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प्रत्यर्पण के ख़िलाफ़ अपील में जीते क़तादा

Tue, 13 Nov 2012 12:06 AM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Tue, 13 Nov 2012 12:06 AM IST
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radical cleric abu qatada wins deportation appeal

मौलवी अबू क़तादा का अब जॉर्डन प्रत्यर्पण नहीं होगा। क़तादा के वकील ने 'स्पेशल इमिग्रेशन अपील कमीशन' में उनके प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील की थी जिसे वो जीत गए। जॉर्डन में क़तादा के खिलाफ बम विस्फोट की साजिश रचने का आरोप है और उनके वकीलों का दावा था कि वहां उन्हें न्याय नहीं मिलेगा। लेकिन ब्रिटेन सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी।

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क़तादा का असली नाम उमर ओथमैन है। वे इस समय वोरसेस्टरशायर की एक जेल में क़ैद हैं। उनके वकील एडवर्ड फिट्जगेरल्ड ने उन्हे ज़मानत पर तुरंत रिहा करने की पील की है। कतादा के वकील कहा, “क़तादा को आजादी से वंचित नहीं रखा जा सकता। इतने साल बीत चुके हैं। हद की भी हद होती है।”
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क्या हुआ था?
जनवरी में ब्रिटेन की मानवाधिकार अदालत ने क़तादा के जॉर्डन भेजे जाने पर रोक लगा दिया था। बीबीसी संवाददाता के मुताबिक आने वाले सप्ताह में क़तादा की ज़मानत पर सुनवाई हो सकती है। हालांकि उन्हें ज़मानत मिलती भी है तो उन्हें कई शर्तों के साथ ही मिलेगी।
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क़तादा पर 1998 और 1999 में पश्चिमी और इसराइली ठिकानों पर धमाकों की कथित साजिश रचने का आरोप है। मौलवी क़तादा को उनकी गैरमौजूदगी में भी जॉर्डन में आतंकवाद से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था। हालांकि फलस्तीन में जन्मे जॉर्डन के अबू क़तादा को मुजाहिदीन का धार्मिक नेता माना जाता है। लेकिन सुरक्षा प्रमुख मानते हैं कि आत्मघाती हमलावरों के लिए समर्थन जुटाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि ब्रिटेन में उनके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है।

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