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US: तुर्किए की छात्रा को हिरासत में लेने का विरोध, हमास के समर्थन का आरोप लगने के बाद मामला में आया नया मोड़
Fri, 28 Mar 2025 11:43 AM IST
बशु जैन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: बशु जैन
Updated Fri, 28 Mar 2025 11:43 AM IST
सार
तुर्किये की छात्रा को मंगलवार की रात को घर जाते वक्त रास्ते में कुछ नकाबपोश लोगों ने रोक लिया और हथकड़ी लगाकर हिरासत में ले लिया। उस पर हमास समर्थक होने का आरोप लगाया था। इसे लेकर लोग सड़क पर उतर आए और छात्रा की रिहाई की मांग की।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
अमेरिका के टफ्ट्स विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली तुर्किए की एक छात्रा को हिरासत में लिया गया। अधिकारियों ने छात्रा पर हमास का समर्थन करने का आरोप लगाया। इसके बाद छात्रा को हिरासत में लिए जाने का विरोध शुरू हो गया। छात्रा के वकील, दोस्त समेत तमाम लोगों ने हमास समर्थन के आरोपों को नकारते हुए उसे रिहा करने की मांग की।
रुमेया ओतुर्क मंगलवार की रात को अपने दोस्तों से मिलने के लिए सोमरविले स्थित अपने घर से निकली थी, लेकिन रास्ते में कुछ नकाबपोश लोगों ने उसे रोक लिया और हथकड़ी लगाकर हिरासत में ले लिया। इसके बाद उनको लुइसियाना के एक आईसीई हिरासत केंद्र में ले जाया गया। इसे लेकर होमलैंड सुरक्षा विभाग के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि ओतुर्क हमास के समर्थन वाली गतिविधियों में शामिल थी। हालांकि विभाग ने उस समर्थन का सबूत नहीं दिया।
वहीं विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि हमने रोज की तरह आज भी ओतुर्क सहित कम से कम 300 लोगों के वीजा रद्द कर दिए। हमने आपको आने और अध्ययन करने और डिग्री प्राप्त करने के लिए वीजा दिया है, न कि एक सामाजिक कार्यकर्ता बनने के लिए, हमारे विश्वविद्यालय परिसरों को नष्ट करने के लिए।
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ये भी पढ़ें: महान क्रिकेटर स्टीव वॉ को मिली खास जिम्मेदारी, भारत-ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को मजबूत करने की कवायद
छात्रा पर हमास समर्थक होने का आरोप लगने के बाद लोग विरोध में उतर आए। ओतुर्क के दोस्तों ने कहा कि वह विरोध प्रदर्शनों में शामिल नहीं थी। वह केवल एक छात्र समाचार पत्र में एक ऑप-एड का सह-लेखन करती है। उसकी दोस्त जेनिफर होयडेन ने कहा कि रुमेया ने केवल थैंक्सगिविंग पोटलक का आयोजन किया था। जो आरोप उस पर लगाए रहे हैं। इसका कोई सबूत नहीं है।
इसके बाद बड़ी संख्या में लोग ओतुर्क की रिहाई की मांग को लेकर सोमरविले सिटी हॉल में आए। लोगों ने ICE छापों को लेकर इस्राइल के खिलाफ आवाज उठाई। लोगों ने फलस्तीनियों का समर्थन करते हुए गाने भी गाए। साथ ही नारेबाजी की। लेबनानी अमेरिकी कैरिना कुर्बान ने कहा कि जब उन्होंने ओतुर्क और अन्य लोगों की गिरफ्तारी के बारे में सुना तो वे क्रोधित हो गईं।
कुर्बान ने कहा कि मैं यहीं पैदा हुई हूं। मैं एक अमेरिकी नागरिक हूं, और मुझे उस विशेषाधिकार का उपयोग करने की जरूरत है जो मुझे उन लोगों के लिए बोलने के लिए मिला है जो इस प्रशासन के साथ जो कुछ भी हो रहा है उसके कारण नहीं बोल सकते हैं। अमेरिका मुक्त भाषण पर बनाया गया था, इसलिए यदि हमारे पास वह नहीं है, तो क्या? तो हम कहां जाएं?
