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शोध में खुलासा: जलवायु से तय होता है इंसान के शरीर और दिमाग का आकार
Fri, 09 Jul 2021 03:46 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 09 Jul 2021 03:46 PM IST
सार
अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिकों के मुताबिक तापमान, वातावरण की नमी, और जलवायु संबंधी दूसरी स्थितियों का असर मानव जीवाश्मों पर देखा गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि मनुष्य जिस तापमान के बीच रहता है, उसके शरीर के आकार पर इस बात का सीधा असर होता है...
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- फोटो : Pixabay
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विस्तार
मनुष्य के शरीर का आकार जलवायु से तय होता है। ये दावा एक ताजा अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने किया है। इस अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक विकास क्रम के साथ मानव के शरीर और दिमाग का आकार बढ़ने की बात पहले ही साबित हो चुकी है। इसके मुताबिक तीन लाख साल पहले जब मनुष्य प्रजाति की उत्पत्ति हुई थी, तब की तुलना में आज का मनुष्य शारीरिक और दिमागी रूप से अधिक बड़े आकार का है। लेकिन इस बात पर बहस चलती रही है कि मानव शरीर एवं मस्तिष्क का विकास और किन कारणों से प्रभावित होता है।
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ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और जर्मनी के तुबिनगेन यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने ये पता लगाने के लिए एक अध्ययन किया। इस दौरान 300 मानव जीवाश्मों और वे जिस जलवायु में रहे, उससे जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इससे सामने आया कि मानव का विकासक्रम काफी हद तक जलवायु से प्रभावित होता है।
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इस अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिकों के मुताबिक तापमान, वातावरण की नमी, और जलवायु संबंधी दूसरी स्थितियों का असर मानव जीवाश्मों पर देखा गया। इस अध्ययन की रिपोर्ट नेचर कम्युनिकेशंस नाम के जर्नल में छपी है। इसमें कहा गया है कि मनुष्य जिस तापमान के बीच रहता है, उसके शरीर के आकार पर इस बात का सीधा असर होता है। तुबिगेन यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिक डॉ. मैनुएल विल ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा- ‘लोग जितने अधिक ठंडे माहौल में रहते हैं, मानव शरीर का आकार उतना बड़ा होता है। अगर आप ठंडे वातावरण में रहते हैं, तो आपका शरीर अधिक ताप पैदा करता है। लेकिन शरीर के ताप का क्षय अपेक्षाकृत कम होता है, क्योंकि शरीर का तल उसी दर से फैलता नहीं है।’
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वैज्ञानिकों ने कहा है कि जलवायु और शरीर के आकार के बीच यह संबंध बर्गमैन नियम के अनुरूप ही है। इस नियम के तहत भी बताया गया था कि ठंडे प्रदेशों में रहने वाले लोगों के शरीर का आकार बड़ा और गर्म प्रदेशों में रहने वाले लोगों के शरीर का आकार अपेक्षाकृत छोटा होता है। ये बात पशुओं में भी देखी गई है। आर्कटिक में रहने वाले ध्रुवीय भालू का आकार गर्म वातावरण में रहने वाले भालुओं से ज्यादा बड़ा होता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ मिलनर सेंटर फॉर इवोल्यूशन के वैज्ञानिक डॉ. निक लॉन्ग्रिच के मुताबिक ताजा अध्ययन से जो बात सामने आई है, उसमें आश्चर्यजनक कुछ नहीं है। इससे सिर्फ इस बात पर ध्यान गया है कि मानव शरीर का विकासक्रम दूसरे दुग्धपायी पशुओं से अलग नहीं है। लॉन्ग्रिच ताजा अध्ययन से संबंधित नहीं रहे हैं। उनके मुताबिक इस अध्ययन से सामने आया है कि शरीर में ताप पैदा होने और उसके क्षय का समान असर मनुष्य पर भी होता है।
ताजा अध्ययन से यह भी सामने आया कि जलवायु का मस्तिष्क के आकार पर भी असर होता है। लेकिन इसमें यह भी देखा गया कि ये असर जितना शरीर पर होता है, उतना दिमाग पर नहीं होता। यानी दिमाग पर ये असर कम होता है। अध्ययन से जुड़ी रहीं वैज्ञानिक आंद्रिया मेनिका ने कहा- इससे साफ हुआ है कि शरीर और दिमाग पर जलवायु परिस्थितियों का असर अलग-अलग होता है। अध्ययन से साबित हुआ कि मनुष्य के शरीर और दिमाग दोनों का आकार बढ़ रहा है, लेकिन इस वृद्धि की दर अलग-अलग है।