ईरान के संसदीय चुनावों में राष्ट्रपति रुहानी को बढ़त
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ईरान के संसदीय चुनावों में सुधारवादी राष्ट्रपति हसन रुहानी को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। चुनाव के बाद शनिवार को शुरू हुई मतगणना में आए शुरुआती रुझानों में सुधारवादी कट्टरपंथियों से आगे निकलते नजर आ रहे हैं। ये चुनाव नई संसद और देश की शीर्ष धार्मिक संस्था मजलिसे खोबरे-गान को चुनने के लिए हो रहे हैं।
यह संस्था ईरान के सर्वोच्च नेता को चुनती है। 290 सदस्यीय संसद और 88 सदस्यीय परिषद के लिए शुक्रवार को करीब तीन करोड़ तीस लाख लोगों ने मतदान किया था। शुरुआती नतीजों में भले ही सुधारवादी आगे चल रहे हाें, मगर उन्हें स्पष्ट बहुमत मिलने की कोई संभावना नहीं दिख रही।
फिलहाल ये नतीजे रुहानी के लिए राहत लेकर आए हैं। क्योंकि कट्टरपंथी खेमा रुहानी की विदेश नीति और देश में राजनीतिक सुधारों का लगातार विरोध करता आया है। वहीं रुहानी के नेतृत्व में सुधारवादी देश में लोकतांत्रिक बदलाव और पश्चिमी देशों के साथ बेहतर रिश्तों के पक्षधर हैं।
नई संसद रुहानी के लिए अधिक अनुकूल
सुधारवादियों की जीत से नई संसद रुहानी के लिए अधिक अनुकूल होगी। हालांकि,
आधिकारिक नतीजे आने में अभी कई दिनों का वक्त लग सकता है। फार्स और मेहर
न्यूज एजेंसियों के मुताबिक, इन चुनावों में कट्टरपंथी अपना जनाधार खो चुके
हैं।
इस बार यदि सुधारवादी चुनावों में सफल रहते हैं तो 2004 के बाद से
पहली बार संसद में उनकी स्थिति मजबूत होगी। परिषद के नए सदस्य देश के
सर्वोच्च धार्मिक नेता का चुनाव करेंगे। दुनिया के छह शक्तिशाली देशों के
साथ परमाणु समझौता करने के बाद ईरान में पहली बार चुनाव हुए हैं।
290 सांसद
और 6000 उम्मीदवार चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। चुनाव में
कोई राजनीतिक दल नहीं लेकिन सांसद बंटे हैं।