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Hiroshima Day 2021: 76 साल पहले जापान के हिरोशिमा पर अमेरिका ने गिराया था परमाणु बम, जानिए इसके बारे में सब कुछ
Fri, 06 Aug 2021 11:00 AM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Fri, 06 Aug 2021 11:00 AM IST
सार
दुनिया में पहली और आखिरी बार परमाणु बमों का इस्तेमाल दूसरे विश्वयुद्ध में हुआ था जब अमेरिका ने जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर हमला किया था। अमेरिका ने पहला परमाणु बम 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा और दूसरा 9 अगस्त 1945 को नागासाकी में गिराया था।
हिरोशिमा दिवस: 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा शहर पर परमाणु हमला किया था।
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
आज से ठीक 76 साल पहले यानी 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा शहर पर परमाणु हमला किया था। इसके तीन दिन बाद ही जापान के नागासाकी शहर पर दूसरा परमाणु बम गिराया गया। दोनों शहर लगभग पूरी तरह तबाह हो गए। दो लाख से अधिक लोगों की जान चली गई और जो बच गए, उनकी जिंदगी नर्क से बदतर हो गई। आइए जानते हैं दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी के बारे में...
वर्ष 1945 में दूसरे विश्वयुद्ध निर्णायक दौर में पहुंच रहा था। मित्र देशों की जीत लगभग तय हो चुकी थी। जर्मनी ने आत्मसमर्पण कर दिया था और सिर्फ जापान ही था जो मित्र देशों को टक्कर दे रहा था। जुलाई 1945 में अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल और सोवियत संघ के नेता जोसेफ स्टालिन जर्मनी के शहर पोट्सडम में मिले। यहां तय हुआ कि अगर जापान बिना किसी शर्त के समर्पण नहीं करता है तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे।
हिरोशिमा में 1.40 लाख की जानें गईं
6 अगस्त 1945 को सुबह के करीब आठ बजे हिरोशिमा पर परमाणु बम का जोरदार हमला हुआ। ये हमला इतना जबरदस्त था कि देखते ही देखते 1.40 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। बम धमाकों के बाद तापमान इतना ज्यादा बढ़ गया कि लोग जलकर खाक हो गए। एक मिनट के अंदर ही हिरोशिमा शहर का 80 फीसदी हिस्सा राख हो गया।
तबाही यही नहीं थमी। इसके बाद हजारों लोग परमाणु विकिरण से जुड़ी बीमारियों के चलते मारे गए। एक अध्ययन से पता चला कि बम गिरने की जगह के 29 किलोमीटर क्षेत्र में काली बारिश हुई। जिससे मौतें बढ़ीं और इस काली बारिश ने अपने संपर्क में आने वाली सभी चीजों को भी दूषित कर दिया।
तबाही यही नहीं थमी। इसके बाद हजारों लोग परमाणु विकिरण से जुड़ी बीमारियों के चलते मारे गए। एक अध्ययन से पता चला कि बम गिरने की जगह के 29 किलोमीटर क्षेत्र में काली बारिश हुई। जिससे मौतें बढ़ीं और इस काली बारिश ने अपने संपर्क में आने वाली सभी चीजों को भी दूषित कर दिया।
नागासाकी में करीब 70 हजार लोग मारे गए
जापान इस हमले से संभल पाता, इससे पहले ही अमेरिका ने 9 अगस्त को नागासाकी में दूसरा परमाणु बम गिरा दिया। 3 दिन के अंदर हुए इन दो हमलों से जापान पूरी तरह बर्बाद हो गया। मरने वालों का सटीक आंकड़ा आज तक पता नहीं चला। माना जाता है कि हिरोशिमा में 1.40 लाख और नागासाकी में करीब 70 हजार लोग मारे गए। इसके अलावा हजारों लोग घायल हुए। जापान के लोगों में आज भी इस त्रासदी जख्म मौजूद हैं।