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US: अमेरिकी संसद में उठा भोपाल त्रासदी का मामला; राष्ट्रीय रासायनिक आपदा जागरूकता दिवस मनाने का प्रस्ताव पेश

Thu, 05 Dec 2024 07:54 AM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: काव्या मिश्रा Updated Thu, 05 Dec 2024 07:54 AM IST
सार

प्रस्ताव में भारत में 1984 के भोपाल रासायनिक हादसे में जिंदा बचे लोगों के 40 सालों की कोशिशों को तवज्जो दी गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दुनिया भर में कोई अन्य समुदाय को ऐसी आपदा का सामना न करना पड़े। 

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Resolution introduced in US senate to designating Dec 3 as National Chemical Disaster Awareness Day News in hi
The US Capitol building - फोटो : एएनआई

विस्तार

दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक त्रासदी भोपाल शहर ने सन 1984 में 2-3 दिसंबर की दरमियानी रात में झेली थी। भोपाल गैस कांड एक ऐसा औद्योगिक हादसा था, जिसकी पीड़ा लाखों लोगों ने झेली। अब इस रासायनिक त्रासदी की 40वीं बरसी के अवसर पर तीन सांसदों ने तीन दिसंबर को राष्ट्रीय रासायनिक आपदा जागरूकता दिवस घोषित करने के लिए संसद में एक प्रस्ताव पेश किया है।
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इन तीन सांसदों ने प्रस्ताव किया पेश
सांसद जेफ मर्कले, रॉन वाइडन और पीटर वेल्च द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में भारत में 1984 के भोपाल रासायनिक हादसे में जिंदा बचे लोगों के 40 सालों की कोशिशों को तवज्जो दी गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दुनिया भर में कोई अन्य समुदाय को ऐसी आपदा का सामना न करना पड़े। इसके लिए तीन दिसंबर को राष्ट्रीय रासायनिक आपदा जागरूकता दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया गया है।
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क्या है भोपाल त्रासदी?
दो-तीन दिसंबर 1984 की वो काली रात... जब मध्यप्रदेश के भोपाल में एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ। इस रात ने भोपाल के हजारों लोगों की जिंदगी में अंधकार भर दिया। यह दिन मानव इतिहास की सबसे दर्दनाक औद्योगिक त्रासदियों में से एक बन गया। यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के कारखाने से निकलने वाली जहरीली गैस ने पूरे शहर को मौत और तबाही की चपेट में ले लिया था। 72 घंटे के अंदर करीब आठ हजार लोग मारे गए और पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए। आज इस हादसे को 40 साल पूरे हो रहे हैं। लेकिन भोपाल समेत पूरा देश आज भी इस काली रात को नहीं भूल पाया है।
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भारत  के साथ सममझौते का भी दिया हवाला
भविष्य में रासायनिक आपदाओं के खिलाफ निवारक उपाय उठाने के लिए खराब स्वास्थ्य, गरीबी और हाशिए पर पड़े लोगों के संघर्ष की सराहना करते हुए, प्रस्ताव में न्याय विभाग से भारत सरकार द्वारा डॉव इंक., जिसने यूनियन कार्बाइड की वह सुविधा खरीदी थी, जहां यह आपदा घटित हुई थी, के संबंध में किए गए अनुरोधों पर समय रहते कदम उठाने का आह्वान किया गया है। प्रस्ताव में 17 अक्तूबर, 2001 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर की गई आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता पर संधि (TIAS 05-1003) के तहत दायित्वों का पालन करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा आवश्यक किसी भी अन्य कार्रवाई का भी आह्वान किया गया है। 

क्या होगा राष्ट्रीय रासायनिक आपदा जागरूकता दिवस घोषित करने से?
यह रासायनिक आपदाओं के खतरों के बारे में जनता की समझ को मजबूत करने के लिए भोपाल रासायनिक आपदा के बचे लोगों के साथ जुड़ने का प्रयास करता है। साथ ही इस बात पर जोर देता है कि मानवाधिकारों का समर्थन करना और भेदभाव से स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करना दुनिया भर में संयुक्त राज्य अमेरिका की विदेश नीति के प्रमुख स्तंभ बने रहने चाहिए।


प्रस्ताव में कहा गया है कि यूनियन कार्बाइड और उसके प्रतिनिधियों ने भारत में अदालत में पेश होने के लिए बार-बार किए गए समन को नजरअंदाज किया है। भारत और अमेरिका के बीच 1942 से चली आ रही दो प्रत्यर्पण संधियों के तहत किए गए आवेदनों में भी उनकी उपस्थिति सुनिश्चित नहीं की गई है। 2001 से यूनियन कार्बाइड के मालिक डॉव इंक ने अपनी सहायक कंपनी को भोपाल आपदा से संबंधित किसी भी कार्यवाही में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं किया है।
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