फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Research Report Rice yield may be very low by the year 2050

शोध: भारत में भोजन की थाली से 2050 तक गायब हो सकता है चावल!

Wed, 17 Mar 2021 11:41 AM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: देव कश्यप Updated Wed, 17 Mar 2021 11:41 AM IST
विज्ञापन
Research Report Rice yield may be very low by the year 2050
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

बदलते मौसम, पानी की कमी और ग्लोबल वार्मिंग के कारण संभावना जताई जा रही है कि अगले 30 सालों में लोगों की थाली से चावल गायब हो सकती है। इलिनोइस विश्वविद्यालय के अमेरिकी शोधकर्ताओं की एक टीम ने भारत में दुनिया के सबसे बड़े चावल उगाने वाले क्षेत्रों में से एक में अध्ययन किया। इस टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि साल 2050 तक चावल के उत्पादन की मात्रा में भारी कमी देखने को मिल सकती है।

विज्ञापन


उत्पादन कम होने का अनुमान
शोधकर्ताओं की टीम ने बताया है कि अगर मृदा संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीकी का प्रयोग नहीं किया गया और फसल के समय अपशिष्ट को सीमित करने पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में चावल का उत्पादन बहुत कम हो सकता है। इस टीम ने बिहार में स्थित 'नॉर्मन बोरलॉग संस्थान' के चावल उत्पादन केंद्र पर अपने शोध को अंजाम दिया है। जिसका मकसद साल 2050 तक चावल की पैदावार और पानी की मांग का अनुमान लगाना था।
विज्ञापन


बदलते तापमान और मौसम का पड़ रहा प्रभाव
इस अध्ययन के प्रमुख लेखक और इलिनोइस विश्वविद्यालय में कृषि और जैविक इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर प्रशांत कलिता ने बताया कि बदलता मौसम, तापमान, वर्षा और कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता को प्रभावित करता है। ये विशेष रूप से चावल जैसी फसल की वृद्धि के लिए आवश्यक सामग्री हैं। अगर इनपर बुरा असर पड़ता है तो उत्पादन का प्रभावित होना तय है।
विज्ञापन
विज्ञापन


2050 तक बहुत कम हो जाएगी चावल की पैदावार
प्रोफेसर कलिता के अध्ययन के आधार पर अनुमान जताया गया है कि अगर चावल उत्पादक किसान वर्तमान प्रथाओं के साथ खेती जारी रखते हैं, तो उनके पौधों की उपज 2050 तक काफी कम हो सकती है। हमारे मॉडलिंग के परिणाम बताते हैं कि फसल की वृद्धि अवस्था सिकुड़ रही है। फसलों की बुआई से कटाई तक का समय तेजी से कम हो रहा है। इससे फसलें तेजी से परिपक्व हो रही हैं। इस कारण किसानों को पूरी उपज का फायदा नहीं मिल पा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed