तालिबान को मान्यता: चीन करेगा अफगानिस्तान में सरकार बनने के बाद फैसला, ब्रिटेन का कड़ा रुख

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग, लंदन Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 18 Aug 2021 05:20 PM IST

सार

अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज होने के बाद अब तालिबान को विश्व के कितने देश मान्यता देते हेैं, यह अहम सवाल है। चीन ने कहा है कि वह तालिबान सरकार बनने के बाद मान्यता पर फैसला करेगा। उधर, ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन ने एकतरफा मान्यता से इनकार किया है। 
 
तालिबान
तालिबान - फोटो : Agency
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विस्तार

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद अब उसे वैश्विक मान्यता का सवाल उठने लगा है। आरंभिक रूप से चीन, पाकिस्तान, रूस व चीन ने उसका समर्थन किया है, लेकिन अब चीन ने कहा है कि वह तालिबान सरकार बनने के बाद ही मान्यता पर फैसला करेगा। उधर, ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन ने पाक पीएम इमरान खान से कहा कि उनका देश तालिबान को एकतरफा मान्यता नहीं देगा। 
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तालिबान को कूटनीतिक मान्यता को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा कि अफगानिस्तान में सरकार बनने के बाद ही उनका देश इस बारे में फैसला करेगा। उम्मीद करते हैं कि सरकार मुक्त, समावेशी व व्यापक प्रतिनिधित्व वाली होगी। अफगान मामले में चीन की नीति स्पष्ट व सुसंगत है। 


चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से बीजिंग में पत्रकारों ने पूछा था कि चीन तालिबानी विद्रोहियों को कब तक मान्यता प्रदान करेगा? इस पर उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें सरकार बनने तक इंतजार करना होगा। इसके साथ ही तालिबान को आतंकी गुटों को इजाजत नहीं देने के वचन का भी पालन करना होगा। खासकर चीन के शिनजियांग प्रांत के उईगर आतंकी गुट- पूर्वी तुर्कीस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM) को। उइगर आतंकियों का यह संगठन अलकायदा से संबंधित बताया जाता है। ये चीन के अशांत शिनजियान प्रांत में सक्रिय हैं। यहां करीब एक करोड़ उईगर मुस्लिम रहते हैं। ये इस शिनजियान प्रांत की आजादी की मांग कर रहे हैं। 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अलकायदा संबंधी प्रतिबंध कमेटी ने उईगर आतंकियों के इस संगठन को वर्ष 2002 में आतंकी संगठनों की सूची में शामिल किया था। 

जॉनसन ने की इमरान खान से बात
उधर, अफगानिस्तान के हालात को लेकर ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन ने पाक पीएम इमरान खान से बात की। जॉनसन ने कहा कि अफगानिस्तान में नई सरकार को कोई भी मान्यता वैश्विक होना चाहिए न कि एकतरफा। जॉनसन अफगानिस्तान के हालात को लेकर विश्व के नेताओं से लगातार संपर्क में हैं, ताकि क्षेत्र में पैदा हुए संकट को लेकर समन्वित रणनीति बनाई जा सके। जॉनसन ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से भी बात की थी। 

महिलाओं की सुरक्षा की चिंता, 21 देशों का साझा बयान जारी
उधर, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा समेत 21 देशों ने साझा बयान जारी कर अफगानिस्तान में महिलाओं व लड़कियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। बयान में कहा गया है कि हम महिलाओं व लड़कियों के शिक्षा, कामकाज व आजादी के अधिकारों को लेकर चिंतित हैं। इन देशों ने अफगानिस्तान में सत्तारूढ़ लोगों व निकायों से कहा है कि वे महिलाओं के अधिकारों की गारंटी दें। हम अफगानिस्तान की महिलाओं को मानवीय आधार पर मदद के लिए तैयार हैं। हम हालात पर सतत नजर रखेंगे और देखेंगे कि भावी सरकार इनकी आजादी व अधिकारों की रक्षा करे। बीते 20 सालों में महिलाओं के ये अधिकार उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। 

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