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Red Sea Attack: लाल सागर में भारतीय जहाज पर हमला, डूबा कार्गो पोत; 13 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचाया गया
Tue, 04 Aug 2026 10:39 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अदन
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Tue, 04 Aug 2026 10:39 PM IST
सार
Red Sea Attack: लाल सागर में भारत के झंडे वाले कार्गो जहाज पर विस्फोटकों से लदी नाव से हमला हुआ और जहाज डूब गया। हालांकि जहाज पर सवार 13 भारतीय समेत सभी 14 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। एनआरएफ ने हमले के लिए हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है। लाल सागर में व्यापारिक जहाज लगातार निशाने पर क्यों हैं? इससे वैश्विक समुद्री सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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भारतीय झंडे वाले जहाज पर किसने किया हमला?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
लाल सागर में एक बार फिर समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत के झंडे वाला एक मालवाहक जहाज विस्फोटकों से लदी नाव के हमले का शिकार हो गया और बाद में समुद्र में डूब गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार सभी 14 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया, जिनमें 13 भारतीय और एक यमनी नागरिक शामिल हैं।
भारतीय ध्वज वाले कार्गो पोत फैजे नूरे ओलिया पर यमन के पश्चिमी तट के पास हमला हुआ। सरकारी समर्थन प्राप्त नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स (एनआरएफ) के अनुसार, यह हमला हूती नियंत्रण वाले होदेदाह बंदरगाह से करीब 13 समुद्री मील दक्षिण में हुआ। इसके बाद यमन के तटरक्षक और नौसेना ने संयुक्त अभियान चलाकर सभी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला। सभी को चिकित्सा सहायता दी गई और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
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भारतीय ध्वज वाले कार्गो पोत फैजे नूरे ओलिया पर यमन के पश्चिमी तट के पास हमला हुआ। सरकारी समर्थन प्राप्त नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स (एनआरएफ) के अनुसार, यह हमला हूती नियंत्रण वाले होदेदाह बंदरगाह से करीब 13 समुद्री मील दक्षिण में हुआ। इसके बाद यमन के तटरक्षक और नौसेना ने संयुक्त अभियान चलाकर सभी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला। सभी को चिकित्सा सहायता दी गई और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
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हमला कैसे हुआ और किस पर आरोप लगा?
एनआरएफ के मुताबिक जहाज पर विस्फोटकों से लदी एक नाव से हमला किया गया। इस हमले के बाद कार्गो पोत समुद्र में डूब गया। एनआरएफ ने इस हमले के लिए यमन के हूती विद्रोही समूह को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि खबर लिखे जाने तक हूती समूह की ओर से इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हमले का सटीक समय भी सार्वजनिक नहीं किया गया।
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