फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Rest of World ›   New Zealand passed legislation granting victims of domestic violence 10 days paid leave

अब घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं को मिलेगा वैतनिक अवकाश, अप्रैल 2019 से कानून लागू

Sun, 29 Jul 2018 01:14 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 29 Jul 2018 01:14 PM IST
विज्ञापन
New Zealand passed legislation granting victims of domestic violence 10 days paid leave

न्यूजीलैंड की संसद ने एक ऐसे प्रस्ताव को मंजूर किया है जिसके बाद घरेलू हिंसा पीड़ितों को 10 दिन की पेड लीव मिल सकेगी। डोमेस्टिक वॉयलेंस विक्टिम प्रोटेक्शन बिल को संसद ने मंजूरी दे दी है। ऐसा करने वाला न्यूजीलैंड दुनिया का पहला देश बन गया है। इस कानून के लागू होने के बाद घरेलू अत्याचार पीड़ितों को ठीक होने के लिए पेड लीव लेने का हक होगा।

विज्ञापन


कानून के अनुसार पीड़ितों को मिलने वाली यह पेड लीव बीमारी या दूसरी छुट्टियों के अतिरिक्त होंगी। जो लोग घरेलू हिंसा का शिकार नहीं हैं उन्हें इस लीव का लाभ नहीं मिलेगा। बता दें कि न्यूजीलैंड दुनिया के उन देशों में शुमार है जहां सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा की घटनाएं होती हैं। हर साल यहां एक लाख पांच हजार घरेलू हिंसा से जुड़े मामले सामने आते हैं। हर चार मिनट में पुलिस के पास घरेलू हिंसा की एक शिकायत आती है।
विज्ञापन


न्यूजीलैंड में 76 प्रतिशत मामलों की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई जाती है। इस कानून से 40 प्रतिशत परिवारों को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है जो कामकाजी हैं लेकिन घरेलू हिंसा को सहती हैं। इस बिल को लाने वाली ग्रीन पार्टी की सांसद जैन लोगी राजनीति में आने से पहले घरेलू हिंसा का शिकार होने वाली महिलाओं को शरण देने और उनके हक के लिए सात साल तक लड़ती रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


सांसद बनाने के बाद लोगी ने इसी मामले पर कानून बनाने की पहल की। उनका यह विधेयक 57 के मुकाबले 63 मतों से पास हो गया। सबसे खास बात यह है कि जैन के इस विधेयक को पास कराने में न्यूजीलैंड नेशनल पार्टी ने समर्थन नहीं दिया। एक अनुमान के अनुसार हर साल घरेलू हिंसा की वजह से न्यूजीलैंड को 48 हजार करोड़ रुपए का नुकसान होता है।


जैन ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य पीड़ितों की मदद करना है जो घरेलू हिंसा का शिकार होने के बाद मानसिक तौर पर टूट जाते हैं। इन हालातों में तनाव के कारण वह अपने कार्यस्थल पर ठीक तरह से काम नहीं कर पाते हैं। अनुपस्थिति की वजह से कई बार पीड़ित को नौकरी से हाथ धोना पड़ता है। मतलब घरेलू हिंसा के साथ ही उनकी रोजी-रोटी पर भी संकट पैदा हो जाता है। ऐसे लोगों की मदद करने के लिए ही यह कानून संसद में पेश किया गया, जो मंजूर हो गया है। उन्होंने इस कानून को पीड़ितों की जीत बताया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed