जो उनसे डर गए थे।''
'सोची समझी रणनीति'
वहीं शहर में खोजी पत्रकार एलेक्जांद्र सोल्दातोव ने कहा कि नेम्तसोव पर हर पल सरकार की नजर थी। ऐसे में उनकी हत्या एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
सोल्दातोव ने कहा, ''नेम्तसोव हर वक्त सरकारी एजेंसियों की निगरानी में थे। फोन पर उनकी बातचीत के टेप आए दिन मीडिया को लीक किए जाते थे। ऐसे में उन्हें क्रेमलिन के सामने मारना एक बडी और सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकती है।''
दूसरी तरफ, मॉस्को में इस हत्या को लेकर लोगों की अलग-अलग राय हैं। कोई इसके लिए सरकार को दोषी मान रहा है तो किसी का कहना है कि सरकार को इससे कोई फायदा नहीं होगा।