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अमेरिकी राजनीति में ‘टर्निंग प्वाइंट’, कस रहा है धुर दक्षिणपंथ का शिकंजा
Thu, 13 May 2021 03:05 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Thu, 13 May 2021 03:05 PM IST
सार
लिज चेनी ने मंगलवार को हाउस में ट्रंप के गुट पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी रीगन की पार्टी है, जिसने लोकतंत्र का समर्थन किया है और जिसने शीत युद्ध में सोवियत संघ को पराजित किया...
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अमेरिकी सीनेट
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन के राजनीतिक विश्लेषक जैकरी बी वूल्फ ने कहा है कि बुधवार को अमेरिकी राजनीति ने एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट देखा। देश के दो प्रमुख दलों में से एक रिपब्लिकन पार्टी ने खुल कर ट्रंपिज्म (पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रास्ते) को अपना लिया।
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अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में रिपब्लिकन कॉकस के अध्यक्ष पद से लिज चेनी को हटाए जाने का ऐसा ही निष्कर्ष मोटे तौर पर अमेरिकी मेनस्ट्रीम मीडिया के दूसरे हिस्सों में भी निकाला गया है। इसे देश की सियासत में धुर दक्षिणपंथ के बढ़ रहे प्रभाव की झलक माना गया है।
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लिज चेनी पूर्व उप-राष्ट्रपति डिक चेनी की बेटी हैं। रिपब्लिकन पार्टी में वे ट्रंप विरोधियों में रही हैं। उन्होंने ट्रंप के इस दावे को कभी स्वीकार नहीं किया कि पिछले नवंबर में हुए राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडन चुनावी धांधली के कारण जीते। वूल्फ ने ध्यान दिलाया है कि लिज चेनी रिपब्लिकन पार्टी के धुर दक्षिणपंथी नीतियां अपनाने के खिलाफ रही हैं। उनके पिता डिक चेनी ने 1970 के दशक में पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के जमाने में व्हाइट हाउस में इंटर्न के रूप में काम शुरू किया था।
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पूर्व राष्ट्रपति जेराल्ड फोर्ड के समय वे व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ बने थे। पूर्व राष्ट्रपतियों रोनाल्ड रीगन और एचडब्ल्यू बुश के समय भी वे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में रहे। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने उन्हें अपने उप-राष्ट्रपति के रूप में चुना था। लिज चेनी को उसी विरासत की प्रतिनिधि समझा जाता है।
लिज चेनी ने मंगलवार को हाउस में ट्रंप के गुट पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी रीगन की पार्टी है, जिसने लोकतंत्र का समर्थन किया है और जिसने शीत युद्ध में सोवियत संघ को पराजित किया। इसलिए हमें सच बोलना चाहिए। पिछले चुनाव को किसी ने नहीं चुराया। इससे नाराज रिपब्लिकन पार्टी ने बुधवार को ध्वनि मत से मतदान कर चेनी को उनके पद से हटा दिया। इससे यह साफ हो गया कि रिपब्लिकन पार्टी पर आज भी डोनाल्ड ट्रंप की पूरी पकड़ है।
इस बीच अमेरिका में 120 से अधिक पूर्व सैनिक अधिकारियों के खुले पत्र से भी चिंता गहरा रही है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि देश इस समय गहरे संकट में है और अमेरिकी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर खुल कर हमले हो रहे हैं। इन पूर्व सैनिक अधिकारियों ने राष्ट्रपति जो बाइडन की नीतियों की कड़ी आलोचना की है। ये खुला पत्र ‘फ्लैग अफिसर्स फॉर अमेरिका’ की तरफ से लिखा गया है। पत्र मंगलवार को सार्वजनिक हुआ। इसकी भाषा और इसमें कही गई बातों से ये साफ है कि ये पूर्व अधिकारी ट्रंप समर्थक हैं। पत्र लिखने वाले पूर्व अधिकारियों ने दावा है कि उन्होंने सेना की वर्दी पहन कर दशकों तक देश की सेवा की है।
खुले पत्र में 2020 के चुनाव परिणाम और राष्ट्रपति बाइडन की ‘मानसिक और शारीरिक स्थिति’ पर सवाल खड़ा किए गए हैं। इसमें चीन, ईरान परमाणु डील, नस्ल भेद और सीमा पर दीवार जैसे मुद्दों की चर्चा की गई है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि ‘अमेरिका तेजी से समाजवाद और मार्क्सवाद की तरफ मुड़ गया है’ और देशवासियों से ऐसे जन प्रतिनिधियों को चुनने की अपील की गई है, जो ‘हमारे संवैधानिक गणराज्य और जनता की इच्छाओं की रक्षा करें’।
चिट्ठी लिखने वालों में रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल डोनाल्ड बुलडक भी हैं, जिन्होंने न्यू हैम्पशर राज्य से सीनेट की सीट के लिए अपनी उम्मीदवारी घोषित कर रखी है। इस पत्र को अमेरिकी सार्वजनिक जीवन में एक असाधारण घटना बताया गया है। पत्र लेखकों में से एक रिटायर्ड मेजर जनरल जो अर्बुकल ने वेबसाइट पॉलिटिको.कॉम से बातचीत में ये स्वीकार किया कि आम तौर पर रिटायर्ड जनरल और एडमिरल राजनीतिक गतिविधियों में शामिल नहीं होते। लेकिन उन्होंने कहा कि अभी चुप रहने के मतलब अपने कर्त्तव्य से मुंह मोड़ना होगा। उन्होंने कहा- ‘इस समय हमारा देश खतरनाक स्थिति में है।’