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विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम के वुहान दौरे को लेकर उठे सवाल, बोले- भविष्य के जोखिम को कम करना है मकसद
Wed, 13 Jan 2021 07:04 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 13 Jan 2021 07:04 PM IST
सार
वैज्ञानिकों के मुताबिक अभी तक सिर्फ इतनी जानकारी है कि कोविड-19 जैसे वायरस चमगादड़ में होते हैं। लेकिन अभी यह पता करना है कि कोविड-19 का असली स्रोत क्या था...
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- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के वैज्ञानिकों का दल गुरुवार को वुहान पहुंचेगा। अपनी यात्रा से पहले वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि उनके दौरे में कोई सियासी मकसद नहीं है। वे कोरोना वायरस के वजूद में आने के मामले की जांच भर करना चाहते हैं। उन्होंने कहा है कि उनके दौरे का एजेंडा साफ है और इसको लेकर किसी को कोई भ्रम नहीं रखना चाहिए।
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वैज्ञानिकों का ये दल उन स्थलों पर जाएगा, जहां से कोरोना महामारी की शुरुआत हुई। वह वहां देखेगा कि क्या अभी भी कोई ऐसे सैंपल मौजूद हैं, जिनकी ठीक से जांच ना हुई हो। वे समझने की कोशिश करेंगे कि इस वायरस ने कैसे दूसरे जीव से मनुष्यों में संक्रमण किया। कई वैज्ञानिकों ने अलग-अलग मीडिया संस्थानों से बातचीत में ये बात जोर देकर कही कि उनका मकसद इस महामारी के फैलने में चीन के दोष की तलाश नहीं है। इस टीम से जुड़े कुछ वैज्ञानिक ही चीन पहुंच रहे हैं। बाकी इस बारे में चल रहे अध्ययन में अपनी भूमिका निभाएंगे।
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जर्मनी के रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट में संक्रामक रोग विषय के प्रोफेसर फाबियान लीनडर्ट्ज ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से बातचीत में टीम के वुहान दौरे की अहमियत पर रोशनी डाली है। लीनडर्ट्ज वुहान जाने वाले वैज्ञानिकों में शामिल हैं। उन्होंने कहा है कि उन्हें इसे लेकर कोई भ्रम नहीं है कि इस दौरे से ही टीम कोविड-19 की उत्पत्ति का पूरा ज्ञान हासिल कर लेगी। लीनडर्ट्ज 2014 में पश्चिमी अफ्रीका में फैली इबोला महामारी के स्रोत की जांच से भी जुड़े रहे थे। उन्होंने इसका अध्ययन भी किया है कि चेचक का संक्रमण कैसे मनुष्य में हुआ था। लीनडर्ट्ज का अनुमान है कि चेचक का जानवर से इंसान में संक्रमण तकरीबन 25 हजार साल पहले हुआ था।
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लीनडर्ट्ज ने द गार्जियन से कहा, हमें देखना होगा कि सच तक पहुंचने में हमें कितना वक्त लगता है। इस बात की संभावना है कि हम एक तस्वीर लेकर वहां से लौटें। लेकिन हम वैज्ञानिक साक्ष्य प्राप्त कर लेंगे, इसकी संभावना नहीं है। लीनडर्ट्ज ने कहा कि उनकी टीम की यात्रा का मकसद चीन को दोषी ठहराना नहीं है। इसका मकसद आगे के लिए जोखिम को कम करना है। उन्होंने कहा, “ट्रंप की तरह अंगुली दिखाने से बच कर मीडिया हमारी मदद कर सकता है। हमारा काम राजनीतिक नहीं है।”
अन्य वैज्ञानिकों का भी मानना है कि वे वुहान सिर्फ इसलिए जा रहे हैं, क्योंकि पड़ताल की शुरुआत करने की वह सबसे उचित जगह है। वैज्ञानिकों के मुताबिक अभी तक सिर्फ इतनी जानकारी है कि कोविड-19 जैसे वायरस चमगादड़ में होते हैं। लेकिन अभी यह पता करना है कि कोविड-19 का असली स्रोत क्या था। क्या दूसरे किसी जीव में भी इसका संक्रमण हुआ और क्या मनुष्य से किसी अन्य जीव में इसका संक्रमण हो सकता है।
डब्ल्यूएचओ की टीम ने बताया है कि उसकी चीनी वैज्ञानिकों के साथ कुछ ऑनलाइन बैठकें हो चुकी हैं। अब वे आमने-सामने बैठ कर इस बारे में विचार-विमर्श करेंगे। टीम के साथ वुहान जा रहे वैज्ञानिक मारियन कूपमैन्स ने चीन के टीवी चैनल सीजीटीएन को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि डब्ल्यूएचओ ने बीमारी के सामने आने की चेतावनी दी थी। मुझे नहीं लगता कि कोई देश इससे बचा रहेगा। इसलिए यहां मामला किसी पर दोष मढ़ने का नहीं है। मकसद यह समझना और सीखना है कि भविष्य में ऐसे हालात के लिए दुनिया कैसे तैयार रहे। कूपमैन्स ने कहा कि महामारी वुहान से शुरू हुई, इसलिए वहां से जांच की शुरुआत करना उचित है। हमें ऐसा खुले दिमाग से करना है।
टीम में शामिल ब्रिटिश वैज्ञानिक प्रोफेसर जॉन वाटसन ने कहा है कि मैं वुहान खुले दिमाग से जा रहा हूं। टीम में शामिल सभी साथी इसी सोच के साथ जा रहे हैं। हम तथ्यों का पता लगाना चाहते हैं। हमें नहीं मालूम कि पहली यात्रा में ही हम सभी जवाब ढूंढ लेंगे। हो सकता है कि सभी जवाब कभी ना मिलें। लेकिन यह एक शुरुआत है।