ये भी पढ़ें: कोलंबिया विश्वविद्यालय ने मुझे धोखा दिया', अमेरिका से स्व-निर्वासित हुई भारतीय छात्रा का छलका दर्द
क्या है मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रुमेया ओतुर्क मंगलवार की रात को अपने दोस्तों से मिलने के लिए सोमरविले स्थित अपने घर से निकली थी, लेकिन रास्ते में कुछ नकाबपोश लोगों ने उसे रोक लिया और हथकड़ी लगाकर हिरासत में ले लिया। एक वीडियो में दिख रहा है कि छह लोगों ने ओतुर्क को पकड़ा और उनके चेहरों पर नकाब था। इतना ही नहीं उनकी कार पर नंबर प्लेट भी नहीं थी। पकड़े जाने पर छात्रा चिल्लाई। इस पर आसपास के कुछ लोगों ने जब मदद की कोशिश की तो नकाबपोश लोगों ने बताया कि वे पुलिस हैं। हालांकि उन्होंने अपना चेहरा छिपाने की वजह नहीं बताई।
इफ्तार के लिए दोस्तों के पास जा रही थी
ओतुर्क की वकील महसा खानबाबाई ने कहा कि वह इफ्तार के लिए दोस्तों से मिल रही थीं। ओतुर्क के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया गया है। वकील ने मंगलवार को उनकी रिहाई की याचिका दायर की और फिर बुधवार को एक आपातकालीन प्रस्ताव दिया। इस पर यूएस डिस्ट्रिक्ट जज इंदिरा तलवानी ने एक आदेश जारी किया जिसमें सरकार से शुक्रवार तक पूछा गया है कि ओतुक को समय दिया गया था कि ओजतुर्क को क्यों हिरासत में लिया गया था? उन्होंने यह भी कहा कि ओतुर्क को 48 घंटे की अग्रिम सूचना के बिना मैसाचुसेट्स जिले से बाहर नहीं ले जाया जाए। ,
टफ्ट्स विवि के अध्यक्ष सुनील कुमार ने कहा कि हम स्थानीय, राज्य और संघीय अधिकारियों के संपर्क में हैं और उम्मीद करते हैं कि रुमेया को अपने उचित प्रक्रिया अधिकारों का लाभ उठाने का अवसर प्रदान किया जाएगा। मार्च में ओतुर्क समेत चार छात्रों ने द टफ्ट्स डेली में एक लेख लिखा था। इसमें छात्रों की मांगों पर विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया की आलोचना की गई थी कि टफ्ट्स फलस्तीनी नरसंहार को स्वीकार करे। अपने निवेशों का खुलासा करे और इस्राइल से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध रखने वाली कंपनियों से अलग हो जाए।
संबंधित वीडियो
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रुमेया ओतुर्क मंगलवार की रात को अपने दोस्तों से मिलने के लिए सोमरविले स्थित अपने घर से निकली थी, लेकिन रास्ते में कुछ नकाबपोश लोगों ने उसे रोक लिया और हथकड़ी लगाकर हिरासत में ले लिया। इसके बाद उनको लुइसियाना के एक आईसीई हिरासत केंद्र में ले जाया गया। इसे लेकर होमलैंड सुरक्षा विभाग के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि ओतुर्क हमास के समर्थन वाली गतिविधियों में शामिल थी। हालांकि विभाग ने उस समर्थन का सबूत नहीं दिया।
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वहीं विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि हमने रोज की तरह आज भी ओतुर्क सहित कम से कम 300 लोगों के वीजा रद्द कर दिए। हमने आपको आने और अध्ययन करने और डिग्री प्राप्त करने के लिए वीजा दिया है, न कि एक सामाजिक कार्यकर्ता बनने के लिए, हमारे विश्वविद्यालय परिसरों को नष्ट करने के लिए।
