Pakistan: पाकिस्तानियों को पसंद आ रहे शाकाहारी भारतीय व्यंजन; कराची वाले आलू टिक्की, मसाला डोसा के शौकीन
खाद्य समीक्षक का मानना है कि कराचीवासी महीने में दो से तीन बार बाहर खाना खाने के शौकीन हैं। एक सामान्य पाकिस्तानी परिवार महीने में कम से कम एक बार अपने भोजन की आदतों में कुछ अलग करने की कोशिश करता है। इसलिए उनकी भारतीय शाकाहारी व्यंजनों में रुचि बढ़ रही है।
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बदलते वक्त के साथ पाकिस्तान के लोगों का जायका भी बदलने लगा है। पाकिस्तान के लोगों को भारतीय शाकाहारी व्यंजन खूब पसंद आ रहे हैं। कोई डोसा का शौकीन है तो कोई आलू टिक्की और बड़ा पाव के स्वाद का दीवाना बन गया है। पाकिस्तान की औद्योगिक राजधानी कराची में हाल ही में विकसित हो रहे भारतीय व्यंजनों के इन स्टॉल और रेस्टोरेंट पर शाकाहारी पकवानों का स्वाद लेने के लिए पाकिस्तान के लोग लाइन में लग रहे हैं।
खाद्य समीक्षक हुमा शेख का मानना है कि कराचीवासी महीने में दो से तीन बार बाहर खाना खाने के शौकीन हैं। एक सामान्य पाकिस्तानी परिवार महीने में कम से कम एक बार अपने भोजन की आदतों में कुछ अलग करने की कोशिश करता है। इसलिए उनकी भारतीय शाकाहारी व्यंजनों में रुचि बढ़ रही है। क्योंकि हर आय वाले परिवार के लिए मौजूद हैं।
कराची के एमए जिन्ना रोड पर पुराने परिसर के अंदर छोटे महाराज करमचंद वेजिटेरियन फूड्स इन की सोयाबीन आलू बिरयानी, आलू टिक्की, पनीर कढ़ाई और मिक्स वेज पाकिस्तान के लोगों की पहली पसंद है। रेस्टोरेंट संचालक महेश कुमार कहते हैं कि कराची के लोगों में शाकाहारी व्यंजनों के प्रति रुचि बढ़ी है। दोपहर के वक्त रेस्टोरेंट पर काफी भीड़ रहती है।
कुमार बताते हैं कि रेस्टोरेंट 1960 में उनके पिता ने शुरू किया था। हमारे रेस्टोरेंट पर घर में बने मसाले और व्यंजन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली ताजी सब्जियां और तेल का प्रयोग होता है। यह मुस्लिम ग्राहकों को भाता है। रेस्टोरेंट के पास ही सदियों पुराना स्वामीनारायण मंदिर और एक गुरुद्वारा भी है।
कविता का बड़ा पाव खाने को उमड़ती है भीड़
शाकाहारी रेस्टोरेंट के अलावा कराची की सड़कों के किनारे लगे शाकाहारी फूड स्टॉल भी खूब चल रहे हैं। आठ महीने पहले कैंट इलाके में सड़क किनारे कविता ने फूड स्टॉल लगाकर मसाला डोसा, बड़ा पाव बेचना शुरू किया था। हालात यह हैं कि इनके व्यंजन पाकिस्तानियों को इतने पसंद आए कि वह स्टॉल पर भीड़ को बमुश्किल झेल पाती हैं। अब कविता की न केवल भाभी चंद्रिका दीक्षित, भाई जितेंद्र, मां नोमिता मिलकर तीन स्टॉल चला रहे हैं। ग्राहक उनको अब कविता दीदी बोलते हैं। वे कराची के लोगों में शाकाहारी व्यंजनों के प्रति बढ़ती रुचि को लेकर हैरान हैं।
आम पना और ढोकला के लिए लाइन में लगते हैं लोग
कैंट इलाके में ही सड़क किनारे ईसाई महिला मैरी रिचर्ड्स ढोकला, आम पना और दाल समोसा बेचती हैं। मैरी बताती हैं कि कविता और उनके परिवार को देखकर उन्होंने भी किस्मत आजमाई। मैं व्यंजन घर पर ही बनाती हूं। उनके स्टॉल पर भी खूब भीड़ रहती है। लोगों को ढोकला और आम पना के लिए लाइन में लगकर इंतजार करना पड़ता है।
दो बहनें बना रहीं पावभाजी, लोगों को पसंद आ रही
शहर के हुसैनाबाद क्षेत्र में दो बहने महरीन और लुबना मांसाहारी स्टॉल के बीच शाकाहारी व्यंजन बेचती हैं। दोनों बहनें सड़क किनारे बड़ा पाव, मसाला डोसा, शाकाहारी चावल और पावभाजी बेचती हैं। लुबना बताती हैं कि यह व्यंजन बनाना उन्होंने अपने बुजुर्गों से सीखा था। जो विभाजन के बाद भारत चले गए। दोनों बहनों के हाथ स्टॉल पर ग्राहकों को व्यंजन देने में व्यस्त रहते हैं। महरीन कहती हैं कि लोग शाकाहारी व्यंजनों को खा रहे हैं क्योंकि ये महंगे नहीं हैं। बल्कि स्वादिष्ट और जल्दी तैयार होने वाले हैं।
गुजराती परिवार के मसाला डोसा की भी मांग
बहादराबाद में भारत के जूनागढ़ के एक परिवार का मसाला डोसा लोगों की पसंद बना हुआ है। डोसा विक्रेता जफर कहते हैं कि सूर्यास्त के साथ उनका व्यापार शुरू होता है। उनके पिता ने सुजुकी वैन के स्क्रैप पर मसाला डोसा स्टॉल शुरू किया था। अब जफर कई तरह के मसाला डोसा बेचते हैं। खास बात यह है कि 500 रुपये कीमत होने के बाद भी उनके आलू मसाला डोसा की खूब मांग रहती है। जफर कहते हैं कि कराची में बहुत सारे भारत से आए प्रवासी हैं। जो शाकाहारी व्यंजन चाहते हैं। इसलिए भी शाकाहारी भारतीय व्यंजनों की मांग बढ़ गई है।
नवरत्न थाली के शौकीन बढ़ रहे
शहर के दूसरे छोर पर पॉश इलाके क्लिफ्टन क्षेत्र में महंगे राजधानी डिलाइट और नवाब राजवंश रेस्टोरेंट भी नवरत्न शाकाहारी थाली की मांग बढ़ने लगी है। रेस्टोरेंट के प्रबंधक जेरोम अर्नेस्ट कहते हैं कि रेस्टोरेंट में प्रवेश करते ही राजस्थानी और गुजराती भोजन की सुगंध लोगों को पसंद आती है। यहां सब्जी, पनीर, दाल के व्यंजन, चटनी, अचार, मसालेदार दही, ढोकला, चावल, नमकीन लस्सी और गुलाब जामुन और छोटे कटोरे के साथ धातु की ट्रे में ताजी चपाती के साथ नवरतन शाकाहारी थाली 1500 रुपये में मिलती है।
यह थाली राजस्थानी वेशभूषा पहने वेटर परोसते हैं। अर्नेस्ट बताते हैं कि नवरत्न थाली की मांग बढ़ी है। उनका कहना है कि पारंपरिक भारतीय शाकाहारी व्यंजनों की गुणवत्ता कराची में बेहतर होती जा रही है। कुछ पाक स्कूलों में अब भारतीय शाकाहारी व्यंजन का पाठ्यक्रम भी है।