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छात्रा पर हमास समर्थक होने का आरोप लगने के बाद लोग विरोध में उतर आए। ओतुर्क के दोस्तों ने कहा कि वह विरोध प्रदर्शनों में शामिल नहीं थी। वह केवल एक छात्र समाचार पत्र में एक ऑप-एड का सह-लेखन करती है। उसकी दोस्त जेनिफर होयडेन ने कहा कि रुमेया ने केवल थैंक्सगिविंग पोटलक का आयोजन किया था। जो आरोप उस पर लगाए रहे हैं। इसका कोई सबूत नहीं है।
इसके बाद बड़ी संख्या में लोग ओतुर्क की रिहाई की मांग को लेकर सोमरविले सिटी हॉल में आए। लोगों ने ICE छापों को लेकर इस्राइल के खिलाफ आवाज उठाई। लोगों ने फलस्तीनियों का समर्थन करते हुए गाने भी गाए। साथ ही नारेबाजी की। लेबनानी अमेरिकी कैरिना कुर्बान ने कहा कि जब उन्होंने ओतुर्क और अन्य लोगों की गिरफ्तारी के बारे में सुना तो वे क्रोधित हो गईं।
कुर्बान ने कहा कि मैं यहीं पैदा हुई हूं। मैं एक अमेरिकी नागरिक हूं, और मुझे उस विशेषाधिकार का उपयोग करने की जरूरत है जो मुझे उन लोगों के लिए बोलने के लिए मिला है जो इस प्रशासन के साथ जो कुछ भी हो रहा है उसके कारण नहीं बोल सकते हैं। अमेरिका मुक्त भाषण पर बनाया गया था, इसलिए यदि हमारे पास वह नहीं है, तो क्या? तो हम कहां जाएं?
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क्या है मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रुमेया ओतुर्क मंगलवार की रात को अपने दोस्तों से मिलने के लिए सोमरविले स्थित अपने घर से निकली थी, लेकिन रास्ते में कुछ नकाबपोश लोगों ने उसे रोक लिया और हथकड़ी लगाकर हिरासत में ले लिया। एक वीडियो में दिख रहा है कि छह लोगों ने ओतुर्क को पकड़ा और उनके चेहरों पर नकाब था। इतना ही नहीं उनकी कार पर नंबर प्लेट भी नहीं थी। पकड़े जाने पर छात्रा चिल्लाई। इस पर आसपास के कुछ लोगों ने जब मदद की कोशिश की तो नकाबपोश लोगों ने बताया कि वे पुलिस हैं। हालांकि उन्होंने अपना चेहरा छिपाने की वजह नहीं बताई।
इफ्तार के लिए दोस्तों के पास जा रही थी
ओतुर्क की वकील महसा खानबाबाई ने कहा कि वह इफ्तार के लिए दोस्तों से मिल रही थीं। ओतुर्क के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया गया है। वकील ने मंगलवार को उनकी रिहाई की याचिका दायर की और फिर बुधवार को एक आपातकालीन प्रस्ताव दिया। इस पर यूएस डिस्ट्रिक्ट जज इंदिरा तलवानी ने एक आदेश जारी किया जिसमें सरकार से शुक्रवार तक पूछा गया है कि ओतुक को समय दिया गया था कि ओजतुर्क को क्यों हिरासत में लिया गया था? उन्होंने यह भी कहा कि ओतुर्क को 48 घंटे की अग्रिम सूचना के बिना मैसाचुसेट्स जिले से बाहर नहीं ले जाया जाए। ,
टफ्ट्स विवि के अध्यक्ष सुनील कुमार ने कहा कि हम स्थानीय, राज्य और संघीय अधिकारियों के संपर्क में हैं और उम्मीद करते हैं कि रुमेया को अपने उचित प्रक्रिया अधिकारों का लाभ उठाने का अवसर प्रदान किया जाएगा। मार्च में ओतुर्क समेत चार छात्रों ने द टफ्ट्स डेली में एक लेख लिखा था। इसमें छात्रों की मांगों पर विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया की आलोचना की गई थी कि टफ्ट्स फलस्तीनी नरसंहार को स्वीकार करे। अपने निवेशों का खुलासा करे और इस्राइल से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध रखने वाली कंपनियों से अलग हो जाए।